सहारनपुर: कोरोना से ठीक हुए लोगों में लंग्स फाईब्रोसिस के लक्षण
कोरोना संक्रमित मरीजों में निमोनिया व फाइब्रोसिस के लक्षण पाये जाते हैं रोगियों के फेफड़ों में सिकुड़न व सूजन आने लगती है;
सहारनपुर। कोविड -19 से संक्रमित हुए लोग जो ठीक हो चुके है उनमे से कुछ फीसदी लोगों में लंग्स फाइब्रोसिस की मौजूदगी डॉक्टरों द्वारा एक्सरे रिपोर्ट में देखी जा रही है।
जिला अस्पताल में कार्यरत कोविड19 नोडल अधिकारी शिवांका गौड ने आज कहा कि कोरोना संक्रमित मरीजों में निमोनिया व फाइब्रोसिस के लक्षण पाये जाते हैं। रोगियों के फेफड़ों में सिकुड़न व सूजन आने लगती है और सांस लेने छोडने मे परेशानी होती है। ऑक्सीजन का स्तर ऐसे में कम हो जाता है। ऐसे स्थिति में यौगिक प्राणायाम व लंग्स को लचीला बनाने वाले आसन यदि किये जाए तो रोगी को आराम मिलता है।
योग गुरु गुलशन कुमार से इस विषय पर कहा कि जो लोग कोविड के संक्रमण से बच गये है उन मे से 20-30 फीसदी लोगो में शोर्टनैस आफ ब्रीदिग, आक्सीजन के स्तर में गिरावट, खांसी व शारीरिक थकान के लक्षण आ रहे है।
कोरोना से ठीक होने के बाद लोगो में निमोनिया के लक्षण भी देखे जा रहे है जिससे दस बीस कदम चलने से या सीढियां चढने पर सांस फूलने की शिकायते आ रही है। रोगियों का आक्सीजन का स्तर 98 से घटकर 70-80 तक रह जाता है।
ऐसे में यदि यौगिक प्राणायाम किया जाए तो डायाफ्राम को स्ट्रेन्थ मिलती है व अतिरिक्त कफ को बाहर निकालने मे मदद मिलती है।
गहन श्वास प्रश्वास ( डीप ब्रीदिंग ) करने से अल्वोलाई सेक्स में वायू का आदान प्रदान होने से सक्रियता आने लगती है जिससे आक्सीजन का स्तर बढने से सुधार होने लगता है। फाईब्रोसिस में अल्वोलाई मे गाढा द्रव्य भर जाता है।
उन्होंने कहा कि सांस लेने में तकलीफ अधिक होने पर रोगी लेटे लेटे धीमी गति से गहरी सांस नासिका से भरे और धीरे पूरी छोड़ दे । यह क्रम तब तक करे जब तक थकान नहीं हो।
यदि रोगी बैठ सके तो बैठ कर या कुर्सी पर बैठ कर प्राणायाम करे। इस अवस्था में होठों को सीटी की तरह गोल बना कर सांस धीरे धीरे लेते जाए और नासिका छिद्रों से छोड दे यह क्रम भी 20 बार करे।
अनुलोम विलोम प्राणायाम करें यह क्रम भी बीस बार करे शनैः शनैः समयावधि बढाते जाये। जब अभ्यास करते हुए थकने लगे तो आराम करे । उपरोक्त अभ्यास दिन में बार बार करे । फाइब्रोसिस की समस्या से जूझ रहे अनेको मरीजों को इन विधियों से लाभ मिला है।
इसके साथ साथ रोगियों को ताडासन, कोणासन, गोमुखासन, भुजंगासन , मकरासन, शवासन आदि कराने से लाभ मिलता है। ओंकार ध्यान , सकारात्मक सोच पोष्टिक आहार, विटामिन सी से भरपूर फल, हरी सब्जियां लेने से शीध्र लाभ होता है।