आतंकी कसाब को फांसी दिलवाने वाली ने 12 साल बाद खटखटाया बांबे हाईकोर्ट का दरवाजा

आतंकी कसाब को मौत के फंदे तक पहुंचाने में मददगार साबित हुई थी।;

Update: 2020-08-26 02:07 GMT

मुंबई 26 नवंबर, 2008 आतंकियों ने जब मुंबई पर हमला किया, तब देविका नटवरलाल रोटावन ,सिर्फ नौ साल की थी। वह छत्रपति शिवाजी टर्मिनस के प्रतीक्षालय में पुणे जाने के लिए ट्रेन का इंतजार कर रही थी कि आतंकी के एके-47 से निकली गोली उसके दाएं पैर में आ धंसी अथाह पीड़ा और अथक उपचार के बाद वह ठीक तो हो गई, लेकिन उससे किए गए वादे आज तक पूरे नहीं हुए। तंगी में गुजर बसर कर रही देविका ने सरकार पर वादा खिलाफी का आरोप लगाते हुए बांबे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

देविका के अनुसार, इलाज के बाद जब वह घर लौटी तो महाराष्ट्र व केंद्र सरकार के कई अधिकारी उसके यहां आए। उन्होंने ईडब्ल्यूएस कोटे से आवास तथा वित्तीय मदद का भरोसा भी दिया। दिल्ली निवासी वकील उत्सव बेंस के माध्यम से दाखिल याचिका में देविका ने बताया कि सरकार की तरफ से दिए गए 3.5 लाख रुपये उसकी चिकित्सा और ऑपरेशन के बाद देखभाल में खत्म हो गए। उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मदद की गुहार लगाई थी। इसके बाद महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने 10 लाख रुपये की मदद की, लेकिन वे भी टीबी के इलाज में खत्म हो गए।

देविका ने बताया कि कोरोना की महामारी में उसके पिता व भाई की नौकरी छूट गई और अब आलम यह है कि किराया नहीं चुकाए जाने के कारण मकान मालिक का भी धैर्य जवाब दे रहा है। बता दें कि देविका और उसके पिता नटवरलाल रोटावन ने ही अदालत में गवाही दी थी जो आतंकी कसाब को मौत के फंदे तक पहुंचाने में मददगार साबित हुई थी।

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