जिला अस्पताल में स्टाफ मोबाइल पर व्यस्त-नवजात की जिंदा जलकर मौत
बच्चे को देखते ही अस्पताल कर्मियों के हाथ-पांव फूल गए थे। जब तक सूचना देकर चिकित्सकों को बुलाया गया तब तक नवजात की मौत हो चुकी थी।;
कौशांबी। जिला अस्पताल में एक नवजात शिशु की वार्मर मशीन के हीटिंग पैड़ पर जिंदा जल जाने से दुखद मौत हो गई है। बच्चे को देखते ही अस्पताल कर्मियों के हाथ-पांव फूल गए थे। जब तक सूचना देकर चिकित्सकों को बुलाया गया तब तक नवजात की मौत हो चुकी थी।
फतेहपुर के हरिश्चंद्रपुर निवासी जुनैद अहमद ने अपनी पत्नी मेहिलिका को 14 अगस्त को प्रसव पीडा होने के बाद जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। उसी दिन की शाम तकरीबन 6.15 बजे मेहिलिका ने बेटे को जन्म दिया। बेटा होने से पिता समेत अन्य परिवार वाले बेहद ही खुश थे। परिवार वालों को उम्मीद थी कि अब वह जल्दी ही मेहिलिका व नवजात को रिचार्ज करा कर अपने घर चले जाएंगे। लेकिन चिकित्सकों ने बच्चे को पूरी तरह से स्वस्थ नही होने की बात कहते हुए एसएनसीयू वार्ड में शिफ्ट कर दिया। आरोप है कि सुरक्षा के चलते पूरी रात परिवार के लोगों को नवजात के पास जाने नहीं दिया गया। सुबह बच्चे की नाना और नानी जब बच्चे को देखने गये तो उस समय बच्चे का शरीर पूरी तरह से नीला पड़ चुका था और उसके शरीर से धुआं निकल रहा था। सीने और पेट का हिस्सा फटा हुआ दिखाई दे रहा था। बालक की इस हालत को देख अस्पताल कर्मियों के पसीने छूट गए और उन्होंने आनन-फानन में चिकित्सकों को बुलाया। चिकित्सकों ने जांच पड़ताल करने के बाद बालक को मृत घोषित कर दिया। वालों ने नवजात की मौत को लेकर अस्पताल में जमकर हंगामा किया। परिवारजनों ने जब घटना को लेकर छात्रों से सवाल किए तो उन्होंने कहा माफ कर दीजिए गलती हो गई है। इतना कहकर वह चले गए। फिर नजर नहीं आए। इस्पेक्टर मनीष पांडे ने बताया है कि उनके पिता जुनैद अहमद की शिकायत पर मामले की जांच की जा रही है। उधर सीएमएस डॉ दीपक सेठ ने कहा है कि मामले की जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। परिजनों का आरोप है कि जिस समय बच्चा एसएनसीयू वार्ड की मशीन में रखा हुआ था उस समय अस्पताल का स्टाफ मोबाइल पर व्यस्त था। जिसके चलते उन्होंने बच्चे की स्थिति पर ध्यान नहीं दिया और उसकी जिंदा जलकर मौत हो गई।