वकील साहब के रुपए-बंदर ने दिए बांट-लग गया जमावड़ा
खाने पीने का सामान होना सोचते हुए वकील साहब के हाथ से वह थैला छीन लिया और उसे लेकर समीप के पेड़ पर चढ़ गया;
रामपुर। बंदर ने अपने हाथ में पांच-पांच सौ रुपए की गड्डियां लेकर उसमें से नोट निकालकर पेड़ से नीचे बरसाने शुरू कर दिए। पेड़ से पत्तों के स्थान पर नोटों की बरसात हुए देखकर मौके पर लोगों का जमावड़ा लग गया। बाद में किसी तरह से बंदर के हाथ से नोटों से भरा बैग छुड़ाया गया। लेकिन इस दौरान बैग मालिक को बैठे बिठाये 8500 रूपये की चपत लग चुकी थी।
दरअसल जनपद की शाहाबाद तहसील परिसर में वकालत करने वाले अधिवक्ता विनोद बाबू किसी को भुगतान करने के लिए तकरीबन 100000 रूपये की राशि बैंक से निकालकर लाए थे। वकील साहब के साथ उनका बेटा आशीष वशिष्ठ भी था। इसी बीच वकील साहब को शाहाबाद तहसील में कोई काम याद आ गया, जिसके चलते वह अपने बेटे के साथ तहसील में बने अपने चेंबर पर पहुंच गए। इसी बीच किसी ने बंदरों के लिए खाना डाल दिया। जिससे बहुत सारे बंदर गिराए गए खाने पर टूट पड़े। इसी दौरान एक बंदर ने वकील साहब के हाथ में थैला लटका हुआ देखा।
बंदर ने उसके भीतर खाने पीने का सामान होना सोचते हुए वकील साहब के हाथ से वह थैला छीन लिया और उसे लेकर समीप के पेड़ पर चढ़ गया। पेड़ पर चढ़े बंदर ने जब थैले का मुंह खोला तो उसमें नोटों की गड्डियां रखी हुई थी। बंदर ने थैले के भीतर रखी गड्डी निकाली और नीचे फेंक दी। इसके बाद बंदर थैले से दूसरी गड्डी निकालकर उसमें से नोटों को निकालकर नीचे गिराने लगा। इस दौरान बंदर ने कुछ नोट फाडकर भी दिए। बंदर के हाथ से थैला छुड़ाने के लिए लोगों ने कई तरह के यत्न किए।
जिसके चलते बंदर नोटों से भरा थैला नीचे गिरा दिया। साथी अधिवक्ताओं ने भाग दौड़ करते हुए वकील के पेड़ से बंदर द्वारा नीचे गिराये रुपए इकट्ठे किए और पीड़ित वकील साहब को सौपे। नोटों की जब गिनती की गई तो उनमें पांच-पांच सौ रूपये के 17 नोट कम मिले। यानी बंदूर की करतूत के चलते वकील साहब को देखते ही देखते 8500 रूपये की चपत झेलने को मजबूर होना पड़ा।