राज्यसभा में उठी जातिगत जनगणना की मांग

बगैर आंकड़ों के अभाव में पिछड़ा वर्ग को आरक्षण का पूरा लाभ नहीं मिल सकता है;

Update: 2021-08-11 10:10 GMT

नयी दिल्ली । राज्यसभा में दलगत भावना से ऊपर उठकर सभी राजनीतिक दलों ने जातिगत जनगणना कराये जाने की मांग करते हुये आज कहा कि इसके बगैर आंकड़ों के अभाव में पिछड़ा वर्ग को आरक्षण का पूरा लाभ नहीं मिल सकता है।

अन्य पिछड़े वर्ग (ओबीसी) जातियों की सूची बनाने का अधिकार राज्यों को देने से संबंधित संविधान के 105वें संशोधन विधेयक पर राज्यसभा में चर्चा के दौरान विभिन्न दलों के सदस्यों ने कहा कि जातिगत जनगणना से यह पता चल सकेगा कि लोगों की वास्तविक स्थिति क्या है और किसी जाति की कितनी आबादी है तथा वे किस पेशे से जुड़े है। उनकी शिक्षा और आर्थिक स्थिति क्या है।

इससे पहले सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार ने लोकसभा से पारित इस विधेयक को सदन में पेश किया और कहा कि इसका पूर्व संविधान (127 वें संशोधन) विधेयक के नाम को बदल कर संविधान (105वां संशोधन) विधेयक किया गया है। उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से राज्यों को ओबीसी की सूची बनाने का अधिकार दिया जा रहा है। इससे मेडिकल दाखिला में ओबीसी के लिए चार हजार सीटें बढ़ जायेगी।

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