ब्लैक फंगस के मामले भयावह- देश में मिले इतने हजार से अधिक मामले

देश में इस बीमारी का अनुमानित प्रसार वैश्विक औसत की तुलना में लगभग 70 गुना अधिक है;

Update: 2021-05-24 12:43 GMT

पुणे। भारत में अब तक ब्लैक फंगस के 8,000 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं और देश में इस बीमारी का अनुमानित प्रसार वैश्विक औसत की तुलना में लगभग 70 गुना अधिक है, जबकि म्यूकोर्मिकोसिस (ब्लैक फंगस) से जुड़ी मृत्यु दर भी 50 प्रतिशत तक है।

फेडरेशन ऑफ हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेटर के कार्यकारी सदस्य डॉ नरेश पुरोहित ने 'कोरोना की ओर से उत्पन्न खतरों के बीच ब्लैक फंगस' पर एक वेबिनार को संबोधित करने के बाद यहां यूनीवार्ता को बताया कि दूषित अस्पताल की व्यवस्था भी इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज्ड कोरोना रोगियों और देश में संक्रमण से उबरने वालों के बीच ब्लैक फंगस के मामलों में वृद्धि के प्रमुख कारणों में से एक हो सकती है। वेबिनार महाराष्ट्र स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, नासिक द्वारा सोमवार को आयोजित किया गया।

महामारी विज्ञानी डॉ पुरोहित ने चेतावनी दी कि राइजोपस एरिज़स इस देश में ब्लैक फंगस का सबसे आम रोगकारक एजेंट है। राइज़ोपस माइक्रोस्पोरस, राइज़ोपस होमोथैलिकस और एपोफिसोमाइसेस वेरिएबिलिस जैसी कवक प्रजातियों के कारण यह संक्रमण बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि मैंने स्वास्थ्य अधिकारियों से मामलों के प्रबंधन के लिए सुविधाओं को बढ़ाने का आह्वान किया है। भारत में कई राज्यों ने पहले ही इस बीमारी को अधिसूचित कर दिया है।

इंटरनेशनल नोसोकोमियल इंफेक्शन कंट्रोल कंसोर्टियम (आईएनआईसीसी) के सदस्य-डॉ पुरोहित ने बताया कि चूंकि ब्लैक फंगस से जुड़ी मृत्यु दर 50 प्रतिशत तक है, इसलिए महाराष्ट्र के कई जिलों से मौतों की खबरें आने लगी हैं और इन जिलों में ब्लैक फंगस के उपचार में काम आने वाले टीके एम्फोटेरिसिन बी की भारी कमी देखी जा रही हैं।

वार्ता

Tags:    

Similar News