12वीं की परीक्षा टालने के लिए सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

कोरोना वायरस की दूसरी लहर के बीच देश में एक वक्त ऐसा भी आया कि पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा उठी थी;

Update: 2021-05-28 06:00 GMT

नई दिल्ली। कोरोना वायरस की दूसरी लहर के बीच देश में एक वक्त ऐसा भी आया कि पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा उठी थी। ऑक्सीजन से लेकर दवाइयां, अस्पतालों में बेड की भी समस्या होने लगी थी। लोग ऑक्सीजन के अभाव में भी अपनी जान तक गवा बैठे।

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में राज्यों को संबोधित करते हुए कहा था कि राज्य सरकार लॉकडाउन को आखरी हथियार के रूप में रखें। लगभग सभी राज्यो की सरकार ने अपने यहाँ आंशिक लॉकडाउन की घोषणा की थी। प्रधानमंत्री के निर्देश के समय राज्यों ने अपने अपने राज्य में होने वाली बोर्ड परीक्षाओं को स्थगित कर दिया था। कुछ दिन पूर्व ही कुछ राज्यों ने 10वीं की बोर्ड परीक्षाएं भी खत्म करने का फैसला ले लिया है। मगर अब 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं होनी शेष है। इसको लेकर आज देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट में 12वीं की परीक्षा को रद्द कराने की याचिका पर सुनवाई हुई। फिलहाल सुनवाई को टाल दिया गया। अब अगली सुनवाई सोमवार को होनी है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि 1 जून को सरकार 12वीं की परीक्षा पर निर्णय लेने वाली है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को कहा कि संभव है कि सरकार का फैसला आपके पक्ष में भी आ सकता है।

अब 12वीं की परीक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार तक सुनवाई टाल दी है। सरकार 1 जून को 12वीं की परीक्षा पर निर्णय लेने वाली है। फैसला जो भी हो अब सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई सोमवार को होने जा रही है। आपको बता दें कि कुछ राज्यों ने पहले से ही 10वीं की बोर्ड परीक्षाओं को रद्द करते हुए बच्चों को अगली कक्षा में उत्तीर्ण कर दिया है।

बच्चों की बोर्ड परीक्षाएं निरस्त होने से अलग-अलग लोगों का अलग-अलग मत है। कुछ लोगों का मानना है कि इस तरीके से बच्चों का सर्वांगीण विकास नहीं हो पाएगा। अधिक मेहनत करने वाले बच्चों को बोर्ड परीक्षाएं रद्द होने से नुकसान होगा, तो वही कम मेहनत करने वाले बच्चों को इसमें लाभ मिलने की भी संभावना है।

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