नेतागिरी से नहीं अंगूठा लगाने से होगा काम- नहीं लगी हाजिरी तो कटेगा वेतन

नेतागिरी से नहीं अंगूठा लगाने से होगा काम- नहीं लगी हाजिरी तो कटेगा वेतन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने नए शैक्षिक सत्र से पहले ही राज्य के शिक्षकों एवं विश्वविद्यालय कार्मिकों को एक बड़ी टेंशन दे दी है। सरकार का मानना है कि शिक्षक और विश्वविद्यालय कार्मिक विभागीय काम की बजाय नेतागिरी अथवा अपने निजी काम पर ज्यादा ध्यान देते है। इसलिये अब नेतागिरी या इधर-उधर के काम निपटाने के बजाय नौकरी पर जाने से ही काम चलेगा। लिहाजा बायोमेट्रिक हाजिरी नहीं लगाने वाले शिक्षकों का वेतन काटकर प्रतिमाह दिया जाएगा।

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की ओर से मंगलवार को जारी किए गए शासनादेश में कहा गया है कि राजभवन में संपन्न समीक्षा बैठकों तथा समय-समय पर विभिन्न विश्वविद्यालयों के अनुवर्ती समीक्षा बैठकों तथा राजभवन में आगंतुकों से विभिन्न मुलाकातों के दौरान यह तथ्य संज्ञान में आया है कि प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक एवं गैर शैक्षिक कार्मिक नियमावली के अंर्तगत नियमित तौर पर उपस्थित नहीं होते हैं और वह अपने कार्यालय के दायित्व का निर्वहन नहीं करते हैं। राज्य विश्वविद्यालय के कुछ शैक्षणिक एवं गैर शैक्षणिक कार्मिक तो प्रातः आ जाते हैं, किंतु मध्याहन तक घर प्रस्थान कर जाते हैं। सामान्यतः राज्य विश्वविद्यालयों में तो ओवरटाइम देने की भी बात संज्ञान में आई है जो कि अनुमन्य नहीं है।


राज्यपाल की ओर से अब यह आदेश जारी किए गए हैं कि राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में सभी प्रकार के शैक्षणिक एवं गैर शैक्षणिक कार्मिकों की उपस्थिति बायोमेट्रिक प्रणाली से अनिवार्य रूप से दर्ज कराई जाएगी। इसके लिए विश्वविद्यालय परिसर में पर्याप्त संख्या में पर्याप्त सार्वजनिक स्थलों पर उपस्थिति अंकित करने के लिए बायोमेट्रिक उपकरण जिसमें चेहरा और अंगूठा दोनों ही पहचानने की क्षमता हो, वह स्थापित कराए जाएंगे।

यह व्यवस्था ऐसी बनाई जाएगी कि सबकी उपस्थिति एक केंद्रीय कृत स्थल यानी सेंट्रल सर्वर पर उपलब्ध हो सके।


उल्लेखनीय है कि विश्वविद्यालयों में आमतौर पर कर्मचारी एवं प्रवक्ता अनुपस्थित रहते हैं। यदि कभी निरीक्षण हो जाता है तो उनके साथी इधर उधर की बात बता कर मामले को रफा-दफा कर देते है।ं जिससे विश्वविद्यालय के कामकाज पर गहरा असर पड़ता है और अपने काम के सिलसिले में इलाके के दूरदराज क्षेत्र से पहुंचे छात्र छात्राओं के साथ अभिभावकों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। यानी एक तरह के बिना काम किए पैसे लेने की आदत विश्वविद्यालय कार्मिकों को पड चुकी है।

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