20 साल बाद दोबारा चली यह ट्रेन- 12 दिन में नहीं हुई टिकट की बोहनी

20 साल बाद दोबारा चली यह ट्रेन- 12 दिन में नहीं हुई टिकट की बोहनी

कानपुर। 20 साल के बाद गाजे-बाजे के साथ दोबारा पटरी पर चलने वाली रेल का इसी वर्ष मिनिस्टर द्वारा उद्घाटन किया गया था। इस रेल का न्यूनतम प्रतिमाह खर्च 10 लाख रूपये और कमाई है सिर्फ 1 हजार रूपये। कम कमाई की वजह है रेल के दौड़ने की गलत टाइमिंग। इसी वजह से लोग इस रेल में यात्रा नहीं कर पा रहे हैं, जबकि संसद में उठे सवाल के बाद ही इस रेल को दोबारा चलाई गई थी।

मिली जानकारी के अनुसार इसी वर्ष 6 जनवरी को दोबारा फिर से शुरू हुई मेमू रेल 20 साल बाद दोबारा पटरी पर दौड़ी है। इस रेल में बैठकर पहले दिन ही विधायक अभिजीत सिंह सांगा ने पांच साथियों के साथ बैठकर सफर किया था। इस ट्रेन को दोबारा चलाने के लिये संसद में मांग उठी थी। सांसद देवेन्द्र भोले और सत्यदेव पचौरी द्वारा की गई मांग के बाद रेल मंत्री ने रेल को दोबारा चलने का फैसला ले लिया था। इस रेल का मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव ने खुद उद्घाटन किया था। रेल चलने पर शुरूआती दिनों में कानपुर से बिठूर औसतन दो या तीन यात्री प्रतिदिन सफर करते थे। लेकिन इस माह के 22 जुलाई के बीच 12 दिन में टिकट की बोहनी तक नहीं हुई है। कानुपर से कल्याणपुर के लिये केवल चवार टिकट जारी हुए।

बताया जा रहा है कि इस रेल में यात्री इसलिये सफर नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि इसकी टाइमिंग सही नहीं है। अगर रेल के वक्त में परिवर्तन कर दिया जाये तो अच्छी खासी संख्या में यात्री मिल सकते हैं। इस रेल का प्रतिमाह न्यूनतम 10 लाख रूपये खर्चा बताया जा रहा है। इस महीने कुद 1000 रूपये के टिकट बिके हैं। अगर ऐसे ही चलता रहा तो रेल विभाग घाटे में ही जाता रहेगा। इस रेल की यात्री क्षमता 1500 हैं।

इस रेल का शेड्यूल है कि कानपुर सेंट्रल से बिठूर को चलती है सुबह 9ः10 बजे और दोपहर 14ः30 बजे, बिठूर से कानपुर के लिए चलती है सुबह 10ः45 और शाम 17ः05 बजे, कानपुर से बिठूर जाने में 65 मिनट तो बिठूर से आने में 75 मिनट लगते हैं।

यात्रियों की मांग है कि यह रेल कानपुर से सुबह 7 और शाम 5 बजे चले, वापसी में यह ट्रेन बिठूर से सुबह 8 और शाम को 6 बजे चलाई जाए।

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