जीत के साथ दीपोत्सव का उत्साह दोगुना

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज से तीन साल पहले जब सरकार बनायी थी, तभी से अयोध्या में दीपोत्सव की पुरानी गरिमा को वापस लाने का प्रयास किया जा रहा है। इस बार भी भव्य आयोजन की तैयारी थी। इसी बीच प्रदेश में 7 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव कराए गये। इनमें 6 पर भाजपा ने जीत दर्ज करके अयोध्या दीपोत्सव के उत्साह को दोगुना कर दिया है। उपचुनाव से पहले विपक्षी दलों में कांग्रेस को मुगालता था कि वह भाजपा को करारी टक्कर देगी। कुछ हद तक वह सफल भी रही है लेकिन उसे विजय कहीं भी नहीं मिल पायी। बसपा प्रमुख मायावती को भी अपना भ्रम दूर कर लेना चाहिए। सपा ने जरूर अपनी एक सीट वापस ले ली लेकिन उसका जनाधार कम हुआ है। मजे की बात यह कि बसपा से तो सपा की अनबन हुई लेकिन कांग्रेस भी उसे कठघरे में खड़ा कर रही है। दूसरे शब्दों में कहें तो विपक्ष आपस में लड़ रहा है।
उत्तर प्रदेश की 7 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में सत्तारूढ़ बीजेपी की बंपर जीत के बाद राजनीतिक पंडित नतीजों की समीक्षा अपनी-अपनी तरह से कर रहे हैं। उपचुनाव के नतीजों ने जहां बीजेपी को संजीवनी दी है, वहीं विपक्ष के लिए सबक है कि चुनाव जीतने के लिए जमीनी सियासत जरूरी है। इतना ही नहीं बीजेपी ने यह भी संदेश दिया कि योगी सरकार के साढ़े तीन साल के कार्यकाल के बावजूद कोई भी सत्ता विरोधी लहर नहीं है। सात में से 6 सीटों पर अपना कब्जा बरकरार रखकर योगी सरकार ने उन सवालों का भी जवाब दिया जिसे लेकर विपक्ष मुखर था। दरअसल, उपचुनाव से पहले समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और बसपा बिकरू, प्रयागराज और हाथरस की घटनाओं को लेकर योगी सरकार पर हमलावर थे। विकास दुबे के एनकाउंटर पर भी सियासत हुई और सरकार को ब्राह्मण विरोधी बता दिया गया। विपक्ष का दावा था कि इस सरकार में ब्राह्मणों पर अत्याचार हो रहा है। हाथरस की घटना पर दलितों के साथ सवर्णों के अत्याचार से जोड़कर विपक्ष ने कहा कि सरकार से जनता का भरोसा उठ गया है। बलिया में कोटे की दुकान को लेकर हुई हिंसा के बाद भी विपक्ष का दावा था कि पिछड़ा वर्ग अब उससे नाराज है। माना जा रहा था कि पूर्वांचल में ब्राह्मण और ठाकुरों के बीच वर्चस्व की लड़ाई, पश्चिम यूपी में जाट और दलित वोटर बीजेपी से छिटक गया है। लेकिन, जब उपचुनाव के नतीजे सामने आए तो ऐसा कुछ भी नजर नहीं आया। ब्राह्मणों के बीजेपी के साथ ही बने रहने का एक सबूत यह भी है कि देवरिया सीट पर सभी दलों ने ब्राह्मण प्रत्याशी ही मैदान में उतारा था। बावजूद इसके बीजेपी के नए चेहरे डॉ सत्यप्रकाश मणि त्रिपाठी ने समाजवादी पार्टी के ब्रह्माशंकर त्रिपाठी को भारी मतों से हरा दिया।
इस प्रकार के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीजेपी सपा, बसपा और कांग्रेस जैसे विपक्षियों को चारों खाने चित कर दिया है। हालांकि इस दौरान सपा 1 सीट जीतने में कामयाब रही। वहीं बसपा और चुनाव से पहले 2 सीटों को जोर-शोर से जीतने का दावा करने वाली कांग्रेस एक भी सीट नही जीत सकी है। कांग्रेस का प्रदर्शन जरूरत बेहतर रहा। कांग्रेस ने अपनी हार को स्वीकारते हुए जनता के जनादेश का सम्मान किये जाने की बात कही है। कांग्रेस ने प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी सपा से बेहतर प्रदर्शन किये जाने का दावा किया है। साथ ही इस चुनाव में मिली हार से सबक लेते हुए 2022 में बेहतर प्रदर्शन किए जाने की बात कह रही है।
यूपी में 403 सदस्यों वाली विधानसभा की 7 रिक्त सीटों पर हुए उपचुनाव में अमरोहा की नौगावां सादात, उन्नाव की बांगरमऊ, कानपुर की घाटमपुर, जौनपुर की मल्हनी, फिरोजाबाद की टूंडला, बुलंदशहर और देवरिया समेत 6 सीटों पर बीजेपी ने जीत दर्ज की है। जौनपुर के कद्दावर सपा नेता पारस नाथ यादव के निधन से खाली हुई मल्हनी सीट पर उनके बेटे लकी यादव की जीत से सपा सीट बचाने में कामयाब रही लेकिन बसपा और 7 में से 6 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस काफी कोशिशों के बावजूद एक भी सीट नहीं जीत सकी। वैसे यूपी की सियासत में एक लंबे समय तक हाशिए पर चल रही कांग्रेस का इस चुनाव में मत-प्रतिशत बढ़ा है। यही नहीं कांग्रेस बांगरमऊ और घाटमपुर में दूसरे नंबर पर रही। पार्टी इससे उत्साहित है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू कहते हैं जनता के जनाधार का हम सम्मान करते हैं लेकिन हमने बहुत अच्छी लड़ाई लड़ी है। हमारा मत-प्रतिशत पहले के अपेक्षाकृत काफी बढ़ा है। हम 2 सीटों पर दूसरे स्थान पर और 1 सीट पर तीसरे स्थान पर रहे हैं। हमारा प्रदर्शन प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी कही जाने वाली समाजवादी पार्टी से बेहतर रहा है, जिसके 45 विधायक हैं।
विपक्ष में आज सिर्फ कांग्रेस है, जो जनता की लड़ाई लड़ रही उन्होंने कहा कि ये साबित करता है कि आज विपक्ष में सिर्फ कांग्रेस है। कांग्रेस ने नौजवानों, दलित-पिछड़ों, कानून व्यवस्था, महिला सुरक्षा के सवालों पर सदन से लेकर सड़क तक जनता की लड़ाई लड़ी है। इसलिये जनता ने विश्वास जताया है। उन्होंने कहा, ये उपचुनाव था, सरकार ने पूरी मशीनरी और ताकत लगाई थी, बल प्रयोग किया था। हमें हार मिली है लेकिन हम इस हार को हार नहीं मानते, आने वाले दिनों में इससे सबक लेकर एक सशक्त विपक्ष के रूप में और मजबूती से जनता की लड़ाई लड़ेंगे। इस प्रकार विजयी उपचुनाव और विपक्ष के बिखराव से अयोध्या में चौथे भव्य दीपोत्सव की भव्यता और बढ़ गयी है। कार्यक्रम स्थल से लेकर सरयू तट के उस पार तक और संभावित आतंकी खतरे के मद्देनजर भी सुरक्षा प्लान तैयार कर लिया गया है। अयोध्या के वरिष्ठ पुलिस अफसरों की मानें तो अयोध्या शहर के बाहर के लोग दीपोत्सव स्थल के आसपास तो क्या अयोध्या में भी प्रवेश नहीं कर सकेंगे। इसके लिए रूट डायवर्जन किया जा रहा है। यहां तक कि कार्यक्रम स्थल पर आमंत्रित किए गए लोगों की भी एलआईयू जांच कराई जा रही है। बिना अनुमति पत्र के कोई कार्यक्रम स्थल तक भी नहीं पहुंच पाएगा, चाहे वह अयोध्या शहर का ही क्यों न हो।
यही नहीं अयोध्या को लेकर जो संभावित आतंकी खतरा बना रहता है, उसको लेकर भी सुरक्षा रणनीति बना ली गई है और इसके तहत बम डिस्पोजल दस्ता और क्विक रिएक्शन टीम समेत सुरक्षाबलों को बाहर से बुलाया जा रहा है। कार्यक्रम स्थल समेत हर महत्वपूर्ण स्थानों की त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की गई है। कोरोना से बचाव के दिशा निर्देशों का पालन करते हुए भी लंका विजयी श्रीराम का अयोध्या में धूमधाम से स्वागत होगा। सरयू का तट दीपों से जगमगा उठेगा।
पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार ने बताया कि अयोध्या में भव्य और दिव्य तरीके से दीपोत्सव कार्यक्रम मनाया जाता है। दीपोत्सव 13 तारीख को है। सुरक्षा की पूरी तैयारी प्रशासन के द्वारा कर ली गई है। वरिष्ठ अधिकारियों ने भी गत दिनों निरीक्षण किया था और आवश्यक निर्देश हम लोगों को दिया था। सभी सुरक्षा एजेंसियों में पर्याप्त समन्वय हैं। त्रिस्तरीय ड्यूटी हम लोगों के द्वारा लगा दी गई है। सरयू में भी हमारी 24 घंटे की ड्यूटी रहेगी। जिससे नदी के उस पार से अवांछित तत्व अयोध्या में प्रवेश न कर सके।
जो हाईवे है वहां से भी हम लोग डायवर्जन करेंगे। अयोध्या के लोग ही यहां पर आ सकेंगे। बाहरी लोगों को हाईवे से भेजा जाएगा। कोविड-19 प्रोटोकॉल के कारण अन्य लोगों को इजाजत नहीं दी जाएगी। हम सुरक्षित माहौल देने के लिए पूरी तरह से दृढ़ प्रतिज्ञ हैं। (हिफी)