गैंगस्टर के दो मामलों में सुशील मूंछ को लगा झटका-जमानत निरस्त

मुजफ्फरनगर। माफिया सरगना सुशील मूंछ के खिलाफ गैंगस्टर कोर्ट के न्यायाधीश ने 2 मामलों में अलग-अलग दाखिल किए गए जमानत के प्रार्थना पत्रों को निरस्त कर दिया है।
बृहस्पतिवार को गैंगस्टर कोर्ट के विशेष न्यायाधीश राधेश्याम यादव की अदालत में माफिया सरगना सुशील मूंछ के खिलाफ गैंगस्टर के दो अलग-अलग मामलों की सुनवाई की गई। पहला मामला थाना सिविल लाइन पुलिस का है जिसमें सुशील मूंछ के अलावा कुंवर पाल एवं चंदन उर्फ सोनू के खिलाफ वर्ष 2001 के दौरान दो अलग-अलग हत्या के मामलों में तत्कालीन थानाध्यक्ष भगवान शर्मा द्वारा गैंगस्टर का मुकदमा दर्ज किया गया था। भोपा थाना क्षेत्र के दूसरे मामले में वर्ष 2003 में माफिया सरगना सुशील मूंछ समेत आठ अभियुक्तों राजीव, सुनील, अनिल, ब्रह्मपाल, उदयवीर, राजेंद्र एवं किशन द्वारा गिरोह बनाकर नकली शराब बनाने का साजोंसामान एवं अवैध शराब के होलोग्राम ढक्कन आदि भारी मात्रा में बरामद हाने पर पुलिस द्वारा आबकारी अधिनियम के अलावा कूट संरचना की कई धाराओं में अभियोग पंजीकृत किया गया था। हत्या एवं हत्या के प्रयास जैसे सात अभियोगों को दर्शाते हुए तत्कालीन भोपा थाना अध्यक्ष सुरेंद्र तेवतिया ने गैंगस्टर चार्ट तैयार कर आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर का मुकदमा दर्ज कराया था। उक्त दोनों मामले गैंगस्टर कोर्ट में विचाराधीन है। परंतु न्यायालय से स्थगन के कारण अभियोग लंबित था, अब स्थगन समाप्त होने के बाद भी सुशील मूंछ अदालत में उपस्थित नहीं हुआ, जिस पर न्यायालय द्वारा कड़ी आदेश इकाई जारी की गई। कुर्की वारंट जारी होने के बाद वर्ष 2021 की 8 नवंबर को सुशील मूंछ ने गैंगस्टर कोर्ट में आत्मसमर्पण किया था। इन दोनों मामलों को लेकर अभियोजन की ओर से अभियोजन अधिकारी संदीप सिंह ने जबरदस्त पैरवी करते हुए माफिया सरगना सुशील मूंछ का लंबा आपराधिक इतिहास अदालत के सामने पेश किया और जमानत स्वीकृति का विरोध किया। दोनों पक्षों की बहस सुनने के उपरांत गैंगस्टर न्यायधीश राधेश्याम यादव द्वारा दोनों मामलों में अलग-अलग जमानत प्रार्थना पत्रों पर अपना फैसला देते हुए जमानत निरस्त कर दी।