टोल-फ्री कॉल सेन्टर के माध्यम से गन्ना किसानों की समस्याओं का समाधान

टोल-फ्री कॉल सेन्टर के माध्यम से गन्ना किसानों की समस्याओं का समाधान

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में गन्ना विकास विभाग टोल-फ्री कॉल सेन्टर के माध्यम से किसानों की शिकायतों का गुणवत्तापरक निराकरण करा रहा है।

मुख्यल पर स्थित टोल-फ्री कॉल सेन्टर की कार्य प्रणाली के सम्बन्ध में जानकारी देते हुए गन्ना एवं चीनी विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय आर0 भूसरेड्डी ने आज यहां बताया कि टोल-फ्री कन्ट्रोल रूम के कार्मिकों की कार्यप्रणाली को और सुदृढ़ किये जाने के दृष्टिगत, कार्मिकों द्वारा अब प्रातः 7ः45 से रात्रि 10ः45 तक गन्ना किसानों की समस्याओं का समाधान किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा अब तक पंजीकृत 1,16379 शिकातों में से 1,14,127 शिकायतें निस्तारित की जा चुकी है।

उन्होंने बताया कि टोल-फ्री कॉल सेन्टर की यह व्यवस्था सर्वे सीजन के दौरान माह जून से सितम्बर तक लागू की गयी है, इस अवधि में टोल-फ्री नम्बर पर 16 घण्टे किसान कॉल कर सकते हैं वहीं पेराई सीजन के दौरान माह अक्टूबर से मई तक कन्ट्रोल रूम द्वारा 24 घंटे सातों दिन गन्ना किसानों की समस्याओं का निराकरण किया जाएगा। कन्ट्रोल रूम मे टोल फ्री नम्बर पर कॉल करने वाले गन्ना किसानों को कोई असुविधा न हो, इस के लिए कन्ट्रोल रूम कार्मिकों के अवकाश की अवधि मे कार्य करने के लिए दक्ष एवं अनुभवी कार्मिकों की बैकअप टीम का भी गठन किया गया है।

संजय आर0 भूसरेड्डी ने बताया कि कृषक गन्ने की खेती से जुड़ी विभिन्न समस्याओं के लिए विभागीय टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 पर एवं सर्वे, सट्टा, कैलेंडर, पर्ची आदि से सम्बन्धित समस्यों के लिए 1800-103-5823 पर अपनी शिकायत दर्ज कराकर उसका समाधान पा रहे हैं। उन्होनें यह भी बताया कि कन्ट्रोल रूम मे तैनात कार्मिकों के कार्यो की गुणवत्ता के अनुश्रवण एवं औचक निरीक्षण के लिए विभागीय नोडल अधिकारियों द्वारा प्रतिदिन कन्ट्रोल रूम का निरीक्षण कर कार्मिकों को आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किये जायेगें।

उन्होंने बताया कि इसके अतिरिक्त गन्ने की खेती से जुड़ी नवीनतम जानकारियों तथा कीट रोग आदि के रोकथाम उपायों हेतु गन्ना किसान भारत सरकार के किसान कॉल सेंटर टोल-फ्री नंबर 1800-180-1551 पर भी कॉल कर कृषि वैज्ञानिकों से अपनी समस्या का निदान पा सकते हैं।

संजय आर0 भूसरेड्डी ने बताया कि इन तकनीकी व्यवस्थाओं से किसानों को दफ्तरों के चक्कर लगाने की भी जरूरत नहीं होगी और उनके आने जाने में लगने वाले समय एवं पैसे की बचत होगी साथ ही कोविड महामारी के प्रसार को रोकने में भी उक्त व्यवस्था सहायक सिद्ध होगी।

वार्ता

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