सोने से भरे गहनों का बैग भी नहीं डिगा पाया दारोगा का ईमान

सोने से भरे गहनों का बैग भी नहीं डिगा पाया दारोगा का ईमान
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प्रयागराज। एक-एक रुपए और इंच भर जमीन के लिए जहां आज के जमाने में कत्ल कर दिए जाते हैं, वही रेलवे स्टेशन पर तैनात दारोगा और उनके हमराह ने ईमानदारी की मिसाल पेश करते हुए लाखों रुपए की कीमत के सोने-चांदी के गहनों एवं नकदी से भरा बैग उसके मालिक को वापस लौटा दिया। बैग के हाथ में आते ही महिला की आंखों से झर-झर आंसू और मुंह से ढेरों दुआएं निकली और कहा कि आपने हमें इस दुनिया में बर्बाद होने से बचा लिया है।

दरअसल प्रयागराज स्थित रेलवे स्टेशन पर तैनात उपनिरीक्षक लल्लन यादव अपने हमराह शोएब अहमद के साथ प्लेटफार्म पर शांति और सुरक्षा व्यवस्था के चलते गस्त करते हुए घूम रहे थे। इसी दौरान उन्हें एक बैग भरा हुआ दिखाई दिया। बैग लावारिस था, जिसके चलते एहतियात बरतते हुए बैग को उठाकर खोला गया। बैग जब खुला तो उसके भीतर सोने की 5 अंगूठियां, कान की बाली, कानों के कुंडल, नाक की लोंग, हाथ के दो कड़े और चांदी के आभूषणों के अलावा कुछ रुपए भी रखे हुए थे। बैग में मौजूद नकदी और जेवरातों की कीमत तकरीबन 500000 रूपये थी। जीआरपी के दारोगा ने बैग के भीतर धरी रसीद पर लिखे मोबाइल पर जब संपर्क किया तो पता चला कि बैग आराधना दुबे का है। उधर आराधना दुबे बदहवास हालत में अपने खोए हुए बैग को खोजती हुई फिर रही थी। इसी बीच बैग का पता चलने पर वह अपने पति के साथ रेलवे स्टेशन पर पहुंची और जीआरपी थाने में दरोगा से मिली। दारोगा और उनके हमराह ने पति के साथ पहुंची महिला को ढांढस बंधाया और इमानदारी की मिसाल पेश करते हुए खोया हुआ बैग महिला को वापस लौटा दिया। जेवर और नगदी से भरा बैग हाथ में आते ही महिला और उसके पति की आंखों से खुशी के आंसू झर-झर बह निकले। पूरे परिवार ने जीआरपी के दारोगा और सिपाही को धन्यवाद देते हुए उनका आभार जताया।



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