गरौठा विधानसभा सीट पर भाजपा की होगी अग्निपरीक्षा

झांसी। उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में गरौठा विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने अब तक सर्वाधिक 10 बार विजय हासिल की है। जबकि भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी तीन-तीन बार जीत का परचम लहरा चुकी है और बसपा ने भी एक बार सफलता हासिल की है। फिलहाल इस सीट पर भगवा लहरा रहा है लेकिन सीट पर कब्जा बनाये रखने की भाजपा के सामने इस बार कड़ी चुनौती है।
अगर भाजपा की बात की जाए तो इस सीट पर भाजपा की जड़ें काफी पुरानी हैं। यह पहली बार नहीं था कि 2017 में जवाहर लाल राजपूत ने भाजपा से जीत हासिल की बल्कि स्वतंत्रता के बाद सबसे पहले 1967 में भारतीय जनसंघ ने यहां जीत का दीपक जलाया था। उसके बाद मानवेंद्र सिंह ने इस सीट पर दोबारा जीत हासिल की थी। यह अलग बात है यहां सर्वाधिक जीत 10 बार कांग्रेस को मिली है। जबकि तीन-तीन बार भाजपा एवं समाजवादी पार्टी और एक बार बसपा ने भी परचम लहराने का काम किया है।
कांग्रेस के दिग्गज नेता और तत्कालीन गृहमंत्री महाराजा रणजीत सिंह जूदेव ने भी अपनी राजनीति का सफर इसी क्षेत्र से शुरू किया था। यही नहीं सबसे कम उम्र 26 वर्ष में विधायक बनकर सर्वाधिक 10 बार विजय प्राप्त की। कहने को तो समाजवादी पार्टी की भी यहां सरकार रही। वर्ष 2007 और 2012 में समाजवादी पार्टी के बाहुबली नेता दीप नारायण सिंह ने इस विधानसभा सीट पर कब्जा रखा। यह अलग बात है कि तब विकास केवल कागजों में ही हुआ। महाराजा रणजीत सिंह जूदेव के समय में जरूर दो नदियों पर पुल बनाए गए हालांकि उतना विकास उनके समय में भी नहीं हुआ।
गरौठा विधानसभा का नाम आते ही जेहन में छ्योटा का जंगल, धसान का किनारा, उससे लगा हुआ जंगल एवं एरिकच्छ धाम एरच से निकली हुई बेतवा नदी नजरों के सामने घूमने लगती हैं। कभी विश्व की प्रथम राजधानी का दर्जा प्राप्त किए एरिकच्छ धाम तो कभी हाल ही में डिफेंस कॉरिडोर की आधारशिला रखता विकास की ओर कदम बढ़ाते हुए गरौठा क्षेत्र दिखाई देता है। विकास की गंगा यू तो 1952 में कांग्रेस से पहला चुनाव जीते विधायक पंडित राम सहाय शर्मा द्वारा स्थापित किए गए आत्माराम खैर इंटर कॉलेज और एक करोड़ की लागत से खुदवाई गई गुरसरांय नहर के साथ शुरू हुआ था। आज इस विकास के चक्र को चलाने का कार्य भाजपा कर रही है।
भाजपा ने जहां डिफेंस कॉरिडोर के माध्यम से यह सिद्ध करने का प्रयास किया कि सदियों से इस क्षेत्र को पिछड़ा कहकर चिढ़ाने वाले नेता अब सावधान हो जाएं। भाजपा सरकार इस क्षेत्र की धूल फांकती सड़कों को पूरी तरह से तैयार कर लोगों के इस्तेमाल के लिए तैयार कर विकास का दावा कर रही है। चिरगांव से गुरसराय होते हुए गरौठा के लिए निकली सड़क पर फर्राटे भरते हुए गाड़ियां भाजपा के विकास की गाथा स्वयं गाती नजर आती है। लोगों का कहना है कि सपा शासनकाल में एक समय था जब गुरसराय से गरौठा के बीच महज 14 किलोमीटर की दूरी तय करने में लोग धूल से गुब्बार से ढक जाते थे आज आज महज 14 मिनट में आप गरौठा पहुंच सकते हैं।
गरौठा विधानसभा सीट पर जातीय समीकरण कुछ इस प्रकार के हैं कि यहां लोधी राजपूत, पटेल, यादव, ब्राह्मण,ठाकुर, पाल, कुशवाहा समाज का मिला जुला वर्चस्व है और इसी कारण इस सीट पर धार्मिक समीकरण का कोई खास असर नहीं है अलबत्ता यहां किसान मतदाताओं की संख्या अधिक है। पिछली बार सपा के वरिष्ठ और बाहुबली नेता दीपनारायण सिंह के सामने भाजपा के किसान उम्मीदवार जवाहर सिंह राजपूत ने ताल ठोंकी थी और मुकाबले काे काफी रोमांचक बना दिया था। इस बार भी यह दोनों नेता फिर से आमने सामने हैं दूसरी ओर बसपा वीरसिंह गुर्जर को इस सीट पर मैदान में उतारा है। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार गरौठा सीट पर इस बार भी मुख्य मुकाबला दीप नारायण और जवाहर के बीच ही होगा अब यह देखना दिलच्स्प होगा कि क्षेत्र में किये विकास के बल पर जवाहर दोबारा जीत का स्वाद चखते हैं कि सरकार की कमियों को प्रभावी तरीके से जनता के सामने रख सपा के दीपनारायण विजयश्री हासिल करते हैं।
स्थानीय बुजुर्गों की माने तो पंडित राम सहाय शर्मा क्षेत्र के विकास के लिए अपनी जमीन और पत्नी के जेवर तक बेचकर उस पैसे को क्षेत्र के विकास में लगा दिया था। आज इस क्षेत्र को एक बार फिर वैसे ही किसी नेता की दरकार है।