पतियों की दर्दभरी पुकार-सूरत में पत्नी पीड़ित पतियों का अनोखा प्रदर्शन

नई दिल्ली। क्या मर्द केवल ATM हैं? क्या पतियों की आवाज़ें अनसुनी की जा रही हैं? गुजरात के सूरत में ऐसा कुछ हुआ है जिसने पूरे देश का ध्यान खींच लिया है। पहली बार, पतियों ने खुलकर अपनी बात रखी है और वो भी अनोखे अंदाज़ में। आज हम आपको दिखाएंगे एक ऐसा विरोध प्रदर्शन जिसने सवाल खड़े कर दिए हैं, क्या हमारे समाज में पुरुषों को भी इंसाफ़ की ज़रूरत है?
देखिए सूरत के आठवां लाइन सर्कल पर 'पत्नी पीड़ित' पतियों का अनोखा प्रदर्शन हुआ। ये पति अपने हाथों में बैनर और पोस्टर लिए नज़र आए, जिन पर लिखा था, मर्द ATM नहीं हैं, पुरुषों के अधिकार, मानव अधिकार हैं और झूठे केस मानवता के खिलाफ अपराध हैं, साथ ही Safe man Safe Nation, We want justice, जैसे नारों से लिखे प्लेकार्ड हाथ में पकडे हुए सभी पुरुष प्रदर्शन करते नजर आए, किसी ने तो 2014 से लेकर 2022 तक पुरुषों के सुसाइड केस के आंकड़े भी लिख रखे थे। ये नारे अपने आप में बहुत कुछ कहते हैं। इन पतियों का कहना है कि समाज और कानून ने उन्हें हमेशा जिम्मेदारियों के तले दबा दिया है, लेकिन जब वो खुद परेशानी में होते हैं, तो उनकी आवाज़ सुनने वाला कोई नहीं होता। उनका मानना है कि महिलाओं को मिले कानूनी अधिकारों का कुछ लोग दुरुपयोग कर रहे हैं, और इसके चलते पुरुष झूठे मामलों में फंस रहे हैं।
देखिए इस विरोध प्रदर्शन की चिंगारी तब भड़की, जब बेंगलुरु के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर, अतुल सुभाष, ने आत्महत्या कर ली। उनके सुसाइड नोट में उन्होंने अपनी पत्नी द्वारा किए गए मानसिक उत्पीड़न का जिक्र किया। ये घटना न केवल दिल दहला देने वाली है, बल्कि समाज के उन अनदेखे पहलुओं पर भी रोशनी डालती है, जिन्हें अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। प्रदर्शनकारी पतियों ने सरकार से एक बड़ी मांग रखी है, कि पुरुष आयोग' की स्थापना की जाए। प्रदर्शन करने वालों का कहना है कि झूठे मुकदमों से प्रताड़ित पुरुषों को न्याय दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। उनका कहना है कि जब महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए आयोग है, तो पुरुषों के लिए क्यों नहीं? क्या पुरुषों को न्याय का हक नहीं है?
अब देखना होगा कि क्या हमारा समाज पुरुषों की समस्याओं को भी उतनी ही गंभीरता से लेगा? क्या पुरुष आयोग का गठन होगा? या फिर ये आवाज़ें फिर से दबा दी जाएंगी? इन सवालों का जवाब वक्त देगा, लेकिन ये प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि बदलाव की शुरुआत हो चुकी है।