प्रतिरोधक क्षमता में इजाफा करेगा एनबीआरआई का क्रोमा-3

प्रतिरोधक क्षमता में इजाफा करेगा एनबीआरआई का क्रोमा-3

लखनऊ | राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (एनबीआरआई) ने हल्दी में पाए जाने वाले महत्वपूर्ण यौगिक कर्कुमिन को खाने योग्य कैप्सूल (क्रोमा-3) बनाने की तकनीक विकसित की है जिसके सेवन से जटिल रोगों से बचाव के साथ साथ प्रतिरोधक क्षमता में भी इजाफा किया जा सकेगा।

एनबीआरआई की 81वीं सालगिरह के अवसर पर मंगलवार को यह तकनीक कालीकट की टेक्नो केमिकल इंडस्ट्रीज लिमिटेड को हस्तांतरित की गयी। इस तकनीकी को विकसित करने वाले संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. बी एन सिंह ने आज यहां बताया कि हल्दी अपने औषधीय गुणों के कारण प्राचीन औषधीय तंत्र आयुर्वेद में एक विशेष महत्व रखती है , हालांकि इसमें पाए जाने वाले औषधीय यौगिक कर्कुमिन की खराब जैवउपलब्धता और पानी में घुलनशीलता की कमी के कारण इसके औषधीय गुणों का पूरा फायदा हम नहीं ले पाते हैं।

उन्होने कहा कि एनबीआरआई ने हल्दी में पाए जाने वाले कर्कुमिन यौगिक को कैप्सूल फॉर्म में बेहतर जैव उपलब्धता और औषधीय गुणों के साथ एक मानकीकृत हर्बल फॉर्मूलेशन (क्रोमा-3) के रूप में तैयार किया गया है। क्रोमा -3 के हर्बल फार्मूलेशन में 10 फीसदी से अधिक करक्यूमिन होता है, जो बेहतर औषधीय गुणों के साथ साथ शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र को भी मजबूत करता हैं | इससे पहले एनबीआरआई के 81वां स्थापना दिवस के मौके पर संस्थान के निदेशक प्रो. एस के बारिक ने 25 वर्ष की सेवा पूरी करने वाले नौ कर्मचारियो एवं पिछले दो वर्षों में सेवानिवृत होने वाले 31 कर्मचारियो को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया|

इस अवसर पर आनलाइन जुड़े कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग में सचिव और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने कहा कि आज का दिन हमें यह याद करने का अवसर प्रदान करता है कि हमने क्या किया है एवं और क्या किया जाना शेष है। जो भारत कभी अपनी आवश्यकताओं के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहता था आज वही देश स्वयं आत्मनिर्भर बनकर आज दूसरे देशों की की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है यह विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की ही देन है। उन्होंने आशा जताई कि सीएसआईआर-एनबीआरआई एवं आईसीएआर मिलकर भविष्य की चुनौतियों का सामना करने की दिशा में मिल कर अभूतपूर्व योगदान कर सकते हैं ।

वार्ता

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