दि लीजेंड ऑफ सुदर्शन चक्र फिल्म को देखने उमड़ रहा जैन समाज

दि लीजेंड ऑफ सुदर्शन चक्र फिल्म को देखने उमड़ रहा जैन समाज

मुजफ्फरनगर। श्वेताम्बर स्थानकवासी जैन समाज में संघशासता पूज्य गुरदेव सुदर्शन लाल महाराज के जीवन काल पर बनी फ़ीचर फ़िल्म दि लीजेंड ऑफ सुदर्शन चक्र पार्ट-2 15 नवंबर 2024 से देश भर के सिनेमाघरों में दिखाई जा रही है जो कि पिछले वर्ष आये प्रथम भाग की तरह ही जैनो श्रावकों के लिये आस्था का केंद्र बनी हुई है व लगातार हाउस फुल शो जाने से एक सफल फ़िल्म मानी जा रही है,इसी कड़ी में मुजफ्फरनगर के भोपा रोड़ पर स्थित मॉल में भी उक्त फ़िल्म का चित्रण 15 नवम्बर से प्रतिदिन शाम को 6ः30 से हो रहा है जिसे देखने सेकड़ो श्रद्धालुओं की भीड़ भक्ति भाव से ओतप्रोत होकर लगातार पहुँच रही है।

श्वेताम्बर स्थानकवासी जैन समाज के साथ-साथ संघशासता पूज्य गुरदेव श्री सुदर्शन लालमहाराज के प्रति जैन धर्म की प्रत्येक आमना व अन्य धर्मों के मानने वाले लोगो में भी अगाध आस्था रही है गुरुदेव के देवलोकगमन के पश्चात भी हर पीढ़ी के लोगो गुरुदेव सुदर्शन लाल महाराज के प्रति अपार भक्ति भाव रखतें हैं गुरुदेव के जीवन काल से प्रभावित एक फ़ीचर फ़िल्म पिछले वर्ष 2022 में भी प्रकाशित हुई थी जो कि प्रथम भाग के रूप में एक सफल फ़िल्म साबित हुई थी व शेष भाग का चित्रण भाग दो में किया गया है गुरुदेव के जीवन काल का सजीव चित्रण देख जहां जैन समाज भाव विभोर दिखाई पड़ता है वहीं नई पीढ़ी के लिये यह फ़िल्म बहुत शिक्षाप्रद व जैन धर्म की परंपराओं को लेकर महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान करने का माध्यम भी साबित हुई है।

आपको बताते चलें कि एक शताब्दी पूर्व 4 अप्रैल, 1923 के दिन विश्व के क्षितिज पर एक अद्भुत-अद्वितीय महापुरुष का अवतरण हुआ था। उन्हें गुरुदेव सुदर्शन लाल महाराज के नाम से सारा उत्तर भारत जानता है। उनकी गुणवत्ताओं का आंकलन कठिन नहीं असंभव है। उनके उपकारों का उल्लेख शब्दों की सीमा से बाहर है वे एक संत तो थे ही साथ ही संघ के निर्माता व उच्च कोटि शिष्यों के गुरु व महान गुरु के महान शिष्य भी थे। उन्होंने मानवता को सब धर्मों-सम्प्रदायों, संगठनों, राष्ट्रों, संस्कृतियों और धारणाओं से ऊंचा माना था। वे विशुद्ध वैष्णव परिवार में जन्मे, पर उन्होंने वैष्णवत्व से ऊपर मानवता को अधिमान दिया। उन्होंने जैन धर्म में संन्यास दीक्षा ली पर जैनत्व तथा संन्यास से भी ऊपर उनके लिए मानवता थी।

उन्होंने अपने शिष्यों में संयम-साधना, समाचारी-पालन के प्रति दृढ़निष्ठा भरी। फिर भी उन्होंने कहा कि इन कठोर से कठोर तपस्याओं, साधनाओं की आधारशिला मानवता है। गुरुदेव का निर्वाण 25 अप्रैल, 1999 के दिन दिल्ली में हुआ। उनके जन्म से हरियाणा, दीक्षा से पंजाब, निर्वाण से दिल्ली को धन्यता मिली, तो उनके समग्र जीवन-दर्शन ने अखिल धरा को कृतार्थता बक्शी थी। आज के आधुनिक समय में जरूरत है उनके आचार-विचार के प्रसार व उनके प्रति स्वीकार्यता की।

इसी कड़ी में शुक्रवार व शनिवार को भी बड़ी संख्या में जैन समाज के वरिष्ठजन,पुरुष,महिला व बच्चे फ़िल्म देखने पहुँचे व फ़िल्म के माध्यम से बह रही धर्म लहर का लाभ लिया ।

समस्त कार्यक्रम में मुख्य रूप से जैन एकता मंचष्युवा शाखा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व सपा नेता गौरव जैन,एस.एस.जैन सभा,सिद्धार्थ कॉलोनी के प्रधान विनोद जैन,मंत्री संजय जैन,उप प्रधान शम्मी जैन,महामंत्री कीमती लाल जैन,कोषाध्यक्ष संजय जैन,अरविंद जैन,सुनील जैन,अनुराग जैन(मेडिकल),कार्तिक जैन,कृष्ण जैन,सुनीत जैन,राजेश जैन(मोनिका पाइप),अभिनव जैन,राजेश जैन,आशीष जैन,विराट जैन,राजेन्द्र जैन अन्य सैंकड़ो साथीगण परिवार सहित पहुंचे व धर्म लाभ लिया उक्त के सम्बंध में दिनाँक 29 व 30 नवम्बर दिन क्रमशः शुक्रवार व शनिवार को शो के आयोजन के मुख्य धर्म लाभार्थी अरविंद जैन,अभिनव जैन (मै. फ़क़ीर चंद जैन एंड संस) व कीमती लाल जैन,सुनील कुमार जैन(मै.राम कुमार जैन,मुजफ्फरनगर) रहे।

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