5 करोड़ की फिरौती के लिए चिकित्सक का अपहरण-बीहड से बरामद

आगरा। हनी ट्रैप के चंगुल में फंसाकर बदन सिंह तोमर गैंग ने आगरा के वरिष्ठ चिकित्सक का नर्सिंग होम कर्मी की मदद से अपरहण करा लिया। गैंग की एक सदस्य ने महीने भर पहले ही चिकित्सक के नर्सिंग होम में नौकरी शुरू की थी। लॉन्ग ड्राइव के बहाने नर्सिंग होम की कर्मचारी द्वारा बुलाए गए चिकित्सक का तोमर गैंग ने अपहरण करा दिया। मामले की जानकारी के बाद चंबल के बीहड़ों को खंगालने में जुटी पुलिस ने आखिरकार चिकित्सक को मुक्त करा लिया। अपहरण की इस वारदात के सिलसिले में नर्सिंग होम कर्मी के अलावा उसका एक साथी पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया है।
दरअसल लगभग 1 माह पहले आगरा के वरिष्ठ चिकित्सक डॉक्टर उमाकांत गुप्ता के नर्सिंग होम में एक महिला कर्मचारी के रूप में स्टाफ में शामिल हुई थी। संध्या नामक नर्सिंग होम कर्मी लगभग 1 माह पहले से डॉक्टर के साथ व्हाट्सएप पर लगातार चैटिंग कर रही थी। मंगलवार की देर शाम संध्या ने डॉ गुप्ता को मिलने के लिए बुलाया था। डॉक्टर उमाकांत गुप्ता उससे मिलने के लिए आए तो वह उनकी कार में बैठ गई। इसके बाद लॉन्ग ड्राइव के बहाने संध्या ने डॉक्टर से अपने इशारे पर कार चलवाई। मधु नगर के पास बदमाशों ने उनकी कार को रोक लिया।
इसी बीच संध्या कार से उतरकर एक तरफ खड़ी हो गई। शस्त्रों के बल पर कार को रोकने वाले बदमाश डॉ गुप्ता को चंबल के बीहड़ों के भीतर ले गए। इस बीच अपहरण में शामिल एक बदमाश मंगलवार की रात धौलपुर में चेकिंग के दौरान पुलिस ने पकड़ लिया था। उससे ही पूछताछ में डॉक्टर के अपहरण और उसके बीहडोें में होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद पुलिस की टीम धौलपुर में पहुंच गई। पुलिस ने संध्या और डॉक्टर के अपहरण में शामिल एक बदमाश को पकड़ लिया। बताया जा रहा है कि पुलिस द्वारा गिरफ्तार की गई संध्या मूलरूप से महाराष्ट्र की रहने वाली है और बीहड़ में सक्रिय बदन सिंह तोमर के संपर्क में थी। बदन सिंह तोमर का संपर्क डाकू केशव गुर्जर से हैं। पुलिस को तहकीकात के दौरान जानकारी मिली है कि लगभग 1 माह पहले संध्या नर्सिंग होम में आई थी। उस दौरान उसने डॉक्टर उमाकांत गुप्ता को अपहरण के लिए चिन्हित कर लिया था। बताया जा रहा है कि संध्या ने पुलिस को बताया है कि बदमाशों ने 5 करोड़ की फिरौती मांगने का प्लान बनाया था। बदन सिंह गिरोह को इस बात की मुकम्मल जानकारी थी कि कम से कम एक करोड रुपए तो फिरौती में मिल ही जाएंगे। यही मानकर गिरोह ने डॉक्टर गुप्ता को चिन्हित किया था। लेकिन फिरौती के लिए फोन किया जाता इससे पहले ही पुलिस सक्रिय हो गई और चिकित्सकों की बीहड़ से बरामद कर लिया।