भ्रष्टाचार की छह करोड़ रु से अधिक की नकदी बरामद, इतने गिरफ्तार

चंडीगढ़। हरियाणा में सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार के खिलाफ छेड़े गये अभियान में राज्य सतर्कता ब्यूरो ने वर्ष 2022 के दौरान भ्रष्टाचार से सम्बंधित 246 मामले दर्ज कर 120 गिरफ्तारियां कीं और इस दौरान छह करोड़ रूपये की नकदी भी जब्त की।
ब्यूरो के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने बताया कि ब्यूरो की टीमों ने वर्ष 2022 में 170 छापे मारे और मौके पर और तलाशी के दौरान 6,21,70,230 रुपये बरामद किए हैं। वर्ष के दौरान 27 राजपत्रित अधिकारी, 166 गैर-राजपत्रित अधिकारी और 27 निजी लोगों सहित कुल 193 सरकारी कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने कहा कि ब्यूरो का मुख्यत: ध्यान क्लर्क, पटवारी, लाइनमैन, पुलिस कर्मियों आदि जैसे कनिष्ठ स्तर के कर्मचारियों से वरिष्ठ रैंक पर केंद्रित रहा जहां अक्सर संगठित भ्रष्टाचार का रैकेट चलता है।
कपूर के अनुसार मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने ब्यूरो के विभिन्न कदमों को मंजूरी प्रदान कर दी है जिसमें सरकारी अधिकारियों के खिलाफ रिश्वत मांगने की शिकायत दर्ज कराने वाले पीड़ित लोगों को 'ट्रैप मनी' प्रदान करने के लिए एक रिवॉल्विंग फंड स्थापित करना भी शामिल है। उन्होंने कहा कि इससे शिकायतकर्ताओं को अब अपनी जेब से रिश्वत के पैसे का इंतजाम करने के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। सरकार ने ब्यूरो में 809 अतिरिक्त पदों की भर्ती को भी मंजूरी, सूचनाओं की लीकेज रोकने के लिए स्वतंत्र गवाहों की नियुक्ति की प्रणाली में बदलाव, छह डिवीजनल सतर्कता ब्यूरो का सृजन आदि शामिल है। इसके अतिरिक्त, हरियाणा में वर्ष 2023-2024 के लिए सतर्कता संबंधी पहलों को मजबूत करने के लिए 100 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। ब्यूरो ने अपनी इन कार्रवाइयों के दौरान एक जिला टाउन प्लानर को 5,00,000 रुपये तथा एक तहसीलदार को सह आरोपी के रूप में गिरफ्तार किया गया। एक उप आबकारी एवं कराधान आयुक्त को 50,000 रुपये लेते हुये और एक जेल अधीक्षक को भी ट्रैप मामले में गिरफ्तार किया गया। इनके अलावा, वर्ष के दौरान पांच एचसीएस अधिकारियों को भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार किया गया। साथ ही, शहरी स्थानीय निकाय विभाग के दो मुख्य अभियंता, एक अधीक्षण अभियंता और एक कार्यकारी अभियंता, एक मुख्य लेखा अधिकारी और एक संयुक्त निदेशक को सार्वजनिक धन की हेराफेरी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
उन्होंने बताया कि नगर निगम के एक अधीक्षण अभियंता एवं लेखापाल को 1,40,000 रुपये, हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड एवं सिंचाई विभाग के दो कार्यकारी अभियंता को 1,60,000 रुपये, बिजली विभाग के दो उपमंडल अभियंताओं एवं सह आरोपी को 3,00,000 रुपये, खनन एवं भूविज्ञान का एक खनन अधिकारी को 1,00,000 रुपये, शहरी स्थानीय निकाय विभाग का एक भवन निरीक्षक को 5,00,000 रुपये और आबकारी एवं कराधान विभाग के एक कराधान निरीक्षक को 2,00,000 रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों काबू किया गया। कपूर ने बताया कि दो इंस्पेक्टर/एसएचओ, राजस्थान पुलिस के एक सेवानिवृत्त डीएसपी और करनाल में एमवीओ के रूप में कार्यरत एक अन्य इंस्पेक्टर सहित 46 पुलिस कर्मियों, राजस्व विभाग के 33 अधिकारी/कर्मचारियों, बिजली निगमों के 24, शहरी स्थानीय निकायों के 14, खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों के 5, परिवहन के 5, शिक्षा विभाग के 4, आबकारी व कराधान के 3, सहकारिता के 3, हरियाणा खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड के 3, हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड के 3, बागवानी के 3, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के 3, स्वास्थ्य के 2, एचएसवीपी के 2, खनन और भूविज्ञान के 2, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 2, सामाजिक न्याय और अधिकारिता के 2, सिंचाई के 2, वन के 2 और पशुपालन एवं डेयरी, रोजगार, मत्स्य पालन, खाद्य एवं औषधि प्रशासन, गृह रक्षक, हाउसिंग बोर्ड, एचपीएचसी, उद्योग और वाणिज्य, श्रम निर्माण कल्याण, जेल, पंचायती राज, अभियोजन, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी, कोषागार और लेखा तथा वक्फ बोर्ड जैसे 15 अन्य विभागों के कर्मचारियों को अलग-अलग मामलों में 5,000 रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। भ्रष्टाचार पर लगातार प्रहार करने के अतिरिक्त, ब्यूरो राज्य भर के विभिन्न विभागों, संस्थानों और कार्यालयों में मुखबिरों, पीड़ित व्यक्तियों और सूत्र की फीडबैक प्रणाली के आधार पर डाटा भी एकत्र कर रहा है। इससे ब्यूरो के अधिकारियों को ट्रैप करने और रिश्वत मांगने और स्वीकार करने वालों को पकड़ने में मदद मिलेगी। वर्ष 2023 में भ्रष्ट अधिकारियों की अवैध कमाई की संपत्ति कुर्क कर उन पर बड़ी कार्रवाई करने की तैयारी कर रहे हैं।