बिहार में मांझी फैक्टर

लखनऊ। बिहार के विधानसभा चुनाव में कोरोना फैक्टर के साथ ही कई अन्य फैक्टर भी काम कर रहे हैं। सत्तारूढ़ राजग के घटक, विशेष रूप से लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा ) अपने को जदयू से कम नहीं आंकती। नीतीश कुमार ने लोजपा को उसका कद समझाने के लिए ही जीतनराम मांझी को महागठबंधन से खींच लिया है। जदयू से दलित नेता श्याम रजक राष्ट्रीय जनता दल ( राजद ) में शामिल हो गये। ये दलित नेता कितने विधायक दिला पाएंगे, यह तो बाद की बात है। फिलहाल अभी क्या प्रभाव पड रहा है, इसपर चर्चा हो रही है। मांझी के जद यू में जाने से महागठबंधन में सीटों के बंटवारे की समस्या थी, वो दूर हो गयी है। फिलहाल अभी कुछ भी ठीक ठीक नहीं कहा जा सकता क्योंकि जीतनराम मांझी राजग गठबन्धन छोड़कर ही विपक्षी महागठबंधन के साथ जुड़े थे। दलित वोटों के समीकरण में उनकी भूमिका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अब देखना यह है कि आगामी विधानसभा चुनाव में मांझी फैक्टर क्या गुल खिलाता है।
महागठबंधन के भीतर के समीकरण पर गौर करें तो पिछली बार की तुलना में इस बार का समीकरण कुछ अलग है। वर्ष 2015 में आरजेडी और कांग्रेस के साथ-साथ जेडीयू महागठबंधन का हिस्सा थी। उस वक्त जेडीयू-आरजेडी 101-101 सीटों पर तो कांग्रेस 41 सीटों पर चुनाव लड़ी थी लेकिन अब समीकरण बदल चुका है। जेडीयू अब एनडीए का हिस्सा है तो दूसरी तरफ महागठबंधन में उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएसपी और मुकेश साहनी की वीआईपी की एंट्री हो चुकी है। हालाकि एंट्री तो मांझी की भी हुई थी, लेकिन उन्होंने खुद ही एक्जिट ले लिया है। नीतीश कुमार के महागठबंधन से बाहर जाने के बाद कांग्रेस की तरफ से ज्यादा सीटों की मांग की जा रही है। कांग्रेस विधायक दल के नेता सदानंद सिंह ने इस बार 80 सीटों की मांग की है। दूसरी तरफ आरजेडी भी 160 से कम सीटों पर लड़ने के मूड में नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि बाकी दूसरे दलों का क्या होगा? सूत्रों के मुताबिक, महागठबंधन के घटक दलों को लग रहा है कि जीतनराम मांझी के बाहर जाने से सीटों के बंटवारे में उनकी अड़चनें कम हो जाएगी। दूसरी तरफ, अगर महागठबंधन में सीपीआई और सीपीआईएमएल की एंट्री होती है, तो उस हालात में भी आरजेडी सीपीआईएमएल को और कांग्रेस सीपीआई को अपने कोटे से सीटें दे सकती हैं। लेकिन यह सब कुछ अभी चर्चा के केंद्र में है। सबसे पहले सीटों का बंटवारा और बाकी मुद्दों पर सहमति आरजेडी और कांग्रेस के बीच होना है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव दिल्ली में है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि उनकी कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात हो सकती है। कांग्रेस की तरफ से अब तक तेजस्वी के नाम पर मुहर नहीं लगाई गई है। उम्मीद यही की जा रही है कि सीटों के बंटवारे पर सहमति के साथ ही कांग्रेस तेजस्वी के नाम पर अपनी सहमति दे देगी, लेकिन उसके पहले वो सीटों के मामले में सौदेबाजी कर लेना चाहती है।
राज्य के चुनाव में बाहुबलियों की भी अलग भूमिका रही है। ऐसे ही एक नेता हैं रामा सिंह। रामा सिंह ने गत दिनों कहा था कि उनकी बात राजद के बड़े नेताओं से हो चुकी है और जल्दी ही पार्टी में उनकी एंट्री को हरी झंडी मिल जाएगी। उन्होंने कहा कि मैंने राजद में शामिल हो जाऊंगा , यह तय कर लिया है। उन्होंने राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह पर तंज कसते हुए कहा कि उनका राजद में क्या योगदान है, इसकी मुझे भी पूरी जानकारी है। राजद में रह कर कभी रामविलास पासवान का विरोध किया तो महागठबंधन में रह कर नीतीश कुमार का, अब नीतीश कुमार अच्छे लग रहे हैं। उनकी नाराजगी मुझसे क्यों है ,मुझे नहीं पता लेकिन मुझसे कभी आगे नहीं निकल पाए इस बात की नाराजगी हो सकती है। रामा सिंह ने कहा कि रघुवंश सिंह राजद को कितना फायदा दिला पाएंगे। पता नहीं, लेकिन मैंने लम्बे समय तक जनता की सेवा की है ये लोगों को अच्छे से मालूम है। रघुवंश सिंह पार्टी में क्या करेंगे पता नहीं, लेकिन मुझे पार्टी से हरी झंडी मिल गई है। बस समय का इंतजार है और राजद में शामिल हो जाऊंगा।
बता दें, कुछ दिनों पहले लालू यादव के बड़े बेटे व राजद नेता तेजप्रताप यादव ने रघुवंश प्रसाद सिंह पर तीखी टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि पार्टी एक समुद्र की तरह होता है। अगर उसमें से एक लोटा पानी निकल भी जाए तो कोई फर्क नहीं पड़ता है। हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि रघुवंश बाबू नाराज हैं तो मान भी जाएंगे। पार्टी के अंदर नाराजगी और लोगों का आना-जाना लगा रहता है। इस बीच रघुवंश प्रसाद सिंह से तेजस्वी यादव ने एम्स में मुलाकात की लेकिन इसके बाद भी वह नहीं माने। रघुवंश प्रसाद सिंह ने मीडिया से कहा कि हमने एक बार जो फैसला कर लिया तो हम पीछे नहीं हट सकते हैं। हमने न तो कभी अपने सिद्धांतों से समझौता किया है और न ही आगे करेंगे। रघुवंश प्रसाद सिंह ने बताया कि तेजस्वी यादव ने एम्स में आकर मेरे स्वास्थ्य का हालचाल जाना जो मुझे अच्छा लगा लेकिन हमने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद से पहले ही इस्तीफा दे
दिया है और उसे हरगिज वापस नहीं लेंगे।
रघुवंश प्रसाद सिंह और दिल्ली के एम्स में इलाज करवा रहे हैं। इसके साथ ही साफ किया कि अस्पताल से बाहर निकलने के बाद ही कोई फैसला लूंगा। जद(यू) की तरफ से उन्हें निमंत्रण मिल चुका है। मालूम हो कि रामा सिंह की राजद में एंट्री के फैसले के बाद से रघुवंश प्रसाद सिंह पार्टी हाईकमान से बहुत नाराज हैं और उन्होंने इसी क्रम में पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन यह अभी स्वीकार नहीं किया गया है।
सत्तारूढ राजग गठबंधन की तरफ से फिलहाल नीतीश कुमार को ही चुनाव में आगे रखा जाएगा। यह बात भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने स्पष्ट कर दी है। श्री नड्डा ने गत दिनों कहा था भाजपा और जदयू जब-जब एक साथ आई हैं, तब-तब राजग की जीत हुई है। इस बार भी हम सब मिलकर चुनाव लड़ेंगे और यशस्वी होंगे।जेपी नड्डा का यह बयान ऐसे समय में आया जब राजग के सहयोगियों जनता दल यूनाइटेड और लोजपा के बीच लगातार वाकयुद्ध चल रहा है। लोजपा अध्यक्ष चिराग पासवान कोरोना महामारी के मद्देनजर बिहार चुनाव टालने की मांग करते आ रहे हैं। राज्य में कोरोना वायरस संक्रमण और बाढ़ की स्थिति को लेकर भी वह नीतीश कुमार पर लगातार सवाल उठाते आ रहे हैं। पासवान के इन बयानों को लेकर जदयू के नेता उन्हें निशाने पर भी लेते रहे हैं। इस तरह जीतनराम मांझी को लेकर नीतीश कुमार ही फैसला करेंगे। जेपी नड्डा ने कहा कि भाजपा केवल उन सीटों की ही लड़ाई नहीं लड़ेगी जहां से उसके उम्मीदवार खड़े होंगे बल्कि सभी बूथों पर लड़ेगी और पार्टी के सभी सहयोगी दलों के उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के लिए काम करेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बिहार के विकास के लिए कृतसंकल्पित हैं।
बिहार विधानसभा चुनाव के पहले नीतीश कैबिनेट ने खजाना खोल दिया है। बिहार में सड़क, कृषि, ऊर्जा, उद्योग समेत कई अन्य योजनाओं को गति देने के लिए 11,400 करोड़ रुपये और खर्च करने की मंजूरी दी गई है। इस फैसले से सैंकड़ों किलोमीटर सड़क, बिजली आपूर्ति की व्यवस्था होगी। कैबिनेट ने मुख्यमंत्री कृषि विद्युत योजना पर एक हजार तीन सौ करोड़ खर्च करने पर मुहर लगाई है, जबकि 1200 करोड़ की राशि बिजली वितरण कंपनी को देने पर मुहर लगाई है।
उधर, चुनाव के ठीक पहले अल्पसंख्यक मान्यता प्राप्त विद्यालय के शिक्षक और अन्य कर्मियों के लिए 7वां वेतनमान लागू कर दिया गया है। यह लाभ 1 जनवरी 2006 या इसके बाद 27 मई 2011 के पूर्व नियुक्त कर्मियों को मिलेगा। वहीं, डाक्टरों के बाद अब डॉक्टरी की पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट्स को एक महीने का वेतन दिया जाएगा। कोरोना महामारी को लेकर एमबीबीएस और पीजी की पढ़ाई कर रहे मेडिकल छात्रों को भी 1 महीने का अतिरिक्त वेतन मिलेगा। एक महीने के बराबर की राशि देने पर कैबिनेट ने मुहर लगा दी है। विपक्षी महागठबंधन को इस फैक्टर का भी चुनाव में सामना करना पड़ेगा।
(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)