अजमेर शरीफ से वक्फ बोर्ड को लेकर समर्थन के रूप में मोदी को मिली ईदी

अजमेर। ईद उल त्यौहार के मौके पर अजमेर शरीफ से वक्फ बोर्ड संशोधन बिल 2025 को लेकर मिले समर्थन के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार को ईदी मिली है। अखिल भारतीय सूफी सज्जादानशीन परिषद के अध्यक्ष की ओर से कहा गया है कि वक्फ बोर्ड बिल को लेकर मुसलमानों को गुमराह किया जा रहा है।
सोमवार को उत्साह एवं उमंग के साथ देशभर में मनाई जा रहे ईद उल फितर के त्योहार पर जहां अनेक मुसलमान ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की अपील पर अपनी बाजू में काली पट्टी बांधकर ईद की नमाज पढ़ने के लिए निकले थे, वही मोदी सरकार को अजमेर शरीफ से वक्फ बोर्ड संशोधन बिल के समर्थन की ईदी प्राप्त हुई है।ईद उल फितर के त्यौहार के मौके पर अखिल भारतीय सूफी सज्जादानशीन परिषद के अध्यक्ष नसीरुद्दीन चिश्ती ने कहा है कि वक्फ बोर्ड संशोधन बिल- 2025 को लेकर देश के मुसलमानो को पूरी तरह से गुमराह किया जा रहा है।
उन्होंने कहा है कि वक्फ बिल के आने से वक्फ की संपत्ति में पारदर्शिता आएगी जो कौम के काम आएगा।ईद उल फितर की नमाज के बाद अजमेर दरगाह शरीफ के आध्यात्मिक प्रमुख के उत्तराधिकारी सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की ओर से लाये जा रहे वक्फ संशोधन बिल-2025 का समर्थन करते हुए इसे सरकार का सही कदम बताया है।उन्होंने कहा है कि सरकार की ओर से काफी सोच विचार के बाद वक्फ बोर्ड संशोधन बिल 2025 लाया गया है।सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने कहा है कि विरोध करना, सहमति या असहमति जताना इंसान की अपनी मर्जी है, क्योंकि विरोध और समर्थन लोकतंत्र का हिस्सा है। अगर कोई संवैधानिक तरीके से विरोध करता है तो करें, इसमें कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन जहां तक वक्फ बोर्ड संशोधन बिल-2025 का सवाल है तो मेरा मानना है कि इसमें संशोधन किए जाने की जरूरत है।
देश भर के करोड़ों मुसलमानों के लिए बड़ी आस्था के केंद्र अजमेर शरीफ दरगाह के चिश्ती ने कहा है कि यह कहना पूरी तरह से गलत है कि वक्फ बोर्ड संशोधन बिल- 2025 के आने से मस्जिद, खानकाह और कब्रिस्तान मुसलमानों से छीन जाएंगे। हो सकता है कि किसी क्षेत्र से उन्हें आपत्ति हो, लेकिन यह लोकतंत्र का हिस्सा है और सरकार को भी कोई जल्दबाजी नहीं है। क्योंकि सरकार बहुत तसल्ली से वक्फ बोर्ड संशोधन बिल 2025 को लाई थी और इसके बाद इसे जेसीपी में भेजा गया। जेसीपी ने सब की सुनवाई की। उसके बाद अब इस बिल को पेश किया जाएगा।वक्फ बोर्ड संशोधन बिल-2025 के फायदे गिनाते हुए उन्होंने कहा है कि मुझे पूरी उम्मीद है कि संशोधन के बाद वक्फ बोर्ड में पारदर्शिता आएगी और वक्फ की प्रॉपर्टी की रक्षा होगी।उन्होंने कहा है कि जो प्रॉपर्टी पहले से लोगों के कब्जे में है उनके ऊपर से लोगों का कब्जा हटेगा, किराया बढ़ेगा जो कौम के काम आएगा।
वक्फ बोर्ड की जमीन उनके हाथ से नहीं चली जाए इसलिए कुछ लोगों द्वारा मुसलमानों को गुमराह किया जा रहा है।उन्होंने कहा है कि वक्फ बोर्ड संशोधन बिल-2025 शरियत में हस्तक्षेप नहीं है, क्योंकि वक्फ बोर्ड का मामला अलग है। वक्फ को मैनेज करने के लिए 1954 में एक कानून लगाया लाया गया था।बनाए गए सिस्टम के मुताबिक इसमें सीईओ होता है, अध्यक्ष होता है, सदस्य होते हैं, लेकिन सरकार की ओर से अब उसकी कार्य प्रणाली को बदला जा रहा है और उसे और अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है।