बोले राम गोविंद- बड़ा बजट बताकर जनता को गुमराह कर रही भाजपा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे राम गोविंद चौधरी ने वित्त मंत्री सुरेश खन्ना की ओर से विधानसभा में पेश किए गए वर्ष 2025- 26 के बजट को लेकर भाजपा सरकार पर पब्लिक को गुमराह करने का आरोप लगाया है। आंकड़े जारी करते हुए उन्होंने कहा है बजट पब्लिक को महंगाई से निजात दिलाने में पूरी तरह असफल रहा है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता विरोधी दल रहे राम गोविंद चौधरी ने बीते दिन उत्तर प्रदेश विधानसभा में पेश किए गए वर्ष 2025-26 के बजट को लेकर दी गई अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि भाजपा सरकार बड़ा-बड़ा बजट कहकर जनता को गुमराह कर रही है।
उन्होंने कहा है कि वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने वित्तीय वर्ष 2025-26 का रूपये 8.08.736 करोड़ 06 लाख का बजट प्रस्तुत किया है। पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में मूल और अनुपूरक बजट मिलाकर 9,27,313 करोड़ 34 लाख बजट लिया गया था। पिछले वर्ष के कुल बजट से इसे अगर घटाकर देखें तो 1,18,577 करोड़ 28 लाख वजट कम है।
उन्होंने कहा है कि बजट पर सबकी निगाहें इसलिए लगी रहती थी कि जो चीजें मंहगी या सस्ती होनी होती थी वह बजट में ही होती थी, परंतु अब मंहगाई रोज-रोज बढ़ती है।
उन्होंने कहा है कि प्रदेश की मुद्रास्फीति दर 6.26 है। इस दृष्टि से पिछले कुल बजट से 58 हजार 49 करोड़ 42 लाख रूपये और बढ़ाकर जब लाते तब वह पिछली बजट के बराबर हो पाता।
उन्होंने कहा है कि बजट का महत्व इस बात पर निर्भर करता है कि सरकार उस बजट का सदुपयोग कर पा रही है या नहीं। भाजपा सरकार जब से आयी है तब से विधान सभा में बजट ले तो लिया जाता है परंतु वह जनता के हित में खर्च नहीं कर पाती है। तमाम विभाग ऐसे हैं जिनमें 50 प्रतिशत बजट भी खर्च नहीं हो पाया।
उन्होंने कहा कि महालेखाकार ने अनुपूरक बजट में बताया था कि 2024-25 वर्ष का राजस्व व्यय मद में मात्र 37.78 प्रतिशत और पूंजीगत परिव्यय में मात्र 22.86 प्रतिशत खर्च कर सकी है।
उन्होंने कहा है कि वित्त मंत्री सुरेश खन्ना को इस बजट की तुलना पिछले वर्ष के बजट से करनी चाहिए थी, परंतु उन्होंने 2014, 2018, 2019, और 2020-23 की तुलनाएं प्रस्तुत की हैं। बजट में नया क्या- क्या किया जा रहा है, इसको वित्त मंत्री जी को बताना चाहिए, परन्तु उनका पूरा भाषण इस बात पर निर्भर है कि पिछले वर्ष क्या किया गया।
उन्होंने कहा है कि चालू योजनाओं में क्या-क्या प्राविधान है, उनके कितने लाभार्थी हैं। कितनों को फांसी की सजा हुई, कितनों को सजा दिलायी गयी, कितने मोबाइल नम्बर ब्लाक कराये गये, कितनों का इंकाउण्टर हुआ। कितने घायल हुए। यह सब आंकड़े देकर मोटी पुस्तिका प्रस्तुत कर जनता को गुमराह करने का प्रयास किया है।
उन्होंने कहा है कि इस बजट से किसी भी वर्ग को कोई लाभ होने वाला नहीं है। बेरोजगार नवयुवक, मध्यम वर्गीय, गरीब, किसान, लघु उद्यमियों को व्यापारियों को पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित, अल्पसंख्यक वर्ग को केवल निराशा ही प्राप्त होनी है।