राहुल की सांसदी जाने से कांग्रेसजनों में आक्रोश- बयानबाजी तक सीमित

राहुल की सांसदी जाने से कांग्रेसजनों में आक्रोश- बयानबाजी तक सीमित

रुड़की। मोदी सरनेम को लेकर मानहानि केस मामले में अदालत की ओर से दी गई 2 साल की सजा के बाद कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं लोकसभा सांसद रहे राहुल गांधी की सांसदी रद्द किए जाने के बाद कांग्रेस नेताओं में आक्रोश व्याप्त है। लेकिन बयानबाजी तक सीमित रहते हुए सभी कांग्रेसजनों ने इसे विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास और लोकतंत्र की हत्या बताया है।

शनिवार कोकांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और लोकसभा सांसद (Rahul Gandhi) की लोकसभा सदस्यता रद्द किए जाने के बाद रूड़की के स्थानीय काँग्रेसी नेताओं में आक्रोश है। सभी ने इसे विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास और लोकतंत्र की हत्या बताया है। काँग्रेस के वरिष्ठ नेता और महानगर काँग्रेस कमेटी के महामंत्री (Vishal Sharma) ने कहा कि ऐसा करना शर्मनाक एवं दुर्भाग्यपूर्ण है। संसदीय लोकतंत्र के इतिहास में इससे बड़ा काला धब्बा कुछ नहीं। उन्होंने कहा कि आज भारतीय लोकतंत्र मृत घोषित हुआ है।

शर्मा ने कहा कि जिस तीव्रता से यह निर्णय लिया लिया गया, उसके पीछे आधारहीन तथ्य और तर्क हैं। उन्होंने कहा कि सभी विपक्षी पार्टियों को एक हो जाना चाहिए ताकि तानाशाह और फ़ासीवादी सरकार लोकतंत्र को कमजोर ना कर सके। उन्होंने कहा कि सिर्फ राहुल गांधी की सदस्यता रद्द नहीं हुई है, आधिकारिक रूप से आज भारतीय लोकतंत्र मृत घोषित हुआ है। इधर, वरिष्ठ काँग्रेस नेता श्रवण गोस्वामी ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को ऊपरी अदालत जाने का अधिकार है और यह कैसी हुकूमत है कि आनन फानन में यह निर्णय ले लिया गया। गोस्वामी ने कहा कि ईर्ष्या, द्वेष में ऐसा किया जाना दुर्भाग्यजनक है और विद्वेष की राजनीति का प्रकटीकरण है। यह घबराहट में लिया गया निर्णय है।

पूर्व चेयरमैन दिनेश कौशिक ने कहा कि लोकसभा की सदस्यता ये रद्द कर सकते है, लेकिन करोड़ों दिलों की सदस्यता कैसे रद्द करेंगे, वह तो बनी हुई है। उन्होंने कहा कि भारत जोड़ो यात्रा से (BJP) की विचारधारा रखने वाले लोग परेशान हैं। उन्होंने इसे पूरी तरह स्क्रिप्टेड बताया। कौशिक ने कहा कि यह विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास है, क्योंकि ये लोग डर गए हैं। उधर आम जनमानस का कहना है कि वर्ष 1977 में आई जनता पार्टी सरकार के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की भी लोकसभा की सदस्यता चली गई थी। परंतु उस समय कांग्रेसजनों ने देशभर में आंदोलन करते हुए अगले आम चुनाव में कांग्रेस के हाथ में सत्ता को ला दिया था। लेकिन मौजूदा समय में हाथ लगे बड़े मुद्दे को लेकर कांग्रेसजन सड़क पर उतरने का साहस नहीं जुटा पा रहे हैं। जबकि यह समय ट्विटर या सोशल मीडिया के माध्यम से बयानबाजी का नहीं बल्कि सड़क पर उतरकर आंदोलन करने का है। परंतु कांग्रेसजन इस बड़े मुद्दे को भुनाने के लिए भी सड़क पर नहीं उतर रहे है।

Next Story
epmty
epmty
Top