खाकी में खरा साबित हुए साबत- IPS से रिटायर होते ही बने UPSSSC अध्यक्ष

लखनऊ। हमेशा सीखते रहने की लगन इंसान को उस मुकाम तक पहुंचाती है, जहां पर दुनिया उस शख्स को युवा रोल मॉडल के रूप में देखते हैं। पुलिसिंग करने के अंदाज से उनकी प्रधानमंत्री द्वारा की गई तारीफ से लेकर राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय अॅवार्ड मिल चुके हैं। बचपन से सिविल सर्विसेज में सपना संजोय युवक चयन होने के बाद आईपीएस के रूप में यूपी कैडर में एंट्री करता है और बदन पर खाकी वर्दी पहनकर एंट्री से अंतिम दौर तक जुदा अंदाज में ऐसी पुलिसिंग की है कि जहां पोस्टिंग रहती है, वहां अपनी अमिट छाप छोड़ी। नाम है सत्यनारायण साबत। सत्यनारायण साबत रिटायर आईपीएस अधिकारी हैं, जिन्हें एस.एन. साबत के नाम से भी जानते हैं। एस.एन. साबत का साढ़े तीन दशक का बतौर आईपीएस अधिकारी कार्यकाल रहा। इस कार्यकाल में उन्होंने कई जिलों में बतौर कप्तान पुलिसिंग की। इसके अलावा कभी डीआईजी, कभी एडीजी तो कभी डीजी रैंक के अफसर के रूप में अपराधियों पर अपना हल्ला बोल जारी रखा और अपने पास आने वाले पीड़ित को हरसंभव इंसाफ दिलाने के लिये प्रयासरत रहे। आईपीएस अधिकारी की पुलिसिंग को देखते हुए उन्हें नक्सलवाद क्षेत्रों में ऑपरेशन प्रभारी बनाया गया, जहां पर उन्होंने नक्सलवाद के विरूद्ध बड़ी कार्रवाई करते हुए उन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को दिमाग से गंदी सोच निकालते हुए उन्हें कौशल विकास की दिशा में लाने का काम किया। उनके अच्छे जीवन यापन की सोच बनाते हुए एस.एन. साबत द्वारा युवाओं को हिन्दी, अंग्रेजी पढ़ना-बोलना, इलेक्ट्रिशियन, प्लेम्बिंग, ड्राइविंग कोर्स कराया गया और अधिक पढ़े-लिखे लोगों को कम्प्यूटर कोर्स करवाया। उन्होंने वहां पर एक साल में 1800 युवाओं और महिलाओं को प्रशिक्षण दिलाया और उनकी इस मेहनत का रिजल्ट आया कि 90 प्रतिशत युवा और महिलाएं कामयाब हो गई, जिनमें कोई जॉब पर तो कोई अपने काम पर लग गया। एस.एन. साबत द्वारा किये गये कार्यों की स्थानीय लोगों द्वारा ही नहीं बल्कि दूर-दूर तक सराहना की गई थी। एस.एन. साबत पर वर्ष 2019 के महाकुंभ का दायित्व आया तो उन्होंने वहां भी ऐसी पुलिसिंग करते हुए महाकुंभ को सकुशल सम्पन्न कराया था, जिसके बाद यूपी के सीएम द्वारा उन्हें ईनाम देते हुए सम्मानित किया गया था। एस.एन. साबत को आईपीएस के पद से रिटायर होते ही यूपी में बड़ी जिम्मेदारी मिली है। एस.एन. साबत को उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है। साल 1990 बैच के पूर्व आईपीएस अधिकारी और उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष एस.एन. साबत पर पेश है खोजी न्यूज की खास रिपोर्ट...
वर्ष 1964 के दिसम्बर महीने की 23 तारीख की बात है, इस तारीख को ओडिसा के कोरापुट में प्रशासनिक अधिकारी रघुनाथ साबत के घर में एक बच्चे ने जन्म लिया, जिनका नाम रखा गया सत्यनारायण साबत। सत्यनारायण साबत को एस.एन. साबत के नाम से भी पुकारा जाता है। एस. एन. साबत की स्कूली और इटंरमीडिएट की शिक्षा होने के बाद उन्होंने पदार्थ विज्ञान और ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट दो विषयों से स्नातकोत्तर की। एस. एन. साबत ने फिजिक्स से एम.एससी, पीएचडी, पीजीडीबीएम और फ्रेंच भाषा से डिप्लोमा भी किया हुआ है।
बचपन से ही सिविल सर्विसेज में जाने का सपना संजोय एस.एन. साबत यहां चयन न होने के बाद विकल्प के तौर पर पर्यावरण वैज्ञानिक बनने की चाहत रखते थे। वर्ष 1989 की बात है कि जब उन्होंने सिविल सर्विसेज की परीक्षा को क्रेक किया और उन्होंने वहीं से अपने बदन पर खाकी वर्दी पहनने की इच्छा बनाई और साल 1990 बैच के आईपीएस अधिकारी के तौर पर उन्हें यूपी कैडर मिला। यूपी कैडर मे बतौर एएसपी उनकी शुरूआत बनारस से होती है। इसके उपरांत वह अलीगढ़ और अयोध्या में भी एएसपी के रूप में कार्यरत रहे। पूर्व आईपीएस अधिकारी एस.एन. साबत जालौन, मुजफ्फरनगर, बनारस, सोनभद्र, चंदौली, मिर्जापुर, आगरा, फतेहपुर जैसे जिलों में पुलिस कप्तान के रूप में पीड़ितों को त्वरित न्याय देकर आम जनमानस में अपनी छाप छोड़ चुके हैं।
वर्ष 2015 के दिसम्बर माह में ही यानी एस.एन. साबत के जन्म दिवस वाले माह दिसम्बर में 13 तारीख को प्रमोशन मिला और वह बन गये थे उपमहानिरीक्षक रैंक के आईपीएस अधिकारी। व्यवहार कुशल अफसर माने जाने वाले एस.एन. साबत मिर्ज़ापुर, कानपुर और बनारस के डीआईजी रहे। इसके पश्चात 26 जून 2010 को एस.एन. साबत को आईजी के पद पर प्रमोटिड किया गया। एस.एन. साबत को संयुक्त राष्ट्र की शांति सेना में कार्य करने हेतु भेजा गया, जहां पर उन्होंने मानवाधिकार के लिये बहुत काम किया। वहां से लौटे तो एस.एन. साबत 5 साल तक सीआरपीएफ में महानिरीक्षक के पद पर तैनात रहे।
सीआरपीएफ में एस.एन. साबत की पोस्टिंग के दौरान मुज़फ्फरनगर में 2013 में दंगा हुआ, दंगे में जैसे ही सीआरपीएफ की तैनाती हुई तो एस.एन. साबत स्पेशल तौर पर मुज़फ्फरनगर पहुंचे और दंगे को नियंत्रण करने में अपनी विशेष भूमिका निभाई। इसकी वजह भी थी कि एस.एन. साबत चूंकि 1997 में मुज़फ्फरनगर में एसएसपी रह चुके थे और इस जनपद और वहां के लोगांे से परिचित थे इसलिए उन्होंने वहां के ज़िम्मेदार लोगों से भी व्यक्तिगत बातचीत कर ज़िले में शांति स्थापित करने की बात की। उनके अनुभव का सीआरपीएफ को मुज़फ्फरनगर में लाभ मिला और इस पैरामिलेट्री फोर्स ने एस.एन. साबत के निर्देशन में दंगे में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने में मदद की। सीआरपीएफ में रहते नक्सल एरिया में भी एस.एन साबत ने नक्सलियों से मुकाबला करते हुए जनता को बचाने में अपना योगदान दिया था। इसके अतिरिक्त एस.एन. साबत आईजी रेलवे के रूप में काम कर चुके हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में एस.एन. साबत पैरामिलेट्री फोर्स के इंचार्ज थे, उनके मार्गदर्शन में लोकसभा चुनाव शांतिपूर्वक सम्पन्न कराने में भी पैरामिलेट्री फोर्स कामयाब हुई थी।
पूर्व आईपीएस अधिकारी एस.एन. साबत को 31 दिसम्बर 2014 को प्रमोशन मिला और वह अपर पुलिस महानिदेशक यानी एडीजी रैंक के अफसर बन गये थे। यूपी में पूर्व में इलाहाबाद और अब प्रयागराज जोन के एडीजी और लखनऊ जोन के भी अपर पुलिस महानिदेशक के रूप में गुड पुलिसिंग कर चुके हैं। वर्ष 2021 का अक्टूबर माह एस.एन. साबत के लिये खुशखबरी लेकर आया और उन्हें प्रमोशन मिला, जिसके बाद वह डीजी रैंक के अफसर बने। एस.एन. साबत डीजी कारागार, डीजी सीबीसीआईडी रह चुके हैं। साढ़े तीन दशक का कार्यकाल तक बदन पर खाकी वर्दी पहनकर अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और पीड़ितों को इंसाफ दिलाने वाले एस.एन. साबत 31 दिसंबर 2024 को रिटायर हो गये।
एस.एन. साबत के साढ़े तीन साल के पुलिस अधिकारी के कार्यकाल में उन्हें उनकी मेहनत के इनाम भी समय-समय पर मिलते रहा। एस.एन. साबत को 15 अगस्त 2006 को पीएम, 26 जनवरी 2014 को पीपीएम, 2001 में डीएन पीस मेडल, वर्ष 2011, 2013 और 2014 में डीजी सीआरपीएफ कमांडेशन डिस्क, 15 अगस्त 2016 को डीजी कमांडेशन सिल्वर, 15 अगस्त 2018 को डीजी कमांडेशन गोल्ड, 15 मार्च 2019 को कुंभ सेवा मेडल, 15 अगस्त 2019 को डीजी कमांडेंशन डिस्क प्लेटिनियम, 15 अगस्त 2019 को ही उत्तर प्रदेश चीफ मिनिस्टर अति उत्कृष्ट सेवा पदक और फिर से 15 अगस्त 2023 को उत्तर प्रदेश चीफ मिनिस्टर अति उत्कृष्ट सेवा पदक मिला। उनकी मेहनत के नतीजे के ईनाम के अॅवार्ड की कहानी का दी एंड यही नहीं होता इनके अलावा भी एस.एन. साबत को साहित्यकार के रूप में गोविन्द वल्लभ पंत अॅवार्ड से और उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आंनदीबेन पटेल द्वारा भी उन्हें सम्मानित किया जा चुका है।
आईपीएस अधिकारी से पूर्व आईपीएस अधिकारी हुए तो उससे अगले दिन ही एस.एन. साबत को यूपी में बड़ी जिम्मेदारी मिली। एस.एन. साबत को उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग का अध्यक्ष बनाया गया। अब एस.एन. साबत पांच सालों तक यूपी में अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष के रूप में कार्य करेंगे। एस.एन. साबत ऐसे अधिकारी हैं, जो हमेशा कुछ न कुछ सीखने और लोगों को सही सबक देने के लिये प्रयासरत रहते हैं।