IPS अजय कुमार का Lucky नम्बर 108

मैनपुरी। आईपीएस अजय कुमार का भाग्य बनाने में उनकी मेहनत लग्न और अच्छी सोच के साथ अंक 108 का भी अहम रोल रहा है। ऐसे ही नहीं कहा जाता की तकदीर बनाने में हमारी मेहनत के साथ ईश्वर भी हमारा साथ देते हैं, जब प्रयास सच्चे मन और लग्न से किया जाता है तब ईश्वर साक्षात उसमें हमारी मदद करते हैं और हमारा पद प्रदर्शित करते हैं। कुछ यूं ही आईपीएस अजय कुमार के जीवन में हुआ है। 10 साल की उम्र में पहली बार स्कूल जाने वाले अजय कुमार दसवीं में जिला टॉपर बन गए, जब जिला टॉप कर दिया तब परिवार के लोगों को लगा की अजय कुछ बड़ा कर सकते हैं। वे आईएएस या आईपीएस भी बन सकते हैं, अब अजय कुमार के मन में बीज पड़ गया था कि आईएएस या आईपीएस ही बनूंगा। इंटरमीडिएट की पढ़ाई विज्ञान विषयों से की अब वे इंजीनियरिंग की तैयारी में जी जान से जुट गए। खूब मेहनत की जिसमें दूसरे प्रयास में उन्हें इंजीनियरिंग एडमिशन के रिजल्ट में यूपी में 108 वी रैंक मिल गई। मन प्रसन्न था टॉप कॉलेज एचबीटीआई कानपुर में उन्हें बीटेक मेक्निकल में ऐडमिशन मिला। यह उनके जीवन का अत्यंत महत्वपूर्ण मोड़ था, यहीं से उन्होंने अपने व्यक्तित्व का विकास किया। बीटेक में भी उन्हें गोल्ड मेडल मिला। अब उनके कदम रुकने वाले नहीं थे। गजरौला जुबिलैंट लाइफ साइंसेज व रिलायंस जैसी देश की बड़ी कंपनियों में जॉब किया। 2 साल दुबई में रहे और फाइनेंशली मजबूत होने पर फिर से अपने लक्ष्य को पाने में लग गए। दुबई में रहते हुए रमजान के महीने में 27 वें दिन अचानक ही ख्याल आया कि अब अपने मुल्क जाकर सिविल सर्विसेज एग्जाम क्लियर करूंगा, मानो ईश्वर अल्लाह साक्षात उनको बोल रहे हो कि तेरी जमीन तुझे सेवा के लिए बुला रही है। दिल और दिमाग में बैठा लिया था कि अब आईएएस या आईपीएस ही बनूंगा। दिल्ली आकर मुखर्जी नगर में कोचिंग की और 11 महीने में ही यूपीएससी का एग्जाम क्लियर कर फिर से संयोगवश 108 वी रैंक पर अपने नाम कब्जा किया। यह उनकी मेहनत और कुदरत का साथ ही था की यूपीटीयू और यूपीएससी दोनों में उन्हें 108 वी रैंक मिली। यकीनन यह अजय कुमार की कड़ी तपस्या और ईश्वर के प्रति उनकी अटूट आस्था का ही परिणाम था। वेदो और पुराणों के प्रति उनका दृढ़ विश्वास, सभी के लिए उनकी एक समान दृष्टि और कड़े परिश्रम का परिणाम था कि खुद कायनात के रचयिता ने यूपीएससी के रण में उनका साथ दिया और बुरे से बुरे वक्त में भी उनको न टूटने दिया ना पीछे हटने दिया।
हिंदू धर्म में 108 अंक का बहुत महत्व है। देवी दुर्गा के 108 नाम है, जपमाला भी 108 मनकों की होती है, जिसका 108 बार मंत्र उच्चारण किया जाता है तभी जाप पूर्ण माना जाता है। भगवान श्री कृष्ण की 108 गोपियां थी। पृथ्वी की सूर्य से दूरी सूर्य के व्यास की 108 गुना है मनुष्य के मन में भूत वर्तमान और भविष्य काल से संबंधित भावनाएं होती हैं। हर काल से संबंधित 36 भावनाए होती है जो कुल संख्या 108 है। धर्म ग्रंथों में 108 उपनिषद है। योगा के अनुसार भारत में 108 पीठ और धार्मिक स्थल है। सभी योग और परिणामों को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि ईश्वर ने खुद हर जरूरी मोड़ पर आईपीएस अजय कुमार का पथ प्रदर्शित किया। जीवन के हर जरूरी इम्तिहान में अंक 108 का आना महज इत्तेफाक नहीं है यह आईपीएस अजय कुमार का ईश्वर पर भरोसा और दृढ़ इच्छा शक्ति का फल है आईपीएस अजय कुमार को एहसास भी है कि ईश्वर सदा उनके साथ रहते है।