इंस्पेक्टर कपरवान का क्रिमनलों को रहता है संदेश- NO क्राईम- NO डिस्टर्ब

मुजफ्फरनगर। एनकाउंटर स्पेशलिस्ट और मर्डर मिस्ट्री के मास्टर अनिल कपरवान का सपना अपने पिता की तरह सीमा पर देश की सेवा करने का था। इसी बीच उन्होंने वर्ष 2001 में उत्तर प्रदेश पुलिस की परीक्षा दी, जिसमें उन्हें सफलता मिल गई और वे सब इंस्पेक्टर बन गये। इसके बाद से उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। विभिन्न थानों में तैनात रहते हुए उन्होंने बड़े-बड़े शातिर अपराधियों को जहां 'हेल एक्सप्रेस' में रवाना करने का काम किया, वहीं अनेक बदमाशों को लंगड़ा करके जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया। कानून व्यवस्था को सुदढ़ करना और पीड़ितों को न्याय दिलाना उनका प्रमुख उद्देश्य रहा है। मर्डर मिस्ट्री को सुलझाने के वे मास्टर हैं। अब तक लगभग एक दर्जन ऐसे हत्याकांडों का वे खुलासा कर चुके हैं, जो पुलिस के लिए अबूझ पहेली बनी हुई थी। नो क्राइम-नो डिस्टर्ब को आधार मानकर वे लगातार अपराधियों पर शिकंजा कस रहे हैं। मुजफ्फरनगर के दौरे पर आये डीजीपी को उन्होंने लखटकिया बदमाश को यमलोक पहुंचाते हुए विशेष सलामी दी थी। मुठभेड़ के दौरान वे गोली लगने से स्वयं घायल हो चुके हैं, बावजूद इसके उन्होंने शातिर बदमाश को जहां ढेर कर दिया था, वहीं मौके पर मौजूद भीड़ को खरोंच तक नहीं आने दी थी। इसके अलावा सीएए के विरोध में आई सैकड़ों लोगों की भीड़ जो कि पथराव कर रही थी, उनके बीच वे बिना हेलमेट के पहुंच गये थे। उन्होंने यहां जहां अपनी शालीनता का परिचय दिया था, वहीं निडरता के साथ भीड़ से बातचीत करते हुए आक्रोशित लोगों को समझा-बुझाकर वापिस भेज दिया था। उनकी विशिष्ट कार्यशैली, गुड पुलिसिंग व अदम्य साहस के चलते उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। 2001 बैच के सब इंस्पेक्टर एवं वर्तमान में नई मंडी कोतवाली प्रभारी निरीक्षक अनिल कपरवान के साथ हुई खोजी न्यूज की बातचीत के प्रमुख अंश-

अनिल कपरवान का जन्म उत्तराखंड के एक फौजी परिवार में 12 जून 1976 को हुआ था। वह दो भाई-दो बहन हैं। उनके बडे़ भाई सरकारी ठेकेदार हैं। अनिल कपरवान की प्राथमिक शिक्षा सीबीएसई बोर्ड के केवीएस केन्द्र विद्यालय से हुई है। इंटर की शिक्षा ग्रहण करने के बाद उन्होंने बीए के बाद इतिहास से मास्टर डिग्री हासिल की। उनके पिता ने सीमा पर खड़े होकर वतन की रक्षा की है। अनिल कपरवान का भी सपना था कि वह अपने पिता के पथ पर आगे बढ़ते हुए सीमा पर देश की रक्षा करें। लेकिन 2001 में उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस में सब इंस्पेक्टर के लिये परीक्षा दी, जिसमें वह कामयाब हो गये। वर्ष 2001 से अनिल कपरवान पीड़ितों को न्याय दिलाने व अपराधियों पर नकेल कसने के कार्य में जुटे हुए हैं। अगर अपराधों पर नकेल कसने की बात करें, तो वे अब तक कई अपराधियों को हेल एक्सप्रेस में सवार कर चुके हैं। अनिल कपरवान अब तक 20 सालों की पुलिस सर्विस में गाजियाबाद, नोएडा, बागपत, बुलंदशहर, सहारनपुर में अपराधियों को लंगड़ा कर सलाखों के पीछे डाल चुके हैं। मुजफ्फरनगर में उन्हें तीन साल से ज्यादा वक्त हो चुका है। तत्कालीन एसएसपी अनंत देव ने अनिल कपरवान को शहर कोतवाली का प्रभार सौंपा था। उन्होंने शहर कोतवाली में रहते हुए लगभग एक दर्जन ब्लाईंड मर्डर पर गिरे पर्दे को उठाने का कार्य किया। शहर कोतवाली में उन्होंने बेहतरीन बेटिंग करते हुए अपराधियों को आउट किया है। एसएसपी अभिषेक यादव ने तीन साल पूरे होने पर उनका तबादला नई मंडी कोतवाली में कर दिया है, जहां वे अपने कार्य को बखूबी अंजाम दे रहे हैं।

एक दर्जन ब्लाइंड मर्डर मिस्ट्री का किया खुलासा
अनिल कपरवान ने अधिवक्ता समीर सैफी मर्डर मिस्ट्री को अपनी सूझबूझ से सुलझाया। उन्होंने अपराधी के हर भ्रम जाल को उनका ही दिमाग पढ़कर कतरने का काम किया और आखिरकार असली कातिल पुलिस के जाल में उलझ गया। वहीं उन्होंने वयोवृद्ध महिला सुनीता के ब्लाइंड मर्डर केस का खुलासा किया। पूछताछ में मृतका के बेटे वीशू का बार-बार बयान बदलना पुलिस को भ्रमित कर रहा था, सबको लग रहा था कि वीशू ने ही अपनी मां की हत्या की है। अनिल कपरवाल ने रुड़की रोड स्थित प्रतिष्ठानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और असली कातिल को ढूंढ निकाला। सुनीता की हत्या घर में चोरी के लिए घुसे एक शातिर रिजवान पुत्र अकमल निवासी किदवईनगर ने की थी। अनिल कपरवान की सूझबूझ से इस केस में एक निर्दोष बेटा जेल जाने से बच गया। वहीं उन्होंने हुमा हत्याकांड का मात्र 5 दिनों में खुलासा कर दिया। 13 वर्षीय किशोर जुबेर की मर्डर मिस्ट्री को भी उन्होंने 80 घंटे में सुलझाते हुए आरोपियों को अरेस्ट कर जेल भेजा था। इसके अलावा अवैध सम्बंधों की भेंट चढ़ा 14 वर्षीय दीपक मासूम जुबैर जैसा ही एक अन्य ब्लाइंड केस शहर कोतवाली में आया था। इसका भी उन्होंने अपनी सूझबूझ से खुलासा करते हुए कातिलों को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाने का कार्य किया। मर्डर मिस्ट्री बने सूफी अब्दुल सलाम हत्याकांड का पर्दाफाश करने में भी अनिल कपरवान सफल रहे। वहीं हरियाणा के सपेरे की मुजफ्फरनगर में हुई हत्या भी पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती थी, जिसे अपने अनुभव के आधार पर अनिल कपरवान ने सुलझाया था। दिव्यांग धनबीर की मौत की पहेली को भी अनिल कपरवान ने मर्डर मिस्ट्री बनने से पहले सुलझाया था। इसके अलावा बंद बोरी से मिली आयशा की लाश पुलिस के लिए अबूझ पहेली बनकर रह गया था। इस उलझन को सुलझाने में पुलिस को कई बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा। इंस्पेक्टर अनिल कपरवान ने शिनाख्त के चंद दिनों बाद ही इस केस का भी खुलासा कर दिया था। इसके अलावा तीन अन्य ब्लाइंड मर्डर मिस्ट्री को अपनी विशिष्ट कार्यशैली और सूझबूझ के चलते उन्होंने सुलझाया।

DGP को दी थी लखटकिया सलामी
जनपद के दौरे पर आये पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह का अनिल कपरवान ने ऐसे अंदाज में स्वागत किया था कि वे भी प्रसन्न हो गये थे। डीजीपी के दौरे को लेकर तत्कालीन एसएसपी सुधीर कुमार सिंह के नेतृत्व खाकी पूरी तरह से अलर्ट थी। तत्कालीन शहर कोतवाली के इंस्पेक्टर अनिल कपरवान ने डीजीपी ओपी सिंह को एक लाख के इनामी बदमाश शमीम को जहन्नुम पहुंचाकर सलामी दी थी। इंस्पेक्टर अनिल कपरवान ने कई एनकाउंटर कर अपराध उन्मूलन में कामयाबी हासिल की है। कई बदमाशों को उन्होंने आमने-सामने के टकराव के बाद लंगडा कर जेल भिजवाया है।

पत्थर बरसाते युवाओं के बीच हेलमेट उतारकर पहुंच गये थे कपरवान
सीएए के विरोध में हजारों लोगों की भीड़ को तो एसएसपी अभिषेक यादव और डीएम सेल्वा कुमारी जे ने समझा-बुझाकर शांत कर दिया था। बावजूद इसके कुछ शरारती तत्व मीनाक्षी चौक पर पहुंच गये थे और हंगामा कर दिया था। मीनाक्षी चौक पर भीड़ बढ़ने एवं छुटपुट पथराव की घटना की सूचना पर अनिल कपरवान मीनाक्षी चौक पहुंचे तो भीड़ पथराव कर रही थी, कोई पुलिस की बात सुनने को तैयार नहीं था। लेकिन अपनी फेयर पुलिसिंग और निडरता के चलते अनिल कपरवान पत्थर बरसाते युवाओं के बीच हेलमेट उतार कर पहुंच गये और उनके आक्रोश का जवाब अभिभावक की भांति सम्मान और शांति से दिया। अनिल कपरवान की इस शालीनता का परिणाम कुछ ही मिनटों में सामने आ गया और भीड़ शांत हो गई। इसके बाद पुलिस और भीड़ के बीच संवाद हुआ और कुछ ही देर में भीड़ शांत होकर अपने घरों को लौट गई। यह अनिल कपरवान की शालीनता और अदम्य साहस का परिचायक है कि वह उग्र होती भीड़ के बीच बिना हेलमेट के पहुंच गये और उन्हें समझा-बुझाकर शांत भी कर लिया।

अनिल कपरवान को भी लगी थी गोली
अनिल कपरवान वर्ष 2009 में गाजियाबाद जनपद के मोहननगर थाने के एसएचओ थे। उस समय उनकी मुठभेड़ 50 हजार के इनामी बदमाश रविन्द्र प्रमुख व उसके अन्य साथियों के साथ हो गई थी। एमएम एक्स माॅल के सामने हुई इस मुठभेड़ में रविन्द्र प्रमुख को अनिल कपरवान ने ढेर कर दिया था। भारी भीड़ के बीच हुई इस मुठभेड़ में जहां अनिल कपरवान गोली लगने से घायल हुए थे, वहीं दो सिपाही भी गोली लगने से घायल हो गये थे। इसमें से एक सिपाही परमजीत शहीद हो गया था। भारी भीड़ के बीच जहां बदमाशों को पकड़ना अनिल कपरवान के लिए बहुत बड़ी चुनौती थी, वहीं इससे भी बड़ा काम यह था कि इसकी आंच किसी भी नागरिक पर न आये। इसी के चलते उन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए आम नागरिकों की जहां रक्षा की, वहीं बदमाश को भी ढेर कर दिया था।

NO क्राईम- NO डिस्टर्बः अनिल कपरवान
इंस्पेक्टर अनिल कपरवान ने अपराधियों को कड़ा संदेश दिया है कि वे किसी भी हालत में अपराध न करें। यदि वे अपराध करेंगे, जनता को डिस्टर्ब करेंगे, तो उनकी बख्शीश किसी भी हालत में नहीं होगी। इंस्पेक्टर अनिल कपरवान अपराधों पर अंकुश लगाने में इसी नीति के तहत सफल भी हुए हैं। इंस्पेक्टर अनिल कपरवान का कहना है कि यदि कोई अपराधी अपराध करेगा, तो फिर उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जायेगी। जनता को डिस्टर्ब करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जायेगा।