जो जांच 60 दिन में पूरी करनी थी, उसमें हांसी पुलिस ने लगा दिए 5 साल

हिसार। हरियाणा के हिसार के भाटला गांव में कथित रूप से दबंगों के दबाव के कारण दो दलितों की आत्महत्या की घटना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के एक पांच साल पुराने मामले में हांसी पुलिस ने आज जांच रिपोर्ट अदालत में दाखिल की।
गैर सरकारी संस्था नेशनल अलायंस ऑफ दलित ह्यूमन राईट्स (एनएडीएचआर) के संयोजक और एडवोकेट रजत कल्सन, जो विरोध प्रदर्शन के मामले में आरोपी भी हैं, ने बताया कि 24 अगस्त 2015 में भाटला गांव में दलित समुदाय से ताल्लुक रखने वाले बदन सिंह ने आत्महत्या कर ली थी। उससे कुछ दिन पहले 7 अगस्त को उसके भतीजे गुरबचन ने भी आत्महत्या की थी। आरोप है कि गुरबचन ने दबंगों के दबाव के कारण आत्महत्या की थी तथा बदन सिंह उस मामले में गवाह था। पुलिस ने गुरबचन सिंह की आत्महत्या के मामले में कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की थी। बदन सिंह की आत्महत्या के बाद ग्रामीणों ने उनके शव के साथ सिविल अस्पताल हांसी में डेरा डाल दिया था। दो दिन तक सिविल अस्पताल हांसी के पार्क में श्री कलसन के नेतृत्व में प्रदर्शन किया था। इस प्रदर्शन को लेकर पुलिस ने श्री कलसन, अजय भाटला, विकास भाटला, सुनील दाहिया, पूर्व जिला पार्षद सुरेंद्र गहलोत, अमरचंद के खिलाफ रास्ता जाम करने, गैर कानूनी तरीके से भीड़ इकट्ठी करने व पुलिस की ड्यूटी में बाधा पहुचाने जैसी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था।
एडवोकेट कलसन ने बताया कि इस प्रकरण में आज पुलिस ने अपनी अंतिम रिपोर्ट अदालत में पेश की, जहां पर सभी आरोपियों को अदालत ने 50000 रुपए के मुचलके पर जमानत दे दी।
एडवोकेट कलसन ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता के मुताबिक इन धाराओं में 60 दिन के अंदर पुलिस को जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट अदालत में पेश करनी होती है, लेकिन हांसी पुलिस ने इस मामले की जांच में पूरे पांच साल से अधिक का वक्त लगा दिया।