खाकी की बनाई स्वच्छ छवि- मानवता के लिए भी बने नज़ीर- कौन है ये IPS अजय

खाकी की बनाई स्वच्छ छवि- मानवता के लिए भी बने नज़ीर- कौन है ये IPS अजय

नोएडा। साल 2011 बैच के तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी अजय कुमार पांडेय शामली, फिरोजाबाद, प्रयागराज, मैनपुरी सहित कई जिलों के कप्तान रह चुके हैं। आईपीएस अधिकारी किसी भी जिले के कप्तान रहे हों, वहां पर उन्होंने अपनी तैनाती के दौरान पब्लिक में खाकी प्रति पब्लिक में साफ-स्वच्छ बनाकर रखी। आईपीएस अधिकारी का स्पष्ट मैसेज रहा कि अगर कोई भी अपराध करेगा तो उसे उसका अंजाम भुगतना पड़ेगा, इसमें चाहे कोई आम इंसान हो या फिर कोई पुलिसकर्मी। अगर कोई पुलिसकर्मी किसी को अपराध करने के लिये बढ़ावा देगा तो उसे भी उसका किया हुआ भुगतना पड़ेगा। क्राईम कंट्रोल करते हुए कानून व्यवस्था को मजबूत बनाये रखना, महिला के सुरक्षा, पीडित को इंसाफ दिलाना, अपराधी को जेल पहुंचाना, दागी पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई करना या फिर हो मानवता की मिसाल पेश करना हो, कहीं भी खाकी का नाम रोशन करने में आईपीएस अजय कुमार पांडेय ने कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी। आईपीएस अधिकारी शामली जिले में शिवभक्तों की सेवा करने में प्रशंसा पाई और शामली में ई-रिक्शा चालक फरियाद, प्रयागराज में महिला की फरियाद चलते वक्त भी सुनने का फोटो वायरल हुआ तो जनता में वाहवाही बटोरी। प्रयागराज में 134 दागी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई कर खाकी का साफ-स्वच्छ बनाये रखा था। फिरोजाबाद में आईपीएस अजय कुमार के कार्यकाल में 5 करोड रूपये का गांजा बरामद किया गया था। आईपीएस अजय कुमार पांडेय का शासन ने हाल ही में सेनानायक, 32वी वाहिनी पीएस, लखनऊ से प्रभारी अपर पुलिस आयुक्त, मुख्यालय, कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर के पद पर भेजा हैं। आईपीएस अजय कुमार पांडेय पर पेश है खोजी न्यूज की खास रपट...


गौरतलब है कि बस्ती जिले के देवापार गांव निवासी वंशबहादुर पांडेय के यहां 12 मार्च 1981 को जन्में अजय कुमार आज की तारीख में एक तेजतर्रार पुलिस अधिकारी है, वे ना केवल अपनी सधी हुई पुलिसिंग के मास्टर है बल्कि मानवता से जुडे कार्यों में भी सक्रिय रहते है। बस्ती हेडक़्वार्टर से करीब 8 किमी की दूरी पर स्थित देवापार छोटा सा गांव है, जो अजय कुमार के बचपन के समय में ज्यादा विकसित नहीं था। किसान परिवार में पले-बढ़े अजय की सफलता सभी ग्रामीण परिवेश के युवाओं को भी सीख देती है कि चुनौतियों से डटकर सामना करे, साधनों के अभाव को मुद्दा न बनाये। छः भाईयों में 5वें नम्बर के अजय ने 10 साल की उम्र में स्कूल की शुरूआत की, क्योंकि बचपन में जब गये तो इत्तेफाक से पहले ही दिन शिक्षक की मार का डर उनके जहन में बैठ गया। मानों स्कूल से मोहभंग हो गया था। पढाई में अजय शुरूआत से ही अव्वल थे। चौथी क्लास तक की पढ़ाई उनके ताऊजी ने उन्हे घर रहते ही कराई। 5वीं से स्कूल में जाने लगे ओर 6वीं, 7वीं व 8वीं कक्षा में लगातार स्कूल टॉप किया, अब हौसला बढ़ गया था।

दसवीं में जिला टॉप कर दिया, इसके पीछे उनकी मेहनत ही थी रोज 7 किमी चलकर जाना और आना कठिन था। दसवीं में जब जिला टॉप कर दिया, अब सब कहने लगे थे कि अजय आईएएस आईपीएस बन सकता है। यहीं से अजय के मन में सिविल सर्विस का बीज पड गया था। इण्टरमीडिएट तक की पढाई कृषक इंटर कॉलेज से पूरी की, ये दौर उनके लिए परिश्रम से भरा रहा। कडी मेहनत से इंजीनियरिंग का इम्तिहान क्लीयर किया। एचबीटीआई कानपुर से इंजीनियरिंग किया। इंजीनियरिंग में उन्हे एल.जी. कम्पनी द्वारा 27 पैरामीटरों पर आंका गया, जिसमें उन्हे बेस्ट स्टूडेंट के लिए गोल्ड मेडल से नवाजा गया। कंपनी ने उन्हे तमाम पैरामीटर में आंका और माना की वे हर फील्ड में अव्वल है। देश की बडी कंपनियों जैसे रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और गजरौला जुबीलेंट लाइफ सांइसेज में जॉब किया। यहीं से उन्होने प्लानिंग करना सीखा, फिर दो साल दुबई में रहे और अब समय आ गया था सिविल सर्विसेज की तैयारी करने का, दुबई की जॉब छोड़कर दिल्ली पहुंचे और साम-दाम-दंड-भेद सब के साथ यूपीएससी की तैयारी में जुट गये। 11 महीने के भीतर उन्होंने यूपीएससी का एग्जाम आल इंडिया 108 वीं रैंक से क्लीकर कर दिया। बचपन का सपना साकार हो गया था।


ग्रामीण परिवेश में रहकर सिविल सर्विसेज में जाने का सपना देखना ओर फिर उसे अपनी मेहनत के बलबूते साकार कर दिखाना किसी आम के लिए आसान तो नहीं पर नामुमकिन भी नहीं है। ये बात आईपीएस अजय कुमार पर बिल्कुल सटीक बैठती है। अजय कुमार कहते है अपनी नाकामियों के लिए माँ-बाप और संसाधनों को दोष नहीं देना चाहिए, अजय कुमार अपनी कमियाँ की डायरी बनाते थे और फिर उन्हें दूर करते थे। यह सफर अजय के लिए आसान तो नहीं था, चुनौतियाँ भी थी, पर सही दिशा में बढ़ते हुए उन्होंने अपने लक्ष्य को हासिल किया। अजय कुमार ने लक्ष्य बनाने के साथ उसे पाने की भूख भी अपने अंदर कायम रखी और बन गये अपने गांव से पहले आईपीएस अधिकारी। उनकी सफलता उनके गांववासियों और जिले के लिए प्रेरणा से पूर्ण है। कई युवा उनको आज आदर्श मानकर तैयारी में जुटे हुए हैं। उनकी जिंदगी का हर पड़ाव चुनौतियों से भरा रहा। सफलता हासिल करने के लिए उन्होंने कोई शॉर्टकट नहीं लिया, बल्कि निरन्तर उसके लिए प्रयासरत रहे। क्रमशः जीवन के हर रोल को उन्होंने बखूबी निभाया।

जब अजय ने दागी पुलिसकर्मियों को आउट कर खाकी को रखा था साफ व स्वच्छ

आईपीएस अधिकारी अजय कुमार शामली, फिरोजाबाद, मैनपुरी, हरदोई, प्रयागराज जैसे जिलों में सुपीरियर पुलिसिंग कर चुके हैं। आईपीएस अधिकारी अजय कुमार की पोस्टिंग का शामली जिला हो या इलाहाबाद या हो फिर कोई अन्य जिला, वहां दागी पुलिसकर्मियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करते खाकी का साफ-स्वच्छ रखने का काम किया। आईपीएस अधिकारी का प्रयास रहा है कि वह पीड़ित की समस्या को सुनकर बारिकी से मामले की जांच कराकर उसका समाधान किया जाये। आईपीएस अफसर अजय कुमार ने प्रत्येक जिले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेस नीति के तहत क्राईम कंट्रोल के उद्देश्य से अपराध को बढ़ावा देने एवं पब्लिक से बुरा बर्ताव करने वाले पुलिस अधिकारियों व पुलिसकर्मियों की बख्शीश नहीं की। अगर सिर्फ प्रयागराज की बात की जाये तो आईपीएस अफसर अजय कुमार ने एसएसपी के रूप में अपने 131 दिन के कार्यकाल में 133 पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर व सस्पेंड किया था, जिसमें प्रयागराज के तत्कालीन एसएसपी अजय कुमार ने 4 निरीक्षकों, 23 उपनिरीक्षकों, 1 मुख्य आरक्षी और 16 सिपाही को मिलाकर कुल 44 पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर और 7 थानाध्यक्षों, 28 सब इंस्पेक्टरों, 16 मुख्य आरक्षियों और 36 सिपाहियों के साथ ही एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को सस्पेंड किया था। आईपीएस अधिकारी अजय कुमार ने जो बोला वह कर दिखाया क्योंकि आर्ठपीएस अधिकारी ने उस दौरान प्रयागराज एसएसपी का चार्ज ग्रहण करते हुए मैसेज दिया था कि अगर अपराध को बढ़ावा या जनता के साथ कुशल व्यवहार नहीं किया जायेगा तो ऐसे पुलिस अधिकारी व पुलिसकर्मी की बख्शीश नहीं की जायेगी।


शामली में हुई थी खूब वाह-वाह, पब्लिक बोली थी- अजय जैसा सेवक अफसर हमने आज तक नहीं देखा

गौरतलब है कि वर्ष 2019 में कांवड़ यात्रा के दौरान शामली के तत्कालीन एसपी अजय कुमार पांडेय को एक चिकित्सा शिविर के उद्घाटन के लिये स्पेशल तौर पर बुलाया गया था। जब आईपीएस अजय कुमार उद्घाटन करने के लिये वहां पर पहुंचे तो उन्होंने कई शिवभक्तों को वहां पर बुरी तरह से थके हुए देखा। चिकित्सा शिविर का उद्घाटन करने के बाद आईपीएस अफसर अजय कुमार पांडेय ने घायल शिवभक्तों की बेड पर लिटाकर उनकी फुट मसाज की। शामली के तत्कालीन एसपी अजय कुमार पांडेय ने उस दौरान कहा था कि अगर मुझे कोई भी शिवभक्त घायल हैं तो मुझे उसकी सेवा करने में कोई गुरेज नहीं है। उस वक्त आईपीएस अफसर अजय कुमार पांडेय के इस कार्य की चहुंओर प्रशंसा होती दिखाई दी थी। अपने जिले के पुलिस कप्तान को देखकर शामली जिले के पुलिस, प्रशासनिक लोग, समाजसेवी भी शिवभक्त की सेवा करने में फिर पीछे नहीं रहे। जब यह वीडियो शामली पुलिस के सोशल मीडिया ट्विटर अकाउंट पर डाला गया तो लोगों ने आईपीएस अफसर अजय कुमार पांडेय की खूब प्रशंसा की। सोशल मीडिया पर वायरल हुई वीडियो में आईपीएस अजय कुमार पांडेय एक चेयर पर बैठे हैं, उनकी बराबर में एक बेड पर शिवभक्त लेटा हुआ है और उनके आस-पास कई लोग भी नजर आ रहे हैं। वीडियो में साफ तौर पर दिखाई दे रहा कि आईपीएस अफसर अजय कुमार पांडेय शिवभक्त की सेवा करते हुए यानी उनकी फुट मसाज कर रहे हैं। इसके अलावा भी एक वीडियो वायरल हुई थी। आईपीएस अफसर अजय कुमार जिस तरीका से शिवभक्तों की सेवा कर रहे थे, उन्हें देखकर लोग कह रहे थे कि किसी अफसर को हमने इस तरीके से सेवा करते हुए कभी नहीं देखा।


मानवीय पुलिसिंग के लिये भी जाने जाते हैं आईपीएस अजय कुमार

जनता आईपीएस अजय कुमार पांडेय की ऐसे ही नहीं तारीफ करती है, बल्कि उन्होंने मानवता, संवदेनशीलता के साथ लोगों की सेवा करके उनका दिल जीतने का काम करते हैं। जब अजय कुमार शामली जनपद के कप्तान थे तब भी ऐसा ही एक मामला मानवता व संवेदनशीलता की नई मिसाल पेश करता पहला वाकया बीते 6 सितम्बर को सामने आया था। हुआ यूं था कि एसपी अजय कुमार अपने कार्यालय का काम निपटाने के बाद करीब 1 बजे अपनी गाड़ी में बैठ कर निकले ही थे, कि कार्यालय से करीब 1 किलोमीटर जाने के बाद उन्हें एक ई-रिक्शा अपने कार्यालय की ओर आता हुआ दिखायी दिया, जिसमें एक वृद्ध दम्पति बैठे थे। उनके हाथ में एक कागज था, जिसको थामे वे एसपी की तरफ इशारा कर ही रहे थे। कार में बैठे हुए तत्कालीन एसपी शामली अजय कुमार की नजर उन पर पड़ी तो उन्हें यह समझते देर न लगी कि ये वृद्ध दम्पति फरियादी हैं और अपनी किसी समस्या को लेकर उनसे मिलने उनके दफ्तर ही जा रहे हैं। उन्होंने तुरंत अपनी सरकारी कार रुकवाई और बिना किसी से कुछ बोले जल्दी से गाड़ी से उतरे और लम्बे-लंबे डग भरते हुए वृद्ध दम्पति तक पहुंच गये। उनको देखकर वृद्ध दम्पति की बूढ़ी आँखें आशा व विश्वास की किरणों से चमक उठीं। आईपीएस अजय कुमार ने भी वहीं खड़े-खड़े मौके पर ही उनकी पूरी बात सुनकर उनके प्रार्थना पत्र सम्बन्धित को कार्यवाही के लिए आदेश कर दिये और फिर अपने रास्ते चल पडे। जिसने भी इस मंजर को देखा, बस वाह-वाह कर उठा था। इसके अलावा जब आईपीएस अजय कुमार की प्रयागराज में पोस्टिंग थी तो उस वक्त वह 15 मई 2022 को अपने दफतर में बैठकर अपने निर्धारित समय से कार्यालय से बाहर आये तो एक महिला फरियादी ने अपनी आपबीती बतायी। इस पर इस चिलचिलाती धूप में प्रयागराज के तत्कालीन एसएसपी अजय कुमार पांडेय ने अपनी कार की बोनट पर ही उसका पत्र लेकर संबंधित को आदेश जारी किया। तत्कालीन एसएसपी अजय कुमार की इस कार्यशैली की प्रयागराज में जमकर प्रशंसा हुई थी।

पांच करोड़ रूपये का गांजा किया था बरामद- तस्करों को भेजा था जेल

फिरोजाबाद के तत्कालीन एसपी अजय कुमार पांडेय के निर्देशन में थाना एका व स्पेशल टास्क स्क्वायड टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए तस्करों की घेराबंदी करते हुए उनके कब्जे से 16 क्विंटल हाई क्वालिटी का गांजा बरामद किया था। पुलिस ने इस मामले में हाथरस निवासी कुख्यात अपराधी और गैंग लीडर नेपाल लोधी, जनपद एटा निवासी प्रेमपाल लोधी तथा जनपद फिरोजाबाद निवासी विनय लोधी को गिरफ्तार किया था। बताया गया था कि गांजा उड़ीसा राज्य के गजपति जिले से तस्करी कर आपूर्ति के लिए पंजाब के लुधियाना ले जाया जा रहा था। पुलिस द्वारा बरामद किए गए हाई क्वालिटी गांजे की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 5 करोड़ से भी ज्यादा है।

50 लाख की लूट का खुलासा कर 100 प्रतिशत माल कराया था बरामद

मैनपुरी के एसपी के रूप में आईपीएस अजय कुमार पांडेय ने दो टीमों को लगाकर 50 लाख की लहसन की लूट का खुलासा कर 100 प्रतिशत माल बरामद कराया था। 17 दिसम्बर 2019 की रात को कन्नोज के गुरसहायगंज के रेलवे क्रोसिंग पर 50 लाख लहसुन से भरे ट्रक को लूट लिया था। बदमाश चालाक-परिचालाक को औंछा क्षेत्र में फेंककर भाग गये थे। चालाक-परिचालाक थाने पहुंचे और उस ट्रक लूट का मुकदमा औंछा पुलिस दर्ज किया था। पुलिस ने अरेस्ट किये गये आरोपी विकास ने जानकारी थी दी कि सुनील उर्फ सेठी पुत्र छोटेलाल निवासी नगला कांदर थाना एलाऊ, सेन्टा उर्फ अरविंद पुत्र रघुनाथ सिंह निवासी गुलाबपुर थाना दन्नाहार, मोहित पुत्र अनिल यादव निवासी नगला हार थाना औंछा ने इस घटना की साजिश की थी। विकास को कुछ रुपये देने का लालच देकर घटना में शामिल किया गया था। अरेस्ट किये गये अभियुक्त को पुलिस ने जेल भेज दिया था।

10 लाख की मांगी थी रंगदारी- आईपीएस अजय ने किसान को कराया था सकुशल बरामद

फिरोजाबाद के तत्कालीन एसएसपी अजय कुमार के नेतृत्व में पुलिस ने जाबांज कार्रवाई करते हए अपह्त किसान को बरामद किया था, जिससे 10 लाख रूपये की रंगदारी मांगी गई थी। मूल रूप से आगरा निवासी कैलाश पुत्र फौरन सिंह अपने परिवार के साथ वर्तमान में फिरोजाबाद के टूंडला क्षेत्र में रह रहे थे। 24 फरवरी की दोपहर को कैलाश का नेशनल हाईवे से कार सवार तीन बदमाशों ने अपहरण कर लिया था। इस मामले में कैलाश की पत्नी रेखा ने पुलिस को तहरीर देते हुए कार्रवाई की गुहार लगाई थी। बदमाशों ने कैलाश की पत्नी रेखा को फोन कर दस लाख रुपये की फिरौती मांगी थी। इसकी जानकारी रेखा द्वारा पुलिस को दी गई थी। तत्कालीन एसएसपी अजय कुमार ने अपहरणकर्ताओं की अरेस्टिंग के लिए पांच टीमों का गठन किया था। अगवा किये गये किसान कैलाश को सकुशल बरामद कर आरोपियों मुकेश बघेल और ब्रजकिशोर बघेल को अरेस्ट कर लिया था। तत्कालीन एसएसपी अजय कुमार के निर्देशन में खाकी ने जिस प्रकार से अपहृत को सकुशल बरामद किया, क्षेत्र में खाकी की वाहवाही हुई थी।

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