अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी का निधन

अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी का निधन

श्रीनगर। कट्टरपंथी हुर्रियत कांफ्रेंस के पूर्व अध्यक्ष सैयद अली शाह गिलानी का लंबी बीमारी के बाद बुधवार की रात यहां निधन हो गया। वह 92 वर्ष के थे।




अलगाववादी नेता के परिवार में दो बेटे एवं चार बेटियों के अलावा कई पोते-पोतियां एवं नाती और नातिन हैं।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि श्रीनगर में एहतियात के तौर पर गुरुवार को प्रतिबंध लगायी जा सकती हैं।

गिलानी के पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि उन्होंने श्रीनगर के बाहरी इलाके हैदरपोरा स्थित

आवास पर आखिरी सांसें लीं।

उत्तर कश्मीर के बारामूला जिले के सोपोर में जन्मे गिलानी ने शुरूआती शिक्षा सोपोर में ग्रहण की तथा लाहौर के ओरियंटल कॉलेज में अपनी शिक्षा पूरी की।

पाकिस्तान समर्थक माने जाने वाले गिलानी ने बाद में जमात-ए-इस्लामी में शामिल हो गये तथा सोपोर निर्वाचन क्षेत्र से 1972, 1977 और 1987 में विधान सभा में पार्टी का प्रतिनिधित्व किया।

वह तहरीक-ए-हुर्रियत के संस्थापक थे तथा बाद में हुर्रियत कांफ्रेंस को छोड़ कर उन्होंने अपना हुर्रियत कांफ्रेंस (गिलानी) का गठन किया। इसी संगठन का एक अन्य समूह को नेतृत्व मिरवाइज मौलवी उमर फारूक कर रहे थे।

गिलानी को देशद्रोह के आरोप में कई बार जेल भेजा गया तथा उन्हें देश के विभिन्न जेलों में रखा गया।

जब पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी ने कांग्रेस के साथ गठबंधन कर सरकार का गठन किया था तब उस सरकार ने लंबे समय तक हिरासत में रहे गिलानी को मुक्त कर दिया था।

गिलानी का पासपोर्ट उनकी राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के कारण 1981 में जब्त कर लिया गया था। वर्ष 2006 में उनके पक्ष में एक अल्पकालिक पासपोर्ट जारी होने के बाद उन्हें हज यात्रा करने की अनुमति दी गई थी।

उनकी मृत्यु के बारे में पिछले कुछ वर्षों के दौरान 12 से अधिक बार अफवाहें फैलाई गईं। हालांकि, पुलिस प्रवक्ता किसी भी कानून-व्यवस्था की समस्या को रोकने के लिए ऐसी अफवाहों का खंडन करते रहे थे।

गिलानी ने राजनीति सहित विभिन्न विषयों पर एक दर्जन से अधिक पुस्तकें भी लिखीं।

पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा कि गिलानी के निधन की खबर सुनकर उन्हें दुख हुआ है।

सुश्री महबूबा ने ट्विटर पर कहा,"गिलानी साहब के निधन की खबर से दुखी हूं। हम ज्यादातर बातों पर सहमत नहीं हो सकते हैं, लेकिन मैं उनकी दृढ़ता और उनके विश्वासों के साथ खड़े होने के लिए उनका सम्मान करती हूं। अल्लाह तआला उन्हें जन्नत और उनके परिवार और शुभचिंतकों के प्रति संवेदनाएं प्रदान करें।"

वार्ता

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