किसान आंदोलनः कृषि कानून के विरोध में रोकेंगे रेल- राकेश टिकैत

नई दिल्ली। कृषि बिलों के विरोध में अब किसानों द्वारा रेल रोकने का ऐलान किया गया है। गाजीपुर बाॅर्डर पर चल रहे आंदोलन से किसानों की गिनती लगातार घटने से एक बार फिर से आंदोलन की धार कम पड़ने लगी है। आंदोलन को धार देने के लिए अब रेल रोकने की योजना बनाई गई है।
भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत के आंसुओं के बाद किसान आंदोलन ने एक बार फिर से धार पकड़ ली थी। मुजफ्फरनगर, बागपत, बिजनौर आदि जनपदों में हुई महापंचायतों में किसानों का हुजूम उमड़ पड़ा था। लेकिन अब धीरे-धीरे फिर से आंदोलन की धार कम होती जा रही है। सिंधू बाॅर्डर, गाजीपुर बाॅर्डर व टीकरी बाॅर्डर पर जो किसान आंदोलन चल रहा था, वहां से अब धीरे-धीरे करके किसानों की संख्या घटती जा रही है। जहां खचाखच किसानों की भीड़ दिखाई देती थी, वहां अब वीरानी सी नजर आने लगी है। किसानों की घटती संख्या राकेश टिकैत के लिए चिंता का सबब बनी हुई है। आंदोलन को धार देने के लिए राकेश टिकैत ने अब रेल रोको आंदोलन की घोषणा की है। राकेश टिकैत ने कहा कि 18 फरवरी को किसान बड़ी संख्या में रेल रोककर कृषि अध्यादेशों का विरोध करेंगे। उन्होंने कहा कि रेल कैसे रोकनी है, उसकी व्यवस्था किसान स्वयं देख लेंगे। उन्होंने बताया कि दोपहर लगभग 3 बजे तक ट्रेनों को रोका जायेगा। रेल रोके जाने से आम नागरिकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
बाॅर्डरों पर चल रहे आंदोलन से किसानों की संख्या लगातार घट रही है, इस बात को राकेश टिकैत ने स्वीकार भी किया है। उन्होंने कहा कि दो दिनों का विवाह का बहुत बड़ा साया है। किसानों के परिवार में शादी-ब्याह है, इसलिए किसान समारोह में सम्मिलित होने के लिए गये हैं। समारोह में सम्मिलित होने के बाद वे वापिस लौट आएंगे। उन्होंने कहा कि एक गांव से एक ट्रैक्टर आयेगा। गांव से 15 आदमी आयेंगे जो कि तीन दिन रहेंगे। इसी प्रकार क्रम चलता रहेगा। 'कल किसान रेल रोकेंगे' यह हैशटेग सोशल मीडिया पर भी ट्रेंड हो रहा है।