जम्मू-कश्मीर के लिए आर्थिक पैकेज बताया एक मजाक : एनसी

श्रीनगर। नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) ने जम्मू-कश्मीर में लघु, कुटीर और अन्य छोटे कारोबार से जुड़े लोगों को प्रोत्साहन देने के लिए केन्द्र सरकार की ओर से घोषित किए गए 1350 करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज को एक भद्दा मजाक करार देते हुए रविवार को कहा कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को 45,000 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है जिसकी भरपाई करने के लिए यह पैकेज बेहद कम है।
एनसी के प्रवक्ता इमरान नबी डार ने कहा, " जम्मू-कश्मीर के लिए घोषित किया गया तथाकथित आर्थिक पैकेज केवल लोगों की आंखों में धूल झोकने का ही कार्य है।"
इमरान नबी डार ने कहा, "घाटी में पिछले वर्ष पांच अगस्त से जारी प्रतिबंधों और अब कोरोना वायरस (कोविड-19) महामारी के कारण लागू लॉकडाउन ने जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ कर रख दी है। जम्मू-कश्मीर की विभिन्न आर्थिक संगठनों की ओर जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक केन्द्र शासित प्रदेश की अर्थव्यवस्था को 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है, जिसकी भरपाई करने के लिए 1350 करोड़ रुपये का आर्थिक पैकेज बेहद कम है।"
एनसी प्रवक्ता ने कहा कि आर्थिक पैकेज के एक बड़े हिस्से का उपयोग बिजली और पानी के बिलों को माफ करने में होगा यह भी लोगों को गुमराह करने वाला है। वास्तव में सरकार ने केवल औद्योगिक इकाइयों को ही समझौते के तहत मूल बिल पर 50 प्रतिशत की छूट दी है। स्थानीय औद्योगिक इकाइयों के लाखों रुपये के बिल हैं जो वह नहीं भर सकते, इसका उन्हें कोई लाभ नहीं मिल रहा है। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत केन्द्र शासित प्रदेश में लघु, कुटीर और अन्य छोटे कारोबार से जुड़े लोगों को प्रोत्साहन देने के लिए 1350 करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज की घोषणा की है। इसके अलावा केन्द्र शासित प्रदेश की आम जनता को बड़ी राहत देते हुए सिन्हा ने एक वर्ष के लिए बिजली और पानी के बिलों पर 50 प्रतिशत की छूट देने का भी शनिवार को एलान किया।
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