वायु प्रदूशण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

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नई दिल्ली। प्रदूषण को लेकर आईक्यू एयर विजुअल द्वारा कराए गए विश्व वायु गुणवत्ता 2019 सर्वे के मुताबिक, गाजियाबाद दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर है। गाजियाबाद में कई इंडस्ट्रियल एरिया होने के कारण शहर बुरी तरह से प्रदूषण की चपेट में आ चुका है। प्रदूषण के मामले में राजधानी दिल्ली का दुनिया में पांचवें स्थान पर है। अन्य देशों के बड़े शहर भी प्रदूषण की समस्या से जूझ रहे हैं। गाजियाबाद के बाद चीन का होटन, पाकिस्तान का गुजरांवाला और फैसलाबाद का नंबर है।

एक रिसर्च से पता चला है कि वायु प्रदूषण पृथ्वी पर हर पुरुष, महिला और बच्चे की आयु संभाविता यानी लाइफ एक्सपेक्टेंसी को लगभग दो साल घटा देता है। रिसर्च का दावा है कि वायु प्रदूषण 'मानव स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा खतरा है।' वायु प्रदूषण की भयावकता के मद्देनजर 10 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण को लेकर केंद्र सरकार, दिल्ली और पंजाब से जवाब तलब किया है। प्रदूषण की समस्या पर दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि सभी प्रदूषण वाले हॉटस्पॉट के लिए कार्य योजना बनाई गई है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमने देखा है कि कुछ हॉटस्पॉट आकार में कम हो गए हैं लेकिन प्रदूषण पूरी तरह से कम नहीं हुआ है। दिल्ली के मुख्य सचिव ने कोर्ट में कहा कि हमने ट्रैफिक, भीड़, खुले में कचरे आदि को कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं। जिला आयुक्तों से व्यक्तिगत रूप से कदम उठाने के लिए कहा गया है। अभी लॉकडाउन के कारण वायु प्रदूषण कम है एक्यूआई 100 पर है लेकिन हम आने वाले दिनों में कार्रवाई जारी रखेंगे। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार से कहा कि अगर आप इस समस्या पर गंभीरता से ध्यान नहीं देंगे तो पराली और इसके निपटान की समस्या हमेशा बनी रहेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि जिन उद्योगों से पंजाब और अन्य राज्यों में सबसे ज्यादा प्रदूषण बढ़ रहा है उनके बारे में पंजाब सरकार क्या कदम उठा रही है? पंजाब के प्रमुख सचिव को हलफनामा देना होगा। शीर्ष कोर्ट ने पंजाब सरकार से पूछा कि रिपोर्ट, सिफारिशों और गाइडलाइन का पालन न करने वाले उद्योगों में से कितनों का चालान किया। दंड लगाया या अन्य निरोधात्मक कार्रवाई की? सिर्फ कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है, कहने से क्या होगा? रिपोर्ट बताती है कि 2279 उद्योगों का सर्वे हुआ जिनमें से 243 उद्योग मनमानी करते हुए पकड़े गए. उनके खिलाफ सरकार ने क्या कार्रवाई की ये भी हलफनामे में बताना होगा। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि हम केरोसिन से चलने वाले वाहनों को रोकने और जब्त करने के लिए नियमों, कानून के निर्माण पर केंद्र की भागीदारी चाहते हैं। यह एक भयावह बात है। इन वाहनों को जब्त किया जाना चाहिए। अगर इसकी अनुमति रही तो चीजें कभी नहीं सुधरेंगी।

प्रदूषण इंसानी सेहत के लिए एक बहुत बड़ी समस्या बनता जा रहा है। उसके बहुत से कारण हैं। हवा में प्रदूषण का एक कारण कुदरती जरिया है उड़ती हुई धूल। कारखानों के परिचालन या जंगल की आग से तमाम किस्म के हानिकारक कण हवा में दाखिल हो जाते हैं, जिनसे पर्यावरण में प्रदूषण फैलता रहता है। जब जंगल में आग लगती है तो उससे जंगल जलकर राख हो जाते हैं और यही राख जब हवा में दाखिल होती है तो प्रदूषण फैलाती है। दूसरी सबसे बड़ी वजह आबादी का बढ़ना और लोगों का खाने-पीने और आने-जाने के लिए साधन उपलब्ध करवाना है जिसकी वजह से स्कूटर, कारों और उनके उद्योगों का बढ़ना, थर्मल पावर प्लांट का बढ़ना, कारों की रफ्तार का बढ़ना, प्राकृतिक पर्यावरण में बदलाव का होना है। आबादी बढ़ने से प्रदूषण भी काफी तेजी से बढ़ रहा है। प्रदूषण चाहे पानी की वजह से हो या हवा की वजह से, इसने इंसान के स्वास्थ्य को तबाह कर दिया है। इस प्रदूषण की वजह से किसी को कैंसर है तो किसी को शुगर या हृदय रोग। जब आबादी बढ़ती है तो यह आवश्यक है कि मानवीय जरूरतें पूरी की जाएं। एक तरफ तो दुनिया कोविड-19 महामारी पर काबू पाने के लिए टीके की खोज में लगी हुई है लेकिन वहीं दूसरी तरफ वायु प्रदूषण की वजह से पूरी दुनिया में करोड़ों लोग का जीवन और छोटा और बीमार होता चला जा रहा है।

प्रदूषण को लेकर आईक्यू एयर विजुअल द्वारा कराए गए विश्व वायु गुणवत्ता 2019 सर्वे के मुताबिक, गाजियाबाद दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर है। गाजियाबाद में कई इंडस्ट्रियल एरिया होने के कारण शहर बुरी तरह से प्रदूषण की चपेट में आ चुका है। प्रदूषण के मामले में राजधानी दिल्ली का दुनिया में पांचवें स्थान पर है। अन्य देशों के बड़े शहर भी प्रदूषण की समस्या से जूझ रहे हैं। गाजियाबाद के बाद चीन का होटन, पाकिस्तान का गुजरांवाला और फैसलाबाद का नंबर है। आंकड़ों के मुताबिक, भारत के 21 शहर दुनिया के 30 सबसे प्रदूषित शहरों में आते हैं। आंकड़े यह बताते हैं कि भारत का स्थान प्रदूषण के मामले में पाकिस्तान, मंगोलिया, अफगानिस्तान और पड़ोसी देश बांग्लादेश के बाद पांचवें स्थान पर है। जहां पूरे देश में लॉकडाउन की वजह से पर्यावरण साफ हुआ है. जालंधर से हिमालय की वादियां दिख रही थी और गंगा का पानी बिलकुल साफ और नीला दिखने की खबरें भी सामने आईं लेकिन इसके बावजूद एक कड़वा सच ये रहा कि शुरुआती 6 महीने में लॉकडाउन के बावजूद राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण की वजह स 24 हजार मौतंे हुईं। पिछले 6 महीने ने दिल्ली में कोरोना वायरस के बढ़ते मामले और मौत के आंकड़े आपको हैरान करते रहे हैं लेकिन क्या आपको पता है कि कोरोना वायरस से कहीं ज्यादा घातक है वायु प्रदूषण? पर्यावरण पर काम करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था ग्रीनपीस ने अपनी एक रिपोर्ट में खुलासा किया है कि दिल्ली में 25 मार्च से कोविड-19 को लेकर सख्त लॉकडाउन के बावजूद 2020 के शुरुआती छह महीनों में यहां वायु प्रदूषण के कारण करीब 24,000 लोगों की जान गई। आईक्यूएयर के नए ऑनलाइन उपकरण एयर विजुअल और ग्रीनपीस दक्षिणपूर्व एशिया के मुताबिक दिल्ली में वर्ष के शुरुआती छह महीनों के दौरान वायु प्रदूषण की वजह से 26,230 करोड़ रुपयों का नुकसान हुआ, जो उसके वार्षिक सकल घरेलू उत्पाद के 5.8 प्रतिशत के बराबर है। शिकागो विश्विद्यालय के एनर्जी पाॅलिसी इंस्टिट्यूट में काम करने वाले ग्रीनस्टोन ने कहा, ''हाथों में एक इंजेक्शन ले लेने से वायु प्रदूषण कम नहीं होगा। इसका समाधान मजबूत जन नीतियों में है।''

(नाज़नींन-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)

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