कोविड -19 - छात्रों के भविष्य का सवाल

लखनऊ। भारत में कोरोना संकट के बीच गतिवधियां भी चालू हो गयी हैं। अन्य क्षेत्रों की तरह कोरोना वायरस संकट का असर शिक्षा क्षेत्र पर भी पड़ा है। ढाई महीने से ज्यादा का वक्त हो गया है जब स्कूल और कॉलेज समेत देशभर के शिक्षण संस्थानों को बंद कर दिया गया था। हालांकि अब भले ही विभिन्न राज्यों में स्कूल और कॉलेज दोबारा खोलने की बात की जा रही है और इसके लिए तेजी से काम चल रहा हो, लेकिन इस बीच एक चौकानें वाली खबर सामने आई है। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की मानें तो दुनिया के कई देशों में स्कूल दोबारा खोलने के बाद छात्रों को कोरोना संक्रमण हो गया है। राज्यों में हाईस्कूल, इण्टरमीडिएट बोर्ड परीक्षा के नतीजे कहीं कहीं तो घोषित कर दिये गये है और कहीं घोषित होने वाले हैं। उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम डॉ दिनेश शर्मा ने भी 3 जून को कहा था कि यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा का परिणाम 25 से 27 जून के बीच आ जाएगा। डॉ दिनेश शर्मा को भी छात्र छात्राओं के भविष्य की चिंता है।यह भविष्य शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों दृष्टियों से देखा जा रहा है। डॉ दिनेश शर्मा कहते हैं कि बड़ी मुश्किल से परीक्षा और शिक्षा सत्र नियमित किया जा सका है,अब कोरोना के चलते पिछड़ रहा है । उत्तर प्रदेश में माध्यमिक और उच्च शिक्षा की आनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था की गयी है । स्कूल कालेज खोलने से पहले कई बातों पर विचार करना पड़ेगा क्योंकि छात्र छात्राओं के स्वास्थ्य के साथ समझौता नहीं किया जा सकता है। डॉ दिनेश शर्मा उपमुख्यमंत्री के साथ आगरा के प्रभारी मंत्री भी है। गत दिनों डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा था कि अगर आगरा में लोगों ने सामाजिक दूरी का पालन नहीं किया तो वहां फिर से लॉकडाउन कर दिया जाएगा। छूट इसी शर्त पर दी गई है कि कोरोना का संक्रमण न फैलने दिया जाए। कोरोना के कारण एयरपोर्ट, मेट्रो और बैराज जैसे परियोजनाओं में ढाई महीने की देरी हुई है लेकिन सरकार का प्रयास है कि इन्हें जल्द से जल्द शुरू किया जाए। वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि जुलाई में कोरोना का संक्रमण बढ़ने की आशंका है। इसे देखते हुए तैयारियां कर ली गई हैं। अब प्रदेश में रोज 10 हजार जांच हो रही हैं। अस्पतालों में बिस्तर बढ़ाए गए हैं। जाहिर है कि स्कूल कालेज खोलने के बारे में भी मंथन चल रहा है।
दरअसल, कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज नेता सिद्धारमैया ने राज्य सरकार को सलाह दी है कि अभी कम से कम दो और महीने स्कूलों को न खोलना ही सही कदम होगा। इसके लिए उन्होंने फ्रांस, ब्रिटेन और इटली का उदाहरण दिया है, जहां स्कूल दोबारा खोले जाने के बाद कई छात्र-छात्राएं कोरोना संक्रमण की चपेट में आ गए थे। इसीलिए उन्होंने कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा और प्राइमरी व सेकेंडरी एजुकेशन मिनिस्टर सुरेश कुमार को स्कूल खोलने को लेकर जल्दबाजी में कोई भी फैसला न करने की सलाह दी थी। सिद्धारमैया ने ट्वीट कर कहा, राज्य में कोरोना संक्रमण बेकाबू हो गया है। ऐसे में स्कूलों को कम से कम दो महीने के लिए न खोलना ही सही कदम होगा। शिक्षा मंत्री सुरेश कुमार ने जुलाई से स्कूल खोलने का प्रस्ताव दिया था। इस पर सिद्धारमैया ने कहा कि मुख्यमंत्री को इस प्रस्ताव का विरोध कर रहे पेरेंट्स की चिंताओं को भी संज्ञान में लेना चाहिए। दो महीने बाद हालात की समीक्षा की जानी चाहिए। एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा, इस तरह की रिपोर्ट सामने आ रहीं हैं कि ब्रिटेन, फ्रांस और इटली जैसे देशों में स्कूल दोबारा खोलने के बाद कई बच्चे कोरोना संक्रमित हो गए थे। ऐसे में दो महीने बाद हालात की समीक्षा करने के बाद ही स्कूलों को दोबारा खोलने को लेकर विचार करना चाहिए। ऐसे में जबकि लॉकडाउन में ढील दी जा रही है तो राज्य सरकार ने स्कूल दोबारा खोलने को लेकर पेरेंट्स समेत अन्य हितधारकों से सुझाव मांगे हैं।
उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा ने भी गत 3 जून को कहा था कि यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा का परिणाम 25 से 27 जून के बीच आ जाएगा। यूपी बोर्ड रिजल्ट तैयार करने मे जुटा है। डा दिनेश शर्मा उच्च एवं माध्यमिक शिक्षा का दायित्व भी संभाल रहे हैं । उन्होंने कहा कि बोर्ड परीक्षा की कॉपियों की जांच लगभग पूरी हो चुकी है। उनकी भी चिंता इसी बात को लेकर है कि किसी तरह सत्र को नियमित किया जाए। उन्होंने कहा है कि कोरोना के चलते देश भर में लॉकडाउन रहा लेकिन इसके बावजूद हमने सत्र लेट नहीं होने दिया। बच्चों की ऑनलाइन क्लास करवाई। अब कोरोना संक्रमण की स्थिति देखते हुए ही जुलाई में स्कूल खोले जा सकते हैं। देश का सबसे बड़ा परीक्षा बोर्ड यही है। यूपी बोर्ड परीक्षा 2020 के लिए 56.11 लाख परीक्षार्थी पंजीकृत हुए थे। करीब 51 लाख परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल हुए थे। डॉ. दिनेश शर्मा ने बताया था कि हाईस्कूल की परीक्षाएं 12 कार्यदिवसों में 18 फरवरी से शुरू होकर 3 मार्च को खत्म हुई थीं। इंटमीडिएट की परीक्षाओं में महज 15 दिन लगे थे और 16 मार्च से कॉपियों का मूल्यांकन भी शुरू हो गया था लेकिन 18 मार्च को कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए इसे रोक दिया गया था। इस प्रकार उत्तर प्रदेश में भी स्कूल कालेज जुलाई से खोलने की तैयारी चल रही है।
इन परीक्षाओं के साथ प्रतियोगी परीक्षाएं भी होनी हैं। इनके लिए विशेष तैयारी करनी होती है। यूपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा 31 मई को आयोजित होने वाली थी लेकिन कोरोना महामारी के कारण इसे स्थगित कर दिया गया। माना जाता है कि हर साल पूरे देश भर से करीब सात लाख उम्मीदवार प्रारंभिक परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन कराते हैं। इस साल लगभग 10 लाख उम्मीदवारों ने प्रारंभिक परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया था। इसके लिए छात्र छात्राए दिल्ली और प्रयागराज में तैयारी के लिए जाते हैं ।छात्र देश की इस प्रतिष्ठित सेवा का हिस्सा बनने के सपनों के साथ इसकी तैयारी के लिए प्रयागराज और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली जाते हैं। इन दोनों शहरों में बड़ी संख्या में कोचिंग संस्थान भी मौजूद हैं जहां इसकी तैयारी करवाई जाती है। दिल्ली का मुखर्जी नगर इलाके के अलावा करोलबाग और राजेंद्र नगर इलाके में ज्यादातर कोचिंग संस्थान हैं। हिन्दी माध्यम से तैयारी करने वाले ज्यादातर छात्र मुखर्जी नगर में रहते हैं जबकि अंग्रेजी माध्यम से सिविल सर्विसेज की तैयारी करने वाले छात्र राजेंद्र नगर और करोलबाग में रहना पसंद करते हैं।
दिल्ली और प्रयागराज के अलावा हैदराबाद, लखनऊ और पटना में भी कोचिंग संस्थान हैं जहां यूपीएससी के अलावा राज्य प्रशासनिक सेवाओं की भी तैयारी करवाई जाती है। यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा 2020 का इंतजार कर रहे उम्मीदवारों के लिए अहम खबर आई है। यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा 2020 के लिए संशोधित कार्यक्रम का ऐलान कर दिया गया है। इसके तहत परीक्षा अब 4 अक्टूबर को आयोजित कराई जाएगी। संघ लोक सेवा आयोग ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर 5 जून को संशोधित कार्यक्रम जारी किया है। उम्मीदवार संघ लोक सेवा आयोग की आधिकारिक वेबसाइट यूपीएससी .जीओवी.इन पर परीक्षा का कार्यक्रम चेक कर सकते हैं। इसके अलावा यूपीएससी मेन परीक्षा अगले साल 8 जनवरी को आयोजित होगी। साथ ही यूपीएससी फोरेस्ट सर्विस प्रारंभिक परीक्षा के लिए भी नई तारीखों का ऐलान कर दिया गया है। ये परीक्षा 28 फरवरी 2021 में होगी। इनके लिए तो पर्याप्त समय हैं लेकिन कोरोना वायरस अभी जल्दबाजी की इजाजत नहीं दे रहा है। छोटे बच्चों के साथ तो बिल्कुल रिस्क नहीं ली जा सकती है।
(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)