अजब गजब-उम्र 45 से भी कम, छात्रों अध्यापकों को लगा दी कोरोना वैक्सीन

गांधीनगर। आईआईटी के 900 छात्रों, फैकल्टी सदस्यों और अन्य स्टाफ को कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए वैक्सीन लगा दी। इनमें से ज्यादातर की उम्र 45 साल से भी नीचे है। अब इस मामले को लेकर विवाद खड़ा हो गया है कि आखिर उम्र की सीमा निर्धारित किए जाने के बाद भी 900 छात्रों का टीकाकरण किन हालातों में किया गया।
दरअसल समूचे देश के साथ-साथ गुजरात में भी कोरोना से बचाव के लिए टीकाकरण अभियान चल रहा है। जिसके लिए 45 वर्ष से ऊपर की आयु सीमा निर्धारित की गई है। 45 वर्ष से ऊपर के महिला पुरुषों को कोरोना संक्रमण से बचाव का टीका लगाया जा रहा है। गांधीनगर स्थित आईआईटी में शिक्षारत 900 छात्रों, फैकल्टी सदस्यों व अन्य स्टाफ को भी कोरोना से बचाव के लिए वैक्सीन दे गई। लेकिन मामला उस समय तुल पकड़ गया जब वैक्सीन लगवाने वाले छात्रों व अन्य स्टाफ की उम्र सरकार की ओर से निर्धारित की गई 45 वर्ष की आयु सीमा से काफी कम मिली। इस संबंध में आईआईटी गांधीनगर की ओर से अभी कोई बयान नहीं आया है। आईआईटी के जनरल डायरेक्टर प्रोफेसर सुधीर कुमार जैन और प्रवक्ता से जब संपर्क करने का प्रयास किया गया था कोई जवाब नहीं मिला। रिपोर्ट के अनुसार आईआईटी कैंपस में बने वैक्सीनेशन सेंटर में अध्यापकों, छात्रों और अन्य लोगों समेत 900 लोगों को वैक्सीन लगाई गई है। इनमें ऐसे छात्र भी शामिल है जो कैंपस में नहीं है। इस संबंध में भले ही आईआईटी और सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं मिला है। लेकिन मीडिया रिपोर्ट को खारिज भी नहीं किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक 30 मार्च से 2 अप्रैल के दौरान आईआईटी में कोरोना वैक्सीनेशन किया गया था। नाम उजागर न करने की शर्त पर एक छात्र ने बताया कि मुझे यह जानकारी नहीं थी कि मैं कोरोना वैक्सीन लेने के लिए पात्र हूं या नहीं। हम सभी को ईमेल आया था कि 30 मार्च से 2 अप्रैल के दौरान आपका वैक्सीनेशन होना है। इसलिए मैंने 31 मार्च को वैक्सीन लगवाई थी। उसके बाद कुछ थकान सी महसूस हो रही थी लेकिन अब सब कुछ ठीक है।
