'जब भी मांग आएगी, सरकार तुरंत किसान रेल चलाएगी'

जब भी मांग आएगी, सरकार तुरंत किसान रेल चलाएगी

नई दिल्ली। सरकार ने आज कहा कि किसान रेल सेवा मांग पर आधारित सेवा है और जब जब जहां जहां से मांग आएगी, रेलवे बिना देरी किये किसान रेल चलाएगी।

रेल, संचार, इलैक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में किसान रेल के बारे में एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि किसान रेल सेवा ट्रक की तुलना में कृषि उपज के परिवहन की सस्ती सेवा है जिसमें मार्ग में माल की बरबादी न्यूनतम होती है।

रेल, संचार, इलैक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सात अगस्त 2020 को पहली किसान रेल चलने के बाद से अब तक कुल 1642 किसान रेलें चलायीं जा चुकीं हैं। इनमें सर्वाधिक 1239 गाड़ियां महाराष्ट्र से चलायीं गयीं हैं। जबकि आंध्र प्रदेश से 126, मध्यप्रदेश से 56, गुजरात एवं तेलंगाना से 48-48, कर्नाटक से 45, पश्चिम बंगाल से 40, उत्तरप्रदेश से 36, पंजाब से दो तथा असम एवं त्रिपुरा से एक एक किसान रेल का परिचालन किया गया है।

एक पूरक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि रेलवे ने यात्री सेवा वाले अनारक्षित द्वितीय श्रेणी के कोच किसान रेल में लगाये जिससे माल को सीटों पर रख कर ले जाया जा सके। इससे रास्ते में होने वाली माल की बरबादी रुकी है। उन्होंने कहा कि सरकार किसान रेल से कृषि उत्पादों के परिवहन में 50 प्रतिशत की सब्सिडी देती है जिससे यह ट्रक और अन्य माध्यम से सस्ती परिवहन सेवा साबित हो रही है।

रेल मंत्री ने कहा कि किसान रेलों के माध्यम से भारतीय रेलवे ने 220 करोड़ रुपए का राजस्व अर्जित किया है। एक पूरक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने यह भी बताया कि जल्दी खराब होने वाले उत्पादों के लिए कॉनकोर रेफ्रिजरेटेड कंटेनरों को उपलब्ध कराती है। इसी प्रकार से दूध के परिवहन के लिए विशेष प्रकार के टैंकरों का परिचालन किया जाता है।


वार्ता

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