मोदी सरकार ने प्रवासी मजदूरों के 116 जिलों की पहचान,किया मेगा प्लान तैयार

मोदी सरकार ने प्रवासी मजदूरों के 116 जिलों की पहचान,किया मेगा प्लान तैयार

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने देश के 6 राज्यों के उन 116 जिलों की पहचान की है, जहां लॉकडाउन के दौरान सबसे ज्यादा प्रवासी मजदूर वापस लौटे हैं। मोदी सरकार ने इन प्रवासी मजदूरों के लिए एक मेगा प्लान तैयार किया है।

प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी की बात पर अब विश्वास करना चाहिए कि कोविड 19 के चलते रोजगार का जो संकट खड़ा हुआ है, उससे निपटने के लिए ठोस कदम भी उठाए जाएंगे। इससे पहले आशा और प्रत्याशा में अभीष्ट नतीजे नहीं मिले। सरकार को अपनी गलतियों का भी अहसास हो रहा होगा। प्रवासी श्रमिकों के बारे में अब आंकड़े जुटाने की जरूरत समझी जा रही है। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के समाज कार्य (सोशलवर्क) विभाग के छात्र यह कार्य कर रहे हैं। प्रवासी मजदूरों के मुद्दे पर उद्योग विभाग की बैठक विश्वविद्यालय के साथ हुई थी। इस बैठक में प्रोफेसर टीएन सिंह के अलावा समाज कार्य विभाग के शिक्षक भी शामिल थे। बैठक में प्रवासी मजदूरों के कल्याण और पुनर्वास को लेकर महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के शिक्षकों और छात्रों से सहयोग मांगा गया। इसी संदर्भ में समाज कार्य विभाग ने कुछ वर्षों की योजना तैयार की है । निश्चित रूप से यह कार्य समय मांगता है। प्रवासी श्रमिकों के बारे में हमारे पास आंकड़े होते तो श्रमिकों को सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलकर बाधाओं का सामना न करना पड़ता। उद्योग जगत ने भी महसूस किया है कि इस संकट काल में मजदूरों के प्रति उनके कर्तव्य का निर्वहन भी ठीक से नहीं हो सका। लाकडाउन पीरियड में श्रमिकों के प्रति उनके मालिकों से पीएम मोदी ने अपेक्षा की थी लेकिन व्यापारी इस बात को कैसे भूल सकते थे कि घोड़ा घास से यारी करेगा तो खाएगा क्या? इसलिए उद्योगपति कोर्ट चले गये थे और सरकार के हांथ भी बंध गये। अब सभी भूलचूक लेनी देनी के फार्मूले पर आ गये हैं। भारतीय उद्योग परिसंघ ( सीआईआई ) ने भी मजदूरों के प्रति अपनी सहानुभूति का प्रदर्शन किया है और केंद्र सरकार ने भी देशभर में उन स्थानों का विवरण तैयार करवाने का काम शुरू कर दिया है जहाँ सबसे ज्यादा प्रवासी मजदूर वापस लौटे हैं। सरकार अब इनके रोजगार की व्यवस्था करेगी।

कोरोना वायरस (कोविड-19) के चलते लगे लॉकडाउन के कारण कई लोगों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा है। ऐसे में भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई ) के अध्यक्ष उदय कोटक ने गत 6 जून को केंद्र सरकार से मांग करते हुए कहा कि जिन लोगों की सैलरी 25 हजार से कम है और उनकी नौकरी चली गई है ऐसे लोगों के खाते में कैश ट्रांसफर करे। उदय कोटक ने कहा कि मुझे लगता है कि जो लोग 25000 से कम कमा रहे हैं और लॉकडाउन के कारण नौकरी गवां चुके हैं उन्हें सरकार को उनके वेतन का करीब 50 से 75 प्रतिशत देना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोविड-19 के दौरान ऋण अदायगी पर छह महीने के ब्याज को माफ कर देने से अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा। उन्होंने केंद्र से भारत में व्यापार को आसान बनाने के लिए और अमेरिका व चीन के बीच व्यापारिक संबंध खराब चलने के कारण चीन से जाने वाली अमेरिकी कंपनियों को भारत की ओर आकर्षित करने के लिए भी कहा है। इसी क्रम में केंद्र सरकार ने देश के 6 राज्यों के उन 116 जिलों की पहचान की है, जहां लॉकडाउन के दौरान सबसे ज्यादा प्रवासी मजदूर वापस लौटे हैं। मोदी सरकार ने इन प्रवासी मजदूरों के लिए एक मेगा प्लान तैयार किया है। इस मेगा प्लान में कोरोना लॉकडाउन के दौरान अपने राज्यों और गांवों में लौटे करोड़ों प्रवासी मजदूरों के पुनर्वास और रोजगार के लिए पूरा खाका तैयार किया गया है। सरकार इन 116 जिलों में केंद्र की ओर से चलाई जाने वाली सोशल वेलफेयर और डायरेक्ट बेनिफिट स्कीमों में तेजी लाएगी। मोदी सरकार चाहती है कि घर लौटे प्रवासियों के लिए जल्द से जल्द आजीविका, रोजगार, कौशल विकास और गरीब कल्याण सुविधाओं का लाभ सुनिश्चित किया जा सके. बता दें कि इन जिलों में मनरेगा, स्किल इंडिया, जनधन योजना, किसान कल्याण योजना, खाद्य सुरक्षा योजना, पीएम आवास योजना समेत अन्य केंद्रीय योजनाओं के तहत मिशन मोड में काम किया जाएगा। इसके साथ ही हाल ही में घोषित आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत भी इन जिलों पर ध्यान केंद्रित करने के साथ ही बाकी केंद्रीय योजनाओं को भी सुचारु रूप से शुरू किया जाएगा। केंद्र सरकार के मंत्रालयों को भी कहा गया है कि दो हफ्ते में इन जिलों को ध्यान में रखकर योजनाओं का प्रस्ताव तैयार करके पीएमओ भेजे। केंद्र सरकार की तरफ से चयनित 116 जिलों में सबसे ज्यादा 32 जिले बिहार के हैं। उसके बाद यूपी के 31 जिले हैं।

मध्यप्रदेश के 24, राजस्थान के 22, झारखंड के 3 और ओडिशा के 4 जिले हैं। सभी प्रदेशों में भी राज्य स्तर से प्रवासियों को रोजगार देने का प्रयास किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने कार्य कुशलता के अनुरूप रोजगार देने की व्यवस्था की है। श्रमिकों का पंजीकरण किया जा रहा है। पंजीकरण के नवीनीकरण का मौका दिया जाएगा। कर्मकार बोर्ड के तहत करीब 50 लाख पंजीकृत दिहाड़ी मजदूर ही हैं। इनकी संख्या और बढ सकती है। इसी तरह अन्य प्रदेशों में भी रोजगार जुटाए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड आदि राज्य भी इस तरह की योजनायें बना रहे हैं। जिससे प्रवासी मजदूरों को काम मिलेगा। बिरसा हरित ग्राम योजना, नीलाम्बर पितांबर जल समृद्धि योजना और पोटो हो खेल मैदान योजना में रोजगार मिलेगा ।यहां के सिमडेगा जिले में मनरेगा अन्तर्गत प्रखंडवार कई योजनाएं शुरू की गई है। प्रवासी श्रमिक व स्थानीय ग्रामीणों को इसमें रोजगार दिया जा रहा है।

(हिफी)

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