मोदी सरकार का एक और बड़ा कदम

मोदी सरकार का एक और बड़ा कदम

नई दिल्ली। नरेन्द्र मोदी ने जब से केन्द्र सरकार को संभाला है, तब से अब तक कई साहसपूर्ण और जोखिम भरे फैसले लिये गये। हजार और पांच सौ के नोट अचानक बंद करना बहुत जोखिम का फैसला था। इससे काले धन को खत्म करने में पूरी तरह तो सफलता नहीं मिल पायी लेकिन कई लोगों की कमर जरूर टूट गयी। इसी तरह तीन तलाक पर रोक, जीएसटी और कश्मीर में अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी बनाने के मामले हैं। अब मोदी की सरकार लडकियों की शादी योग्य उम्र तय करने जा रही है। पीएम मोदी ने इसके पीछे मुख्य रूप से कुपोषण की समस्या बतायी है लेकिन लव जिहाद जैसी समस्याएं भी इससे नियंत्रित की जा सकेंगी। अनुमान है कि जिस तरह से लड़कों के वयस्क होने की उम्र 21 वर्ष निर्धारित है, उसी तरह लडकियों के भी बालिग होने की उम्र 21 वर्ष हो जाएगी। इसका प्रभाव विस्तृत हो सकता है। पीएम मोदी ने कुपोषण का जिक्र किया और कहा शादी जल्दी हो जाने से बच्चे जल्दी पैदा होंगे । इससे मां में कुपोषण की समस्या हो सकती है। दूसरी बात लडकियों की समझदारी की है। शादी जैसे फैसले वे जिस उम्र में कर रही हैं, उसमें परिपक्वता नजर नहीं आती। लव जिहाद जैसे मामले भी इसी लिए बढ़ रहे हैं। अभी लड़कियां 18 साल में ही बालिग मानी जाती हैं, इसलिए उनके अपरिपक्व फैसले पर अदालत को भी मुहर लगानी पडती है। अगर लडकियों की बालिग होने की उम्र 21 साल हो जाए तो उनका फैसला भी परिपक्व होगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गत 16 अक्टूबर को कहा कि लड़कियों की शादी की उपयुक्त आयु को लेकर गठित की गई समिति की रिपोर्ट आते ही सरकार इस बारे में निर्णय लेगी। प्रधानमंत्री ने यह बात वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में कही थी। उन्होंने कहा, बेटियों की शादी की उचित आयु क्या हो, ये तय करने के लिए चर्चा चल रही है। मुझे देशभर की जागरूक बेटियों की चिट्ठियां आती हैं कि जल्दी से निर्णय कीजिए। मैं उन सभी बेटियों को आश्वासन देता हूं कि बहुत ही जल्द रिपोर्ट आते ही उस पर सरकार अपनी कार्रवाई करेगी। यहां पर ध्यान देने की बात यह भी है कि इसी साल अर्थात 15 अगस्त 2020 को लाल किले की प्राचीर से अपने संबोधन में मोदी ने लड़कियों की शादी की उपयुक्त आयु निर्धारित करने के लिए एक समिति के गठन की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था, बेटियों में कुपोषण खत्म हो, उनकी शादी की सही आयु क्या हो, इसके लिए हमने कमेटी बनाई है। उसकी रिपोर्ट आते ही बेटियों की शादी की आयु के बारे में भी उचित फैसले लिये जाएंगे। उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस बात पर बहुत ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया था। अब लव जिहाद जैसी समस्याएं गंभीर होती जा रही हैं। सुप्रीम कोर्ट के सामने भी ऐसे मामले आ रहे हैं। कोर्ट की मजबूरी है कि जिन लडकियों को धोखा दिया गया और उनकी उम्र 18 साल या उससे अधिक है तो लडके के दबाव में ही सही, लेकिन लडकी का बयान को ही कोर्ट सच मान लेता है। देश में अभी लड़कियों की शादी की कम से कम आयु 18 वर्ष निर्धारित है जबकि लड़कों की आयु सीमा 21 वर्ष है। इसका मतलब कि लडके 21 साल में समझदार होते हैं जबकि लडकियां 18 साल में ही फैसले लेने में परिपक्व हो जाती हैं। इसी विसंगति को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दूर करना चाहते हैं।

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने कहा था कि छोटी आयु में गर्भ धारण करना, शिक्षा की कमी, जानकारी का अभाव, शुद्ध पानी न होना, स्वच्छता की कमी जैसी अनेक वजहों से कुपोषण के खिलाफ लड़ाई में जो अपेक्षित परिणाम मिलने चाहिए थे, वह नहीं मिल पाए।

उन्होंने कहा कि देश में अलग-अलग स्तर पर कुछ विभागों द्वारा प्रयास हुए थे, लेकिन उनका दायरा या तो सीमित था या टुकड़ों में बिखरा पड़ा था। उन्होंने कहा, जब 2014 में मुझे देश की सेवा करने का मौका मिला तब मैंने नए सिरे से प्रयास शुरू किए । हम एकीकृत सोच लेकर आगे बढ़े, समग्र रुख लेकर आगे बढ़े। तमाम बाधाओं को समाप्त करके हमने एक बहुआयामी रणनीति पर काम शुरू किया। इस प्रकार मोदी की बहुआयामी सोच का ही यह हिस्सा है। इसमें प्रमुखता कुपोषण से निपटने को दी गयी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि केंद्र की सत्ता में आने के बाद उनकी सरकार ने गुजरात के अनुभवों से बहु-आयामी रणनीति पर काम शुरू किया। कुपोषण बढ़ने के कारणों को देखते हुए स्वच्छ भारत मिशन, हर घर शौचालय, मिशन इंद्रधनुष, जैसे अभियानों की शुरुआत की गई। इसी तरह कुपोषण को समाप्त करने के लिए भी प्रयास किये जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री कहते हैं कि गर्भावस्था और नवजात शिशु के पहले 1000 दिनों को ध्यान में रखते हुए, मां और बच्चे दोनों के पोषण और देखभाल के लिए भी एक बड़ा अभियान शुरू किया गया। आज देश की गरीब बहनों, बेटियों को एक रुपये में सैनिटेशन पैड्स उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, इन सब प्रयासों का एक असर ये भी है कि देश में पहली बार पढ़ाई के लिए बेटियों के नामांकन की दर बेटों से भी ज्यादा हो गयी है। बेटियां पढें, ये बहुत अच्छी बात है। इससे उनकी सोच बदलेगी। उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में शिक्षा की महती भूमिका रहती है। आत्मनिर्भर और शिक्षित होने में कम से कम 21 साल की उम्र तो हो ही जाती है इसलिए शादी की उम्र भी 21 साल या इसके बाद की होनी चाहिए। प्रधानमंत्री ने इसीलिए लड़कियों की शादी की उम्र तय करने के लिए समिति गठित की।

कुपोषण से निपटने के लिए एक और महत्वपूर्ण दिशा में काम हो रहा है। अब देश में ऐसी फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है जिसमें पौष्टिक पदार्थ- जैसे प्रोटीन, आयरन, जिंक इत्यादि ज्यादा होते हैं. उन्होंने कहा कि रागी, ज्वार, बाजरा, कोडो, झांगोरा, कोटकी जैसे मोटे अनाजों की पैदावार बढ़े, लोग अपने भोजन में इन्हें शामिल करें, इस ओर प्रयास बढ़ाए जा रहे हैं। एफएओ द्वारा वर्ष 2023 को मोटे अनाजों का अंतरराष्ट्रीय वर्ष घोषित करने के भारत के प्रस्ताव को पूरा समर्थन देने के लिए धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव पोषण और छोटे किसानों की आय, दोनों से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा, इससे भारत ही नहीं विश्व भर को दो बड़े फायदे होंगे। एक तो पौष्टिक आहार प्रोत्साहित होंगे और उनकी उपलब्धता बढ़ेगी। दूसरा, जो छोटे किसान होते हैं, जिनके पास कम जमीन होती है, सिंचाई के साधन नहीं होते हैं, बारिश पर निर्भर होते हैं, ऐसे छोटे-छोटे किसानों को बहुत लाभ होगा। मोदी ने कहा कि भारत के किसान, कृषि वैज्ञानिक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और आशा कार्यकर्ता, कुपोषण के खिलाफ आंदोलन का एक बहुत बड़ा मजबूत किला है। मजबूत आधार हैं। उन्होंने कहा, इन्होंने अपने परिश्रम से जहां भारत का अन्न भंडार भर रखा है, वहीं दूर-सुदूर, गरीब से गरीब तक पहुंचने में ये सरकार की मदद भी कर रहे हैं। इन सभी के प्रयासों से ही भारत कोरोना के इस संकटकाल में भी कुपोषण के खिलाफ मजबूत लड़ाई लड़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस प्रयास में हम सभी को योगदान करना है। बाल विवाह के खिलाफ कानून होने के बावजूद अभी इस पर पूरी तरह से रोक नहीं लगायी जा सकी है। इसलिए शादी की उम्र तय होने के बाद हमें लोगों को जागरूक भी करना होगा कि कमेटी ने जो सुझाव दिया है, उससे पूर्व उसका विवाह न करें। (अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)

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