लड़की भगाने का साइड इफेक्ट- छोड़ने पड़ रहे दशकों पुराने ठिकाने

लड़की भगाने का साइड इफेक्ट- छोड़ने पड़ रहे दशकों पुराने ठिकाने

उत्तरकाशी। मुस्लिम युवक द्वारा हिंदू नाबालिग किशोरी को भगाने के प्रयास का दंश दशकों से पुरोला में कारोबार कर रहे मुस्लिम कारोबारियों को भुगतना पड़ रहा है। 15 जून को आयोजित होने वाली महापंचायत से पहले पुरोला छोड़कर जाने की दीे गई चेतावनी के मद्देनजर 42 साल से पुरौला में कपड़े का कारोबार करने वाला शकील राजधानी देहरादून में शिफ्ट हो गया है। आमतौर पर कहा जाता है कि गेंहू के साथ घुन को भी ना चाहकर भी पिसना पडता है यानि किसी के द्वारा की गई किसी करनी का फल अन्य लोगों को भी ना चाहकर भी भोगना पड़ता है। इसी तरह उत्तरकाशी के पुरौला में रह रहे मुस्लिम युवक द्वारा पिछले दिनों हिंदू किशोरी को भगाने के प्रयास का दंश उत्तरकाशी में दशकों से विभिन्न कारोबार कर रहे लोगों को भोगना पड़ रहा है।


आगामी 15 जून को मुस्लिम युवक द्वारा हिंदू किशोरी को भगाने के प्रयास के मामले को लेकर हिंदुओं द्वारा बुलाई गई महापंचायत से पहले मुस्लिम कारोबारियों को पुरौला छोड़कर जाने की चेतावनी के चस्पा किए गए पोस्टरों को ध्यान में रखते हुए पुरौला एवं यमुना घाटी से लगातार मुस्लिम कारोबारी अपना कारोबार समेटकर देवभूमि के अन्य स्थानों पर शिफ्ट हो रहे हैं। उत्तरकाशी के पुरौला में 42 साल से कपड़ों का कारोबार करते हुए अपनी आजीविका चलाने वाले शकील को भी पुरौला छोड़कर जाने को मजबूर होना पड़ा है। रविवार को पुरौला में कपड़े का कारोबार कर रहे शकील अपना साजो-सामान समेटकर उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के लिए कूच कर गए हैं। कपड़ा कारोबारी ने रविवार को अपने सामान को एक ट्रक में लादा और भारी मन से ना चाहकर भी देहरादून के लिए कूच कर गए।

जानकारी मिल रही है कि अभी तक पुरौला से आठ एवं यमुना घाटी से दर्जनभर मुस्लिम कारोबारी अपना कारोबार समेटकर अपनी दुकानें छोड़कर जा चुके हैं। उल्लेखनीय है कि पुरौला में आगामी 15 जून को हिंदुओं की महापंचायत बुलाई गई है। इससे पहले ही मुस्लिम कारोबारियों को यहां से अपना साजो-सामान समेटकर जाने को कहा गया है।

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