जयंती पर मंत्री कपिल ने देवी अहिल्याबाई को किया याद-प्रतिमा माल्यार्पण

मुजफ्फरनगर। प्रदेश के व्यवसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास मिशन विभाग मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने अनन्य शिवभक्त, त्याग, धर्म और समर्पण की प्रतिमूर्ति देवी अहिल्याबाई होल्कर की जयंती पर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण करते हुए अपने भावपूर्ण श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
सोमवार को अनन्य शिवभक्त, त्याग, धर्म और समर्पण की प्रतिमूर्ति मालवा साम्राज्य इंदौर की महारानी देवी अहिल्याबाई होल्कर की जयंती पर प्रदेश के व्यवसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास मिशन विभाग मंत्री स्वतंत्र प्रभार कपिल देव अग्रवाल ने शहर के अहिल्याबाई चैक पर पहुंचकर देवी अहिल्याबाई की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते हुए उन्हें अपने भावपूर्ण श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इस दौरान मंत्री कपिल देव अग्रवाल के साथ भाजपा जिला अध्यक्ष विजय शुक्ला के अलावा अन्य भाजपा के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने देवी अहिल्याबाई की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते हुए उन्हें याद किया। इस मौके पर मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि मराठा साम्राज्य की प्रसिद्ध महारानी तथा इतिहास प्रसिद्ध सूबेदार मल्हार राव होलकर के पुत्र खंडेराव की धर्मपत्नी अहिल्याबाई होल्कर ने माहेश्वर को राजधानी बनाकर शासन किया।
उन्होंने बताया कि देवी अहिल्याबाई होल्कर ने अपने राज्य की सीमाओं के बाहर भारत भर के प्रसिद्ध तीर्थो और स्थानों में मंदिर बनवाए, घाट बंधवाये और बावडियों का निर्माण कराया, रास्ते बनवाएं और सुधरवायें, गरीबों के लिए अन्य क्षेत्र खोलें तथा प्यासों के लिए प्याऊं बनवाई, मंदिरों में विद्वानों की नियुक्ति शास्त्रों के मनन चिंतन और प्रवचन के लिए कराई। उन्होंने बताया कि देवी अहिल्याबाई होल्कर का जन्म चैंडी नामक गांव में हुआ था जो आज कल महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के जामखेड़ में पड़ता है। 10 12 वर्ष की आयु में ही उनका विवाह हो गया था। 29 वर्ष की अवस्था में देवी अहिल्याबाई होल्कर विधवा हो गई। उनके पति का स्वभाव चंचल और उग्र था। वह सब देवी अहिल्याबाई होल्कर ने सहन किया। जब वह 42-43 वर्ष की थी तो उनके पुत्र मालेगांव का देहांत हो गया। जब अहिल्याबाई की आयु 62 वर्ष के लगभग हुई तो दोहित्र नत्थू चल बसा। 4 वर्ष पीछे ही दामाद यशवंतराव फणसे भी नहीं रहे और इनकी पुत्री मुक्ताबाई सती हो गई।