बना हनुमान का मंदिर-दूर हो गई नशे की लत-मुस्लिम भी पवनपुत्र भक्त

रिटायर हुए दारोगा द्वारा गांव में बनवाया गया हनुमान जी का मंदिर लोगों के हृदय परिवर्तन का माध्यम बन गया है।;

Update: 2021-03-27 08:56 GMT

गोंडा। पुलिस विभाग की सेवा से रिटायर हुए दारोगा द्वारा गांव में बनवाया गया हनुमान जी का मंदिर लोगों के हृदय परिवर्तन का माध्यम बन गया है। मंदिर बनने के बाद गांव के लोगों में हुए आलौकिक परिवर्तन से कच्ची शराब के नशे में डूबे रहने वाले बुजुर्गों के साथ युवाओं ने भी नशे का त्याग कर दिया है और अब सभी लोग हनुमान जी की भक्ति में डूबे रहते हैं। गांव में मंदिर बनने के बाद विशेषता यह है कि हनुमान जी की भक्ति में डूबे एक व्यक्ति ने इस्लाम धर्म छोड़कर हिंदू धर्म स्वीकार कर लिया और अब वह दिन रात बजरंगबली की भक्ति और सेवा में ही डूबा हुआ रहता है। 

दरअसल गोंडा जनपद के परसपुर के लायक पुरवा गांव में योगीराज कुंवरनाथ लगभग 40 वर्ष पहले पुलिस विभाग में सेवारत थे। दारोगा के पद से रिटायर होने के बाद योगीराज कुंवरनाथ ने गांव में हनुमान जी का मंदिर बनवाया। मंदिर बनने के बाद गांव के लोग बजरंगबली की भक्ति में इस तरह से रच बस गए हैं कि उन्होंने अपने अंदर के तमाम व्यसनों को छोड़ दिया है। इसे लेकर इलाका अब चर्चा का विषय बना हुआ है। इतना ही नहीं चर्चा की बात यह भी है कि एक भक्त हनुमान जी की भक्ति में इस कदर डूबा कि उसने इस्लाम धर्म छोड़कर हिंदू धर्म अपना लिया और मौहम्मद अनीस से वह शुक्राचार्य बन गया।


जैसे ही मौहम्मद अनीस ने बजरंगबली के चरणों में शरण ली वैसे ही उसके मन के अंदर बड़ा परिवर्तन हुआ और वह सब बुराइयों को त्यागकर मौहम्मद अनीस से हनुमान भक्त शुक्राचार्य हो गए। शुक्राचार्य अब भगवान हनुमान जी की सेवा और भक्ति में लगे रहते हैं। मौहम्मद अनीस से शुक्राचार्य बने हनुमान भक्त ने बताया कि जब से वह हनुमान जी की शरण में आए हैं। तब से उनके घर परिवार में खुशहाली आ गई है। उनके धर्म परिवर्तन से उनके परिवार व समाज के लोगों को कोई भी आपत्ति नहीं है और उन्होंने स्वेच्छा से मुस्लिम धर्म छोड़कर हिंदू धर्म को अपनाया है। उनके ऊपर किसी तरह का कोई दबाव नहीं था। यहां के लोगों के हृदय परिवर्तन का काम किया है योगीराज कुंवरनाथ ने। भगवा रंग ओढ़ने से पहले योगीराज पुलिस विभाग में दारोगा थे।


उनकी आखिरी पोस्टिंग अयोध्या में थी। अयोध्या में रहते हुए ही उनके भीतर हनुमान जी की भक्ति जगी और दारोगा के पद से रिटायर होने के बाद गांव लौटकर सेवानिर्वत्ति से मिली रकम से एक मंदिर का निर्माण कराया। इसके बाद ग्रामीण जो गलत रास्ते पर थे। यानि आमतौर पर शराब पीने का काम और लड़ाई झगड़ा करने में मशगूल रहते थे। उन्हें सुधारा और राम भक्ति व हनुमान भक्ति के पावन काम में लगा दिया। बाबा का कहना है कि पुलिस विभाग के 40 वर्षों की सेवा का फल अब मिल रहा है। जब से गांव में मंदिर का निर्माण हुआ है। तब से यहां के लोगों में काफी परिवर्तन आया है। 



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