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उन्नाव दुष्कर्म केस की सुनवाई को एम्स में लगी अदालत

उन्नाव दुष्कर्म केस की सुनवाई को एम्स में लगी अदालत

नई दिल्ली। उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता के बयान दर्ज करने के लिए एम्स में बनी अस्थाई अदालत में आज सुबह निर्धारित समय पर न्यायाधीश पहुंचे और कार्यवाही शुरू की। अदालत में आरोपी विधायक कुलदीप सेंगर को भी लाया गया है। सर्वोच्च अदालत के निर्देश पर पीड़िता को लखनऊ के अस्पताल से एयर एंबुलेंस के जरिए दिल्ली लाया गया था। उन्नाव कांड से संबंधित मुकदमों की सुनवाई कर रहे विशेष न्यायाधीश धर्मेश शर्मा ने हाल ही में उच्च न्यायालय को एक पत्र लिखकर एम्स के एक बंद कमरे में अदालत की कार्यवाही कर पीड़ित युवती के बयान दर्ज करने की अनुमति मांगी थी। बीते शुक्रवार को उच्च न्यायालय ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी।


बता दें कि तीस हजारी कोर्ट के जिला न्यायाधीश धर्मेश शर्मा ने बीते शनिवार को एम्स के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट को ट्रॉमा सेंटर में उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता के बयान दर्ज करने के आदेश दिए थे। आदेश में कहा गया है कि मामले की सुनवाई खुद न्यायाधीश धर्मेश शर्मा करेंगे। सारी प्रक्रिया बंद दरवाजे के पीछे होगी, इस दौरान आम लोगों और प्रेस का प्रवेश वर्जित रहेगा। अदालत ने अपने पिछले आदेश में पीड़िता का ख्याल रखने के लिए अनुभवी नर्स को तैनात करने के लिए कहा था। अदालत ने अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक को विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इस विशेष अदालत में किसी तरह की ऑडियो या वीडियो रिकार्डिंग नहीं होगी। यहां तक की सेमीनार हॉल में लगने वाली इस विशेष अदालत को ध्यान रखते हुए वहां लग हुए सीसीटीवी कैमरों को भी बंद करने की जिम्मेदारी चिकित्सा अधीक्षक को सौंपी गई है।

ज्ञात हो कि 28 जुलाई को एक सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल होने के बाद पीड़िता को बेहतर इलाज के लिए दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया था। दुष्कर्म के इस मामले में भाजपा से निष्कासित विधायक कुलदीप सेंगर आरोपी हैं। विधायक कुलदीप सेंगर प्रकरण में दुष्कर्म पीड़िता के पिता की हत्या व अन्य मामलों में सीबीआई के छह गवाहों को दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में गवाही के लिए तलब किया गया है।

जानकारों के अनुसार 3 अप्रैल 2018 को विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के भाई अतुल ने अपने साथियों के साथ मिलकर दुष्कर्म पीड़िता के पिता की बेरहमी से पिटाई की थी और उचित इलाज कराए बिना ही पुलिस ने पीड़िता के पिता पर आर्म्स एक्ट की रिपोर्ट दर्ज कर जेल भेज दिया था। जहां हालत बिगड़ने पर उसकी जिला अस्पताल में मौत हो गई थी।

इस प्रकरण की जांच सीबीआई कर रही थी। 28 अगस्त को पीड़िता के रायबरेली में हुए रहस्यमय हादसे का शिकार होने के बाद मामला दिल्ली स्थानांतरित हो गया था। अब तीस हजारी कोर्ट के न्यायाधीश की ओर से सीबीआई के गवाहों को कोर्ट गवाही के लिए बुलाया गया है। इसमें माखी गांव के मजरा सरांय थोक निवासी दो लोगों को 16 सितंबर की सुबह 10 बजे तक कोर्ट में हाजिर होने के आदेश दिये गए हैं। एक महिला सिपाही को 16 सितंबर व सदर तहसील में तैनात एक नायब तहसीलदार, उन्नाव शहर निवासी एक टीवी चैनल के पत्रकार और माखी थाना में तैनात रहे कानपुर देहात निवासी एक अन्य पुलिस कर्मी को 13 सितंबर को कोर्ट में गवाही के लिए सम्मन भेजा गया है।

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