कवाल के शाहनवाज हत्याकांड के फरार आरोपी रविंद्र सिंह उर्फ पटवारी ने कोर्ट में किया सरेंडर, 17 तक न्यायिक हिरासत मे भेजा

कवाल के शाहनवाज हत्याकांड के फरार आरोपी  रविंद्र सिंह उर्फ पटवारी ने कोर्ट में किया सरेंडर, 17 तक न्यायिक हिरासत मे भेजा

मुजफ्फरनगर। वर्ष 2013 में 27 अगस्त को ग्राम कवाल में हुए शाहनवाज हत्याकांड के मामले में फरार चल रहे आरोपी रविंद्र सिंह उर्फ पटवारी ने आज सीजेएम कोर्ट में सरेंडर कर दिया। कोर्ट ने आरोपी रविंदर को 17 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।

ज्ञात हो कि मृतक शाहनवाज के पिता सलीम ने कोर्ट मे प्रहलाद, बिशन सिंह, देवेंद्र, जितेंद्र व रविंदर आदि छः लोगों के विरुद्ध अपने बेटे शाहनवाज की हत्या का आरोप लगाया था। कोर्ट ने सभी छह आरोपियों के विरुद्ध संज्ञान लेते हुए आरोपियों को कोर्ट में पेश होने के आदेश दिए थे, लेकिन आरोपी कोर्ट में पेश नही हुए थे। इसके बाद कोर्ट ने सभी के विरुद्ध गिरफ्तारी वारेंट जारी किए थे, जिसके आधार पर पुलिस ने 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया था, लेकिन एक आरोपी रविंदर पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ पाया था। कोर्ट के आदेश पर वांछित चल रहे मलिकपुरा निवासी छठे आरोपी रविंद्र सिंह उर्फ पटवारी की जानसठ पुलिस ने कुर्की भी थी और पुलिस ने आरोपी के मकान पर भी अपना ताला लगा दिया था। पुलिस द्वारा कोर्ट में पेश किये गए बाकी पांचों आरोपियों की सुनवाई के लिए के लिए मामला सेशन सुपुर्द हो गया था। आज इस मामले के अन्तिम आरोपी रविंदर ने भी सीजेएम कोर्ट में सरेंडर कर दिया है।

ज्ञात हो कि जानसठ कोतवाली के गांव कवाल में 27 अगस्त 2013 मलिकपुरा निवासी ममेरे भाइयों सचिन और गौरव की हत्या कर दी गई थी। जनपद न्यायालय ने गौरव और सचिन की हत्या के लिए दोषी मुजम्मिल, मुजस्सिम, फुरकान, नदीम, जहांगीर, अफजल और इकबाल सभी सात आरोपियों को उम्रकैद की सजा दी थी। इस कांड में कवाल निवासी सलीम के बेटे शाहनवाज की भी हत्या हुई थी। शाहनवाज हत्याकांड में एसआईटी ने फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी। शाहनवाज के पिता सलीम ने इस रिपोर्ट के खिलाफ न्यायालय में प्रोटेस्ट डाला था। कोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए मलिकपुरा के छह आरोपियों प्रहलाद सिंह, तेंदर उर्फ तेंदू, बिशन पुत्रगण इकत्यार सिंह, देवेंद्र व जितेंद्र पुत्रगण प्रहलाद सिंह और रविंद्र सिंह उर्फ पटवारी पुत्र तिलकराम को धारा 302 में तलब किया था।

बता दें कि छेड़छाड़ की घटना को लेकर 27 अगस्त 2013 को कवाल गांव में तीन हत्याओं के बाद मुजफ्फरनगर और आसपास के इलाकों में सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी थी और पूरा इलाका दंगे की आग में कई दिन सुलगता रहा था। इन दंगों में करीब 60 लोग मारे गए थे और सैकड़ों की संख्या में लोग जख्मी हुए थे। करीब 50 लोगों को अपने घरों को छोडने के लिए मजबूर होना पड़ा था।

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 2013 के दंगे के बाद 6,000 से ज्यादा मामले दर्ज किए गए और दंगे में कथित भूमिका के लिए 1,480 संदिग्ध आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। दंगों की छानबीन करने वाली विशेष जांच टीम ने 175 मामलों में आरोपपत्र दाखिल किया था। दंगों में करीब 40 हजार लोगों ने गांवों से भागकर राहत शिविरों में आसरा लिया था।

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