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आईपीएस अभिषेक यादव के ओपन हाऊस में पुलिस को अल्टीमेटम

आईपीएस अभिषेक यादव के ओपन हाऊस में पुलिस को अल्टीमेटम

मुजफ्फरनगर। शाम के लगभग 6 बजे होगे ! मुजफ्फरगनर सिटी का हार्ट शिव चौक पर पुलिस का भारी अमला मौजूद है, आस-पास से गुजरने वाले राहगीर से लेकर वहां के दुकानदारों में गहमागहमी है कि आखिर क्या हो रहा है। कुछ लोग मान रहे है दीपावली के मद्देनजर पुलिस अहतियातन खड़ी है लेकिन तभी इकहरे बदन के लम्बे नौजवान अफसर मुजफ्फरनगर के एसएसपी अभिेषेक यादव का आगमन होता है एसएसपी अभिषेक यादव शिव चौक के पीछे तुलसी पार्क में पहले से ही मौजूद मुजफ्फरनगर शहर के थानों के पुलिसकर्मियों के बीच पहुंचकर कप्तान की भूमिका में अपनी बात कहनी शुरू करते है।






तुलसी पार्क में पुलिसकर्मियों के बीच पहुंचते ही एसएसपी अभिषेक यादव पूछते है कि क्या सबको मेरी आवाज आ रही है, सामने से हां की आवाज आते ही शुरू होता है एसएसपी अभिषेक यादव की अपने अधीनस्थ पुलिसकर्मियों को समझाने और वार्निंग की क्लास।


त्यौहार का टाइम चल रहा है तो मुझे सभी लोग फील्ड़ में चाहिए। देख रहे हो कितनी भीड़ है, भीड़ दिखाई दे रही है ना पुलिस वाला भी दिखाई देना चाहिए। पूरे रोड़ पर 500-1000 आदमी है, भीड़ बहुत है। जिसका भी क्षेत्र है चाहे वो कांस्टेबल हो या फिर सब इंस्पेक्टर हो या कोतवाल हो सब लोग फील्ड़ में रहने चाहिए कोई भी बेवजह चौकी और थानों पर नही रहना चाहिए। शाम के समय लोग खरीदारी करते है जब तक दिवाली खत्म नहीं हो जाती, भैया दूज खत्म नहीं हो जाता आपका काम है फील्ड में रहना यह किसी एक का काम नहीं है सभी का काम है अगर आप वहां खड़े हैं औरं किसी के हाथ में अगर मोबाइल दिखाई दे गया तो उसे खड़े-खड़े सस्पेंड करके जाऊंगा। मै आऊंगा सादे में मुझे मोबाइल किसी के हाथ में दिखना नहीं चाहिए अगर मोबाइल पर बात करनी है तो पीछे जाकर बात करें अपने साथी को बता कर कि मैं बात करके अभी आ रहा हूं। यह वाली डयूटी नही चाहिए मुझे मार्किट में खड़े हो और भीड़ है वहां पर, मोबाइल हाथ में लेकर खड़े हो, वहां ट्रैफिक जाम लग रहा है वहां लड़ाई हो रही है किसी के भी हाथ में मोबाइल नही दिखाई देना चाहिए, किसी का मतलब किसी के भी हाथ में नहीं।





दूसरी बात अगर वहां किसी मौके पर भीड़ ज्यादा है तो फोर्स को बुला लो इसका मतलब ये नही है कि वहां कुर्सी डाल के बैठे रहो या खड़े रहो और वहां बवाल हो रहा है वहां ट्रैफिक जाम लगा हुआ है। अगर आप खड़े हो और वहां कोई बात हो रही है तो आपका काम है उसको रिपोर्ट करना अपने ऊपर वाले अफसरों को अवगत कराइए कंट्रोल रूम को फोन करिए और फोर्स लगाइए। ड्यूटी का मतलब यह नहीं है कि 6 से 12 बजे तक डयूटी लगी है तो हम 12 घंटे ही ड्यूटी करेंगे और 12 घंटे के बाद घड़ी देख कर चले जाएंगे अगर आप कहीं भी ड्यूटी कर रहे हैं तो वहां अगर झगड़ा होता है अगर आपने सूचना भी नहीं दी तो आपके खिलाफ सख्त कार्यवाही होगी उसकी अगर कोई बात हो रही है। उसके इलाके में, तो कंट्रोल रूम को सूचना दे दो।


मै यहां इसलिए आया हूं आपसे बात करूं आपको 12 घंटे की डयूटी करनी है, डयूटी करने का यह मतलब नही है कि खड़े रहना है हमारी जिम्मेदारी है कि हमारे आस-पास क्या हो रहा है और यह सिर्फ त्यौहार तक सीमित नहीं है अगर आप कहीं भी डयूटी कर रहे हो पुलिस की वर्दी पहनी है बहुत सारी जिम्मेदारी होती है, अगर कहीं नशे का काम हो रहा है तो आपकी जिम्मेदारी है उसको रोकना, अगर लोग ज्यादा है तो फोर्स को बुलाइए मगर आपका यह काम नहीं है कि आप वहां खडे रहे हो आपकी डयूटी ऑफ हो गयी ओर आप चले जाओ जितने भी लोग हैं सभी लोग नोट कर लें किसी के भी बीट के क्षेत्र में कोई गलत काम हो रहा है तो आप इसकी तुरंत सूचना देंगे, अपने कोतवाल को सीओ सिटी, सीओ मंडी को एसपी सिटी को और मुझे। अगर मैंने किसी के क्षेत्र में नशे के कारोबार करने वाले किसी को पकड़वाया तो खैर नहीं मै तुम्हें अगले 15 दिन का टाइम दे रहा हूं। 15 दिन बाद जिसके क्षेत्र में पकड़वा लिया तो उस को सस्पेंड कर दूंगा। मैं इतना टाईम दे रहा हूं आपको मै यह नहीं कह रहा कि आप किसी को भी पकड़ कर लाओ। जिसकी बीट है उसके क्षेत्र में खुलेआम हो रहा है। पब्लिक मुझे आकर बतायेगी तो इसका मतलब आप अपनी डयूटी नही कर रहे है। नशा करने वाला चाहे वो पन्नी सूंघ रहा हो, चाहे वो इंजेक्शन बिक रहा है मैडिकल की दुकानों पर। छोट-छोटे बच्चे कर रहे है नशे का काम। ये चीज 100 प्रतिशत बंद होनी चाहिए। यह चीज बिकनी नही चाहिए मुजफ्फरनगर में , अगर किसी की भी बीट में चाहे वो कांस्टेबल हो चौकी इंजार्च हो या इंस्पेक्टर हो आप अपनी बीट में घूमेंगे तो आपको पता चल जाएगा अगर किसी को नहीं पता चलता है तो मुझसे आकर पूछ ले। मुझे पब्लिक के लोगों ने आकर बता दिया तो आपकी खैर नही। अगर कोई चोरी-छुपे कर रहा है तो उसे पकड़िए, अगर किसी ने यह आकर बताया कि साहब फला जगह नशे का काम हो रहा है और वहां किसी भी समय चले जाओ वहां चलता हुआ मिलेगा ऐसी शिकायत मेरे तक आयी और मैने उसको चेक करवाया तो फिर मै नही छोडूंगा।

यह हमारा बेसिक काम है अगर कोई सार्वजनिक स्थल पर नशे का का काम हो रहा, शराब का काम हो रहा है, किसी महिला के लिये वो एरिया सेफ नही है कोचिंग सेन्टर है, स्कूल काॅलेज है सुबह के टाइम शाम के टाइम उस एरिया दो या तीन बार कोई घटना हो गयी है अगर उसके बाद भी हम लोग अलर्ट नहीं हो रहे हैं इस पॉइंट पर बार-बार घटना हो रही है। लड़के खड़े हो जाते हैं शाम के टाइम, स्कूल काॅलेज के टाइम बाहर आकर खडे हो जाते हैं नहीं खड़े होना चाहिए यह जिम्मेदारी आपकी है आपका छोटा सा एरिया है आपको पता होना चाहिए आपके क्षेत्र में कितने स्कूल, काॅलेज, कितने कोचिंग सेन्टर है। आपकी जिम्मेदारी है आप चेक करिए उन पॉइंट का उन पर लड़के आकर बेवजह तो खड़े नहीं होते हैं जिनका कोई मतलब नही है वहां पर। वहां पर नशे की गोलियां नशे के इंजेक्शन तो नही बिक रहे है स्कूल, काॅलेज के बच्चे किसी दुकान से खरीद तो नहीं रहे है। यह सब चीजे दिखाई देने वाली है। मैं यह नहीं कह रहा कि जाकर 50000 का इनामी बदमाश पकड़ लाओ वो बता रहा हूं कि अगर दो दिन सादे में वर्दी तो छोड़ दो घूम लोगे तो तीसरे दिन आपको खुद पता लग जाएगा कि कहां क्या हो रहा है।






एसएसपी अभिषेक यादव बोले अगर आपने वर्दी पहनी है तो पुलिस का काम करना पडेगा आपको हमेशा काम करना पड़ेगा आपका काम यह नहीं है कि 12 घंटे की ड्यूटी करें और चले जाएं हमारा काम है समाज की बुराईयों का ठीक करना यह हमारी नौकरी का पार्ट है अगर हम वो ही नही कर रहे है तो फिर क्या कर रहे है हमें अधिकार है ना कि अगर कोई नशे का काम कर रहा है तो उसके खिलाफ सख्ती से कार्रवाई करनी चाहिए तुमसे कोई बदतमीजी करें तो तुम्हें अधिकार है कि आत्मरक्षार्थ में उसके खिलाफ तुम कार्रवाई कर सकते हो, किसके पास है। अधिकार यह किसी को अधिकार नहीं है किस लिए मिले हमे यह अधिकार, यह सिर्फ पुलिस को दिया गया है किसी भी पब्लिक प्लेस में किसी भी पब्लिक प्लेस में बार-बार रिपीट कर रहा हूं मै यह बात ऐसी रिपोर्ट नही आनी चाहिए कि साहब यह तो ऐसी जगह है आप वहां चले जाओ वहां आपको गलत काम होता मिल जाएगा यह चीजे नही आनी चाहिए जहां स्कूल, काॅलेज, कोचिंग सेंटर बहुत ज्यादा है वहां सुबह व शाम के समय ध्यान देना चाहिए नशे वाली बात शाम के समय ध्यान देनी चाहिए। त्यौहार का टाइम है भीड़भाड़ वाले एरिया में आप घूमे। आप पूछताछ करना शुरू कीजिए आधे लोग अपने-आप ठीक हो जायेंगे अगर ऐसी जगह पर लडके घूम रहे है जिनका कोई मतलब नही है उनको रोको और उतारकर चेक करो, तलाशी लो, पूछो कहां से आया है, क्या कर रहा है शाम के टाइम दोपहर के टाइम मुंह पर डाटा बांध के घूम रहे है, पूछो भईया क्यों घूम रहे हो, उतारये उसको मोटरसाईकिल से। गाड़ी अगर संदिग्ध लग रही है, ब्लैक शीशे लगे हुए हैं बडी लग्जरी गाड़ी है पांच-छः लडके बैठे है तो ऐसे लोगो से पूछिए उनकी जमातलाशी लीजिए। उससे पूछिये कि कहां जा रहा है और क्यों जा रहा है इसके लिए किसी चेकिंग की जरूरत नही है यह कोई अभियान चलाने की जरूरत नहीं है यह हमारा बेसिक काम है।

एसएसपी अभिषेक यादव पूछते है यह बात समझ में आ गयी सभी लोगो को तो सामने से आवाज आती है जी सर।

इसके बाद एसएसपी अभिषेक यादव कहते है कि हमारा बेसिक काम है वो कहते है कितने सब इंस्पेक्टर है हाथ उठाओ कितने कॉस्टेबल है, हाथ उठाओ, यहां अधिकारी कितने है 3, इंस्पेक्टर कितने हैं 2, सब इंस्पेक्टर कितने 15 और हेड कांस्टेबल कांस्टेबल कितने हैं 50 से 60 है। अधिकारी कितने है 20, हमारे साथ।

इनके बिना इतने बड़े शहर में कार्यवाही हो जायेगी क्या, इसलिए आप लोगो को बुलाया है। एक-एक आदमी एक-एक कांस्टेबल हो हैड कांस्टेबल हो, महिला कांस्टेबल हो जो भी हो डयूटी पर हो या ना हो इसी शहर में यही घूमते हो चाहे तुम खुद ही सादे में घूम रहे हो, अपने घर की खरीदारी करने आये हो या दीपावली की खरीदारी करने आये हो, आंखें तो तभी खुली रहती है ना। पुलिस वाले तो तब भी हो ना दिखाई तो देता है ना। अगर ड्यूटी पर नहीं हो तो भी फोन करके बता सकते हो कोतवाल को चौकी इंचार्ज को कि साहब इसको चेक करा लो यह गलत आदमी घूम रहा है। उसको चेक करा लो वर्दी अगर नही पहनी है तो हो तो पुलिस वाले ही ना, यह काम तब तक नहीं होगा जब तक सिपाही हमारे साथ नही जुडेगें अगर हम यह गारंटी ले कि हमारे किसी भी सिपाही को कोई दिक्कत नही होगीे तो आपको भी गारंटी लेनी होगी कि हमारे लिए काम करे।

मैं रिपोर्ट लूंगा एक-एक कॉन्स्टेबल से चौकी इंचार्ज और कोतवाल से तो मै पूछ ही लूंगा यह काम तब तक नही होगा जब तक कांस्टेबल नही जुडेगें इतने बडे शहर में तब तक साथ में अपराधियों खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हो सकती जब तक यह कांस्टेबल हमसे ना जुड़े आपको अपनी जिम्मेदारी समझनी पडेगी और यह जिम्मेदारी है आपकी यह कोई डर नही है कि साहब हमे सस्पेंड कर देगें इसलिए हम काम करेंगे । तुम डयूटी कर रहे हो वहां 12 घण्टे खडे हो, 8 घण्टे खडे हो गश्त कर रहे हो, पैदल हो चीता पर हो, वीआईपी ड्यूटी पर हो, कर तो डयूटी ही रहे हो। खड़े तो है वहां पर हम खड़े हैं तो आंख कान खोल कर दिमाग नही लगा सकते। कोई यह तो कह नही रहा कि आप अकेले जाकर कूद जाआ भिड जाओ, 10 लागो से, अगर कोई चीज दिख रही है तो बताइए अपने कोतवाल से अपने एसपी को बताइये कि साहब यह चीज यहां रोज होती है इसको बंद करना जरूरी हैै। यहां अगर 100 आदमी है तो मेरे पास 100 इनपुट है ना। हम मुखबिर की बात करते हैं। पुलिस से ज्यादा किसके पास होंगे अगर वह काम जो पब्लिक का आदमी कर रहा है हम खुद भी कर सकते है। 80 प्रतिशत सूचनाएं तो वो देता है हमें अपना दिमाग भी लगाना पड़ेगा और जिम्मेदारी भी समझनी पड़ेगी जहां-जहां जिस जनपद मे रहते हो वहां-वहां बहुत सारी चीजे दिखाई देती है हम लोग हमेशा कहते है कि जगह ऐसा होता है जब हम खुद डयूटी करतें है तो पता होना चाहिए। छोटे-छोटे बच्चे अगर नशा करते हैं तो सोचे कि अगर हमारा बच्चा होगा तो तभी कार्रवाई करेगें। पूरा भविष्य खराब हो जाता है बच्चे का एक बार नशे की आदत पड़ जाए तो एसएसपी अभिषक यादव सामने खडे पुलिसकर्मियों से पूछते है कितने लोगों को बच्चे हैं हाथ उठाओ कुछ के तो होंगे, पूरा हाथ उठाओ जिसके भी बच्चे सभी के ही है लगभग। जब हमारे बच्चे है तो कोई हमे क्यों समझाएगा इसलिए नशे के खिलाफ अभियान चलाकर कर उसको पूरी तरह बंद करना होगा ताकि बच्चे नशे से दूर रह सकें

एसएसपी अभिषेक यादव बोले हमारी जितनी पावर है किसके पास है पुलिस 1 मिनट में किसी को भी सीधा कर देती है अगर कोई नशा करता है, कोई कोचिंग इंस्टिट्यूट के बाहर गलत खड़ा है तो उसको पुलिस 2 मिनट में सही कर सकती है तुम्हें इतना अच्छा मौका मिला है सामज को सुधरने का अगर तुम भी वैसे नौकरी करोगे जैसे प्राइवेट सेक्टर में कर रहा है तो कैसे काम चलेगा , आपको एक मौका मिला है कुछ अच्छा काम करने का इसलिए नहीं कि कुछ और लोग तारीफ करेंगे कि हमने कुछ किया हमने दम वाली चीज की थी समाज में सुधार लाए थे


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