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फीस में रियायत चाहते हैं मेडिकल छात्र और अभिभावक

फीस में रियायत चाहते हैं मेडिकल छात्र और अभिभावक

देहरादून। दून और हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस में रियायती फीस पर पढ़ाई की सुविधा खत्म होने से छात्र और अभिभावकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उन्हें सालाना करीब सवा चार लाख रुपये शुल्क चुकाना पड़ रहा है, जबकि पहले 50 हजार रुपये सालाना पर एमबीबीएस करने की सुविधा थी। इसके बदले सरकार की ओर से पांच साल पर्वतीय क्षेत्रों में नौकरी का बॉन्ड भराया जाता था। यह व्यवस्था खत्म होने पर तमाम छात्रों ने एमबीबीएस में प्रवेश तो ले लिया, लेकिन अब अभिभावक फीस में रियायत देने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने चिकित्सा शिक्षा सचिव अमित नेगी को भी इस बाबत ज्ञापन भेजा है।

प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में रियायती फीस पर एमबीबीएस की पढ़ाई की हसरत पाले बैठे छात्र-छात्रओं को सरकार ने बीते वर्ष जून माह में झटका दिया था। दून व हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में बीते वर्ष से ही बांड की सुविधा खत्म की जा चुकी है। सिर्फ श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेने वाले छात्र-छात्रओं के लिए बांड की सुविधा है।

दून और हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में दाखिला ले चुके छात्र और उनके अभिभावक नई व्यवस्था से अत्याधिक परेशानी में हैं। अभिभावकों का कहना है कि सवा चार लाख रुपये शुल्क चुकाना मध्यमवर्गीय परिवार के लिए संभव नहीं है। निकटवर्ती राज्य इससे कई गुना कम फीस ले रहे हैं। इनमें ज्यादातर में फीस 30-50 हजार रुपये सालाना है। ऐसे में शुल्क का पुनर्निर्धारण किया जाए। इसे एक लाख रुपये सालाना करने की मांग उन्होंने की है। ज्ञापन देने वालों में मेघराज सिंह, सुदीप ममगाईं, नसरीन बानो, राजकुमार आदि शामिल रहे।

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