जिला पंचायत अध्यक्ष आंचल को मिला मोदी सरकार का बड़ा 'ईनाम'

जिला पंचायत अध्यक्ष आंचल को मिला मोदी सरकार का बड़ा ईनामदीन दयाल उपाध्याय पंचायत सशक्तीकरण पुरस्कार 2018-19

मुजफ्फरनगर। अपनी जीत के साथ ही इतिहास रचने वाली एक गांव के छोटे किसान परिवार की बहु जिला पंचायत अध्यक्ष आंचल तोमर ने एक बार फिर से आकाश छू लिया है। आज आंचल के दम पर ही राष्ट्रीय स्तर पर मुजफ्फरनगर का नाम रोशन हुआ है। आंचल के काम को मोदी सरकार ने भी सराहते हुए जिला पंचायत को सबसे बड़े 'ईनाम' से सम्मानित किया है।


पहली बार जिला पंचायत मुजफ्फरनगर को राष्ट्रीय स्तर पर यह बड़ा 'ईनाम' मिला है। केन्द्रीय पंचायत राज मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर द्वारा जिला पंचायत अध्यक्ष आंचल को दीन दयाल उपाध्याय पंचायत सशक्तीकरण पुरस्कार 2018-19 से सम्मानित किया गया है। किसान परिवार के आंगन से निकलकर आंचल ने जिस प्रकार से ग्रामीण विकास का दायित्व जिला पंचायत अध्यक्ष बनकर संभाला, उसी कार्यप्रणाली ने आज जनपद को गौरवान्वित कराने का काम किया है।

बता दें कि पंचायतों को जवाबदेह संस्था के रूप में विकसित किये जाने और पंचायतों को अधिनियम व नियम के अनुसार कार्यवाही करने हेतु प्रोत्साहित करने के उद्देश्य को लेकर साल 2011 में केन्द्र सरकार ने दीन दयाल उपाध्याय पंचायत सशक्तिकरण पुरस्कार शुरू किया। केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय हर वर्ष दीनदयाल उपाध्याय पंचायत सशक्तिकरण पुरस्कार समेत अन्य पुरस्कारों के लिए जिला पंचायत के अलावा ब्लॉकों और ग्राम पंचायतों का चयन करता है। इसके बाद पंचायती राज निदेशालय की ओर से टीम हर जिला पंचायत, ब्लॉक और ग्राम पंचायतों की प्रगति रिपोर्ट तैयार करती है। इसके बाद यह रिपोर्ट मंत्रालय को भेजी जाती है। इसी के तहत छह माह पूर्व निदेशालय की टीम ने जिला पंचायत कार्यालय का निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार की थी। सितम्बर 2019 में केन्द्र सरकार की ओर से पुरस्कार के लिए चयन किया गया। 23 अक्टूबर 2019 को दिल्ली के सुब्रह्मण्यम हॉल में भव्य पुरस्कार समारोह का आयोजन किया गया। इसमें देश भर से विभिन्न जिला पंचायत अध्यक्ष, ब्लाॅक प्रमुख और ग्राम पंचायत प्रमुख पहुंचे थे।

इसी समारोह में मुजफ्फरनगर जिला पंचायत अध्यक्षा आंचल को केन्द्रीय पंचायत राज मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने दीन दयाल उपाध्याय पंचायत सशक्तिकरण पुरस्कार प्रदान किया। उन्होंने आंचल को प्रशंसा पत्र सौंपा। इसके साथ ही इस पुरस्कार के अन्तर्गत जिला पंचायत को 50 लाख रुपये की राशि भी मिली, जो जनपद के विकास पर खर्च की जायेगी। इस ऐतिहासिक क्षण के दौरान जिला पंचायत की अपर मुख्य अधिकारी डॉ. नूतन शर्मा, प्रशासनिक अधिकारी राकेश शर्मा और आंचल के पति अर्जुन तोमर भी मौजूद रहे।

दीन दयाल उपाध्याय पंचायत सशक्तिकरण पुरस्कार जब शुरू किया गया था तो इसके लिए विजेता जिला पंचायत को 25 लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की जाती थी, लेकिन 2012-13 में इसे बढ़ाकर 40 लाख कर दिया गया और इस बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसमें और वृद्धि करते हुए पुरस्कार राशि 50 लाख कर दी। यह पुरस्कार स्वयं पीएम मोदी को प्रदान करने थे, लेकिन वह इस समारोह में नहीं आ सके।

महिलाओं बेटियों के लिए किया बेहतर काम


जिला पंचायत मुजफ्फरनगर की अध्यक्ष आंचल 14 जनवरी 2020 को अपना चार साल का कार्यकाल पूर्ण करने जा रही हैं। इस कार्यकाल में उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र के विकास के साथ ही सामाजिक दायित्वों का भी निर्वहन करने में कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ी। साधारण परिवार से ताल्लुक रखने के बाद भी आंचल ने काम के प्रति जो दृढ़ता दिखाई, उसने उनको आकाश में चमकने के अवसर भी उपलब्ध कराये हैं। आज मोदी सरकार के पंचायती राज विभाग के स्तर पर सबसे बड़े पुरस्कार को हासिल करने वाली आंचल इस उपलब्धि पर बेहद खुश हैं, वह इस सफलता का श्रेय जिला पंचायत के अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ ही सभी सदस्यों के बेहर समन्वय व प्रयासों को देती हैं। उनका कहना है कि केंद्र सरकार की योजनाओं और जनहितों के कार्यक्रमों को ग्रामीण क्षेत्रों में प्रभावी ढंग से लागू करने के साथ ही केंद्र व राज्य सरकारों की विकास परियोजनाओं में बेहतर कार्यो के आधार पर ही जिला पंचायत मुजफ्फरनगर को इस महत्वपूर्ण पुरस्कार के लिए चुना गया है। वित्तीय वर्ष में बेहतर प्रबंधन तथा ग्रामीण विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया गया था, जिसके कारण जिला पंचायत को यह उपलब्धि हासिल हो पायी है। हमने महिला सशक्तिकरण, सामूहिक विवाह, गंगा सफाई के साथ साथ समाजहित के कार्यों को बेहतर परिणाम से लागू कराया है।

जब सत्ता की हनक से टकराई गरीब गृहिणी



साल 2016 के अंतिम महीनों में यूपी में पंचायत चुनाव का आगाज हुआ। उस दौरान सपा की बहुमत की सरकार थी और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री पद पर आसीन थे। जिला पंचायत सदस्यों को चुनाव आया तो मुजफ्फरनगर जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट एससी महिला के लिए आरक्षित हो गयी। इसी को ध्यान में रखते हुए सपा और भाजपा के बीच चुनावी द्वंद्व शुरू हो गया। जिला पंचायत के अध्यक्ष पद के चुनाव को सत्ता पक्ष का चुनाव ही माना जाता है, लेकिन मुजफ्फरनगर में ऐसा नजर नहीं आया। यह चुनाव सत्ता की हनक से एक गरीब गृहिणी के सियासी टकराव का गवाह बना। 7 जनवरी 2016 को गुरुवार के दिन मुजफ्फरनगर जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव का नतीजा सामने आया तो परिणाम ने सभी को हैरत में डाल दिया। एक घरेलू महिला सत्ताधारी पार्टी की पूर्व मंत्री को हराकर घर के आंगन से निकलकर जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज हो गयी। साधारण स्वभाव वाली गृहिणी आंचल ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद की प्रतिष्ठापूर्ण कुर्सी पर कब्जा जमाकर इतिहास रच दिया। उन्होंने सपा की पूर्व मंत्री उमा किरण को 17 मतों के अंतर से हराकर यह जीत हासिल की थी। 43 सदस्यों ने चुनाव में अपना वोट डाला और आंचल को 26 वोट मिले थे।

पति के एक फैसले ने बदल दी आंचल की किस्मत, रचा इतिहास


मुजफ्फरनगर जनपद के गांव मखियाली निवासी अर्जुन सिंह तोमर ने करीब 12 वर्ष पूर्व उत्तराखंड के विकासनगर की निवासी दलित वर्ग से आने वाली आंचल से अर्जुन तोमर ने प्रेम-विवाह किया था। आंचल अपने पति के गांव आकर रहने लगी शादी के बाद दो बेटे भी हुए। आंचल का परिवार भले ही आर्थिक रूप से सम्पन्न नहीं था, लकिन एक गृहिणी के रूप में आंचल ने अपने परिवार को खूब संभाले रखा। जब 2016 में जिला पंचायत चुनाव का बिगुल बजा तो गांव गांव चुनावी बयार बहने लगी। ऐसे में छोटे से किसान व किराये पर ट्रैक्टर चलाकर अपने परिवार की गुजर-बसर करने वाले अर्जुन को उसके कुछ परिजनों ने आंचल को चुनाव लड़वाने का सुझाव दिया। पहले नानुकर हुई, लेकिन बाद में जब गांव में जाट समाज की पंचायत हुई तो आंचल को चुनाव लड़ाने पर मुहर लगा दी गयी। एससी महिला के लिए आरक्षित जिला पंचायत सदस्य पद के वार्ड-41 में जीत हासिल कर ली। आंचल और अर्जुन इस जीत से ही खुश थे, वह कभी सोच भी नहीं पा रहे थे कि जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ पायेंगे। आंचल ने जब जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए नामांकन किया, तो उनके बैंक खाते में मात्र 1250 रुपये की धनराशि दर्शाई गई थी। सदस्य बनने के बाद भाजपा की ओर से अर्जुन तोमर को काॅल आया और आंचल को प्रत्याशी बना दिया गया। आंचल ने भाजपा, रालोद और भाकियू गठबंधन में चुनाव लड़ा। उनके चुनाव प्रबंधन की कमान तत्कालीन केन्द्रीय कृषि राज्यमंत्री डाॅ. संजीव बालियान ने संभाली। सामने सत्ता पक्ष की पूर्व मंत्री उमा किरण थीं, लेकिन सत्ता को मात देकर 26 वर्षीय आंचल मुजफ्फरनगर की प्रथम नागरिक निर्वाचित होने के साथ ही मुजफ्फरनगर जिला पंचायत के इतिहास में पहली दलित महिला अध्यक्ष बनकर नया इतिहास रच दिया है। आंचल जिला पंचायत की 19वीं निर्वाचित अध्यक्ष बनीं, हालांकि वह 1923 के बाद से 2016 तक 49वीं अध्यक्ष हैं।

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