अयोध्या फैसला-सहारनपुर रेंज में शांति-सद्भाव रहा कायम

अयोध्या फैसला-सहारनपुर रेंज में शांति-सद्भाव रहा कायम

लखनऊ। सदियों पुराने अयोध्या केस के मुकदमे का सुप्रीम कोर्ट ने जिस खूबसूरत अंदाज में फैसला देकर हिन्दुस्तान की तहजीब को कायम किया है। उसी अंदाज में लोगों ने भी इस फैसले को दिल से स्वीकार करने का जज्बा दिखाकर सामाजिक एकता के विरोधी लोगों को आईना दिखाने का काम किया है। आज जिस प्रकार से उत्तर प्रदेश में शासन और प्रशासन अमन कायम करने में सफल नजर आया है। यह एक बदलते भारत का संकेत है। जो अयोध्या प्रकरण ना जाने कितने साम्प्रदायिक विवादों और बड़े दंगों के साथ ही सत्ता परिवर्तन का कारक बना आज उसी जब करीब 150 साल के बाद उसके मुकदमे का निपटारा सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ हुआ तो देश में भाईचारा फैलता दिखाई दिया। यह बड़ी जीत है।


उत्तर प्रदेश में शासन ने पूरी तैयारी की थी, और खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश को संवेदनशील मानकर पुलिस प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट था, लेकिन हमेशा ही संवेदनशील रहने वाला यह क्षेत्र शांत रहा। इसके साथ ही सहारनपुर रेंज के तीनों जिलों में पुलिस प्रशासन की अभूतपूर्व व्यवस्था ने लोगों का दिल जीतने का काम किया। अफसरों के लगातार भ्रमणशील रहकर हर वर्ग के बीच एक सकारात्मक संदेश फैलाया गया और बिना किसी पाबंदी को लागू किये पुलिस प्रशासन इस चुनौती को पार करने में सफल होता नजर आया।

सहारनपुर रेंज के तीनों जनपदों शामली, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर को साम्प्रदायिक स्तर पर अति संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। 1992 में कारसेवा के बाद जब अयोध्या में बाबरी विध्वंस हुआ तो सहारनपुर रेंज में भी साम्प्रदायिक सौहार्द्र बिगड़ा था। इसके बाद भी इस क्षेत्र ने समय समय पर कई घटनाओं के बाद कफ्र्यू जैसी पाबंदी को झेला। साल 2013 में कवाल कांड के बाद हुए दंगों में सबसे बड़ा नुकसान इसी क्षेत्र ने उठाया। हालांकि यहां पर साम्प्रदायिक सौहार्द्र की मिसाल भी कम नहीं है। यहां हिन्दू मुस्लिम भाईचारा भी चरम पर रहा है। सामाजिक सद्भाव की अनेक कहानियां यहां पर प्रचलित हैं





अयोध्या केस के आने वाले फैसले को लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ ही सहारनपुर रेंज को सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में माना जा रहा था। इस क्षेत्र में पुलिस और प्रशासन ने लगातार काम किया। सहारनपुर मण्डल के आयुक्त संजय कुमार और डीआईजी उपेन्द्र अग्रवाल ने तीनों जिलों में लगातार भ्रमण किया। जनपदों के आला अफसरों के साथ मीटिंग करते हुए जोनल और सैक्टर प्रभारियों के रूप में लगाये गये पुलिस कर्मियों व अफसरों का मनोबल बढ़ाते हुए उनको ड्यूटी के प्रति ईमानदारी और निष्पक्षता का पाठ पढ़ाया। जनता के बीच गये और लोगों से सीधे संवाद करते हुए उनको सुरक्षा का विश्वास दिलाया तो वहीं उनको सामाजिक सद्भाव के लिए इस बात पर तैयार रहने का सकारात्मक संदेश दिया कि फैसला कुछ भी हो, हम आपसी भाईचारा बिगड़ने नहीं देंगे।

शनिवार को भी आयुक्त संजय कुमार और डीआईजी उपेन्द्र कुमार अग्रवाल तीनों जनपदों में भ्रमण पर नजर आये और लोगों के बीच अपनी उपस्थिति दर्ज करायी। फैसले के दिन जहां उत्तर प्रदेश में कमोबेश सभी जनपदों में आम जनमानस के लिए अनेक पाबंदियां लगायी गयी, सहारनपुर रेंज के तीनों जनपद इन पाबंदियों से अछूते रखे गये। यहां पर शराब की दुकानों को खुला रखा गया तो वहीं इंटरनेट पर भी कोई रोक टोक नहीं लगायी गयी। जबकि प्रदेश में आगरा, अलीगढ़ सहित अन्य जनपदों में इंटरनेट को बन्द करा दिया गया था। यह सहारनपुर मण्डल पुलिस प्रशासन की बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।

मुजफ्फरनगर में विश्वास जगाने में सफल, डीएम सेल्वा, एसएसपी अभिषेक

सहारनपुर रेंज के सबसे संवेदनशील जनपद मुजफ्फरनगर में अयोध्या के फैसले पर भाईचारे का परचम अति संवेदनशील क्षेत्र मीनाक्षी चैक से शिव चैक तक फहराता नजर आया। यहां पर डीएम सेल्वा कुमारी जे. और एसएसपी अभिषेक यादव बिना किसी पाबंदी के लोगों के बीच यह विश्वास जगाने में सफल रहे कि कुछ नहीं होने देंगे। माहौल बिगड़ने नहीं दिया जायेगा। उन्होंने जनता को इस बात के लिए भी तैयार किया कि यह जनपद आपका है, इसको भाईचारे से संभालें और किसी भी सूरत में माहौल खराब ना होने दें। डीएम और एसएसपी के प्रेरक संदेशों का असर भी सभी वर्गों के लोगों के बीच नजर आया। डीएम और एसएसपी ने लगातार सभी वर्गों के बीच जाकर मीटिंग की। शांति समितियों की बैठकों में यही संदेश दिया कि ''फैसला चाहे जो भी आये, हम स्वीकार करेंगे''। दोनों अफसरों के इस मोटिवेशन का लोगों के मन-मस्तिष्क पर असर भी साफ नजर आया।


फैसला आने के बाद ना तो कहीं पर कोई जश्न मनाया जा सका और ना ही मिठाई बंटी व आशितबाजी का नजारा देखने को मिला। कहीं पर भी शोक का माहौल नहीं था। सभी लोगों ने मिलकर इस फैसले को हिन्दुस्तान की गंगा जमुनी तहजीब को कायम रखने वाला बताया। हिन्दूवादी संगठनों के पदाधिकारी मुस्लिमों के बीच जाकर उनके गले मिलते देखे गये। डीएम और एसएसपी ने फैसला आने से पहले ही सवेरे यह साफ कर दिया था कि किसी को भी घबराने की आवश्यकता नहीं है, लोगों के सहयोग से हम किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं। पुलिस और प्रशासन की व्यवस्थाओं के बीच यहां के लोगों ने भी यह साबित करने का काम किया है कि यह जिला हकीकत में मुहब्बतनगर है। यहां व्यवस्था को परखने के लिए आयुक्त संजय कुमार और डीआईजी उपेन्द्र अग्रवाल ने भी दौरा किया। वह शिव चैक गये, मीनाक्षी चौक गये और ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर डीएम व एसएसपी के साथ जनता के बीच रुककर भ्रमण किया। सकारात्मक व्यवस्थाओं के लिए उन्होंने डीएम और एसएसपी के साथ ही जनता के संयम बरतने पर खुशी जाहिर की।

सौहार्द्र का संदेश देने में आगे रहे सहारनपुर और शामली






सहारनपुर रेंज के जनपद शामली और जनपद सहारनपुर में भी अयोध्या केस के निपटारे को सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ अपनाया गया। इन दोनों जनपदों में भी पुलिस प्रशासन ने बेहतरीन व्यवस्था के साथ लोगों को साथ लेकर शांति एवं कानून व्यवस्था को कायम किया। शामली जनपद में डीएम अखिलेश सिंह और एसपी अजय कुमार ने भी जनता के बीच रहकर फैसला आने से पहले ही असामाजिक तत्वों को स्पष्ट संदेश देने का काम किया। सोशल मीडिया पर निगरानी करायी और चिन्हित किये गये लोगों की लगातार माॅनीटरिंग से वह फैसले से पहले और इसके बाद कानून का राज स्थापित करने में सफल रहे। इसी प्रकार सहारनपुर जनपद में संवेदनशीलता के बाद भी जिस प्रकार से डीएम आलोक कुमार पाण्डेय और एसएसपी दिनेश कुमार प्रभु ने लोगों का विश्वास जीतने में सफलता अर्जित की है, वह इन अफसरों की कार्यप्रणाली को प्रदर्शित करता है। शामली और सहारनपुर में भी पुलिस व प्रशासन अलर्ट रहा लेकिन जनता के लिए कोई भी पाबंदी लागू नहीं की गयी। इन तीनों जनपदेां में जिला स्तरीय अफसरों की व्यवस्थाओं के चलते आला अफसर भी गदगद नजर आ रहे हैं।

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