कोतवाली की 6 मर्डर मिस्ट्री-कपरवान का कातिलों पर शिकंजा

कोतवाली की 6 मर्डर मिस्ट्री-कपरवान का कातिलों पर शिकंजा

मुजफ्फरनगर। किसी जमाने का क्राईम कैपिटल यह जनपद अब अपराधियों के लिए एक कब्रगाह साबित हो रहा है। जनपद के संवेदनशील थानों में शुमार शहर कोतवाली पुलिस लगातार अपराध उन्मूलन के पैमाने पर सफलता के नये आयाम स्थापित करने में जुटी है। इस दौरान शहर कोतवाली प्रभारी अनिल कपरवान के नेतृत्व में कई नामी और ईनामी बदमाशों का पुलिस ने एनकाउंटर उनको अंजाम तक पहुंचाने का काम किया तो क्षेत्र में होने वाली घटनाओं को भी एक चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए उनका सफल अनावरण किया।


इंस्पेक्टर अनिल कपरवान की कार्यप्रणाली के अफसर भी कायल हैं। घटना के अनावरण में माहिर शहर कोतवाल ने जिस प्रकार रोष और आक्रोश का कारण बन रहे अधिवक्ता समीर सैफी के प्रकरण में सूझबूझ दिखाते हुए 72 घंटे के अंतराल में ही खुलासा करते हुए मुख्य हत्यारोपी सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, उसने मर्डर मिस्ट्री के खुलासे का मास्टर साबित करने का काम किया है। शहर कोतवाली क्षेत्र में उनके कार्यकाल के दौरान जब भी चुनौतीपूर्ण वारदात सामने आयी, इंस्पेक्टर अनिल कपरवान ने बेहतर परिणाम के साथ उनको तत्काल खोलकर जनता में पुलिस के प्रति विश्वास को पुख्ता करने का काम किया है। कोतवाली के पास ही घर पर वयोवृद्ध सुनीता की हत्या हो, या 13 साल के किशोर जुबेर की हत्या का बलाइंड केस, इंस्पेक्टर अनिल कपरवान और उनकी टीम ने हर चुनौती पर खुद को पहले से बेहतर साबित करने का काम किया है। समीर हत्याकांड की चुनौती को पुलिस ने जिस प्रकार से सुझलाया है, वह काबिले तारीफ है, खुद एसएसपी अभिषेक यादव ने भी इसके लिए शहर कोतवाली पुलिस की प्रशंसा की है।

1.समीर हत्याकांड-अपराधियों के दिमाग को पढ़कर दी शिकस्त

शहर कोतवाली क्षेत्र के सबसे सनसनीखेज और चर्चित कांड में शामिल हुई अधिवक्ता समीर सैफी मर्डर मिस्ट्री को थाना प्रभारी इंस्पेक्टर अनिल कपरवान ने मास्टर स्ट्रोक के साथ खोला, इस केस में उनका मास्टर स्ट्रोक यह रहा कि उन्होंने अपराधियों के हर भ्रम जाल को उनका दिमाग पढ़कर ही खोला। पुलिस ने मुख्य हत्यारोपी सिंगूर अल्वी को इस भ्रम में रखा कि वह पुलिस को चकमा देने में सफल हो गया है। जब शुरूआती पूछताछ में सिंगूर अल्वी के खिलाफ कुछ भी सुबूत पुलिस के हाथ नहीं लग पाये और समीर के मोबाइल की लोकेशन व एसएमएस से पुलिस भ्रमित होती रही तो इंस्पेक्टर अनिल कपरवान ने सिंगूर अल्वी के सामने ही एक नाटक रचा। सीडीआर के आधार पर सिंगूर अल्वी को बताया गया कि पुलिस को समीर की लोकेशन मिल गयी है। समीर दिल्ली में है और उसको लाने के लिए पुलिस टीम को रवाना कर दिया गया है। समीर संतुष्ट हो गया कि पुलिस गच्चा खा गयी है। जबकि अनिल कपरवान सिंगूर अल्वी और उसके साथियों के 15 अक्टूबर और इसके बाद से लोकेशन लेने में जुट गये। उनके मोबाइल फोन को जब सर्विलांस के पैमाने पर परखा गया तो सारी कहानी सामने आने लगी। बस इन कडियों को जोड़ने की आवश्यकता थी। कुछ कच्चे पक्के से सुबूतों के साथ जब इंस्पेक्टर अनिल कपरवान ने पूरी दृढ़ता के साथ सिंगूर अल्वी व उसके साथियों के सामने पेश होकर सख्ती की तो वह टूट गये और समीर हत्याकांड का खुलासा करने में कोतवाली पुलिस सफल हो गयी।

2. सुनीता मर्डर मिस्ट्री-दिल की सुनी, निर्दोष बेटा बचा

इससे पहले इंस्पेक्टर अनिल कपरवान ने कोतवाली के पास ही एक वयोवृद्ध महिला सुनीता की मर्डर मिस्ट्री का खुलासा कर अपने आला अफसरों एवं क्षेत्र की जनता में वाहवाही बटोरी। यह मर्डर मिस्ट्री पुलिस के लिए बड़ी चुनौती थी क्योंकि 56 साल की सुनीता की किसी से रंजिश की घटना तथा मौके पर लूट की वजह भी सामने नही आ रही थी। पुलिस ने हत्या के बाद महिला के शव के पास से उसके बेटे वीशू को पकड़ा था। पूछताछ में महिला के बेटे विशू का बार बार ब्यान बदलना भी पुलिस जांच को भटका रहा था। सबको लग रहा था कि वीशू ने ही अपनी माँ की हत्या की है। दो दिनों तक वीशू को हिरासत में रखकर पूछताछ की गयी। कोई भी साक्ष्य वीशू को निर्दोष साबित नहीं कर रहा था। परिजन भी परेशान थे कि वीशू ऐसा कैसे कर सकता है। उलझनों से भरपूर इस मर्डर मिस्ट्री में इंस्पेक्टर कोतवाली अनिल कपरवान ने अपने दिमाग को दरकिनार करते हुए दिल की बात को सुना। उनका दिल कह रहा था कि वीशू अपनी मां की हत्या नहीं कर सकता है, लेकिन दिमाग सुबूतों की ओर ले जाकर वीशू को ही कातिल साबित कर रहा था। इस मर्डर मिस्ट्री को लेकर दिल व दिगाम के द्वंद्व में उलझे इंस्पेक्टर अनिल कपरवान ने कुछ ओर प्रयास किया, इस दौरान डॉग स्क्वॉड को घटनास्थल पर छोड़ा गया, लेकिन वह बिल्डिंग में घूमने के बाद जीने से नीचे उतरकर गली में आकर रुक गया। कुछ भी समझ में नहीं आ पा रहा था। हत्या की इस सनसनीखेज वारदात के बाद पुलिस ने रुड़की रोड स्थित प्रतिष्ठानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालते हुए हत्यारोपी की तलाश की। घटना के समय परशुराम जयंती की शोभायात्रा निकलने के चलते पुलिस को फुटेज में किसी तरह के सुराग मिलने की संभावना कम ही नजर आ रही थी लेकिन घटना के बाद से क्राइम कंट्रोल के मास्टर कहे जाने वाले अनिल कपरवान अपनी टीम के साथ इस घटना की कड़ियां जोड़ने में लगे रहे और सीसीटीवी फुटेज से उन्होंने जयंती पर उमड़ी भीड़ के बीच से असली कातिल को ढूंढ निकाला। सुनीता की हत्या घर में चोरी के लिए घुसे एक शातिर ने की थी। अनिल कपरवान की सूझबूझ से इस केस में एक निर्दोष बेटा जेल जाने से बचा।

3. जब किया हुमा की हत्या का खुलासा

ऐसा नही है कि कोतवाल अनिल कपरवान ने सुनीता कत्ल का खुलासा ही इतनी जल्दी किया है। इससे पहले भी वह कई मर्ड़र मिस्ट्री का खुलासा कर चुके है। गौरतलब है कि 11 अप्रैल को अम्बा विहार में हुमा की हत्या का खुलासा भी अनिल कपरवान ने घटना के 5 दिन बाद ही कर दिया था। हुमा की हत्या भी एक मर्डर मिस्ट्री मानी जा रही थी, लेकिन अनिल कपरवान ने अपनी टीम के साथ इस केस में बेहतरीन परिणाम के साथ सफलता अर्जित की।

4. 13 वर्षीय किशोर जुबेर की मर्डर मिस्ट्री-80 घंटे में ओपन हुआ ब्लाइंड केस

दिनांक 23 अगस्त 2018 को सुबह 8 बजे शहर कोतवाली क्षेत्र के शहाबुद्दीनपुर रोड बाईपास पर एक खाली प्लाट में 13 वर्षीय जुबेर पुत्र शहजाद निवासी लद्दा वाला का शव पड़े होने की सूचना अनिल कपरवान को मिली थी। घटना की सूचना पर पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और शव को अपने कब्जे में ले लिया। इस हत्या के संबंध में कोतवाली नगर पर मुकदमा पंजीकृत किया गया तब से ही शहर कोतवाल अपनी टीम के सब इंस्पेक्टर अक्षय शर्मा सिपाही मनेंद्र, अमित तेवतिया, संदीप त्यागी, मोहित व रोहित तेवतिया के साथ मिलकर इस मर्डर मिस्ट्री के खुलासे में जुट गए थे। इस हत्याकांड के खुलासे में सबसे बड़ी अड़चन मृतक जुबेर की किसी से रंजिश सामने नहीं आ रही थी लेकिन अपनी पूर्व की तैनाती में इस तरह की घटनाओं को वर्कआउट करने वाले शहर कोतवाल अनिल कपरवान ने इस घटना पर काम करना शुरू किया तो पुलिस को अहम सुराग हाथ लगे दिनांक 23 अगस्त सुबह 8 बजे जुबेर का शव मिलने के बाद से दिनांक 26 अगस्त की दोपहर तक यानी 80 से भी कम घंटे के समय में अनिल कपरवान ने इस घटना को वर्कआउट करते हुए फैसल पुत्र आमिर, फैसल पुत्र सलीम, अनस उर्फ पुन्ना पुत्र नईम, समीम उर्फ बिज्जू पुत्र आसिफ, वाजिद पुत्र सोनू निवासीगण शहाबुद्दीन पुर रोड थाना कोतवाली को गिरफ्तार कर बेहतरीन खुलासा कर दिया। पुलिस पूछताछ में इन नव युवकों ने हत्या की घटना कबूल करते हुए बताया की 18 अगस्त 2018 को दोपहर में मृतक जुबेर का फैसल समीम व वाजिद से किसी बात को लेकर झगड़ा हो गया था जिसमें दोनों तरफ से मारपीट हुई थी तब इन तीनों ने जुबेर को जान से मारने की धमकी दी थी दिनांक 23 अगस्त 2018 को मृतक जुबेर जब अपने घर से अपनी बहन की दवाई लेने निकला था तो रास्ते में उपरोक्त अभियुक्त गणों ने जुबेर को रोककर उस से माफी मांगी एवं झगड़ा खत्म करने को कहा और उसे बहकाकर पास के सुनसान इलाके पर ले गए वहां एक खाली प्लाट पर इन लोगों ने मिलकर जुबेर की हत्या कर दी और वापस अपने घर आ गए पुलिस छानबीन करती हुई इन हत्यारों तक पहुंच गई और अनिल कपरवान की टीम में इस सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा कर दिया।

5. चौकीदार वहीद के कातिलों का एनकाउंटर

13 जुलाई 2018 शहर कोतवाली क्षेत्र के चरथावल मोड़ स्थित किदवईनगर निवासी सलीम के सेनेटरी के गोदाम में रहने वाले चौकीदार गांव छपरा निवासी वहीद (60) पुत्र इस्माइल की रात हत्या कर दी गई थी। बदमाश बिना किसी लूटपाट के वहां से भाग गए थे। वहीद के बेटे ने अज्ञात में हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। घटना के बाद से ही प्रभारी निरीक्षक अनिल कपरवान खुलासे में जुट गये थे। इसी दौरान एक प्रभारी निरीक्षक अनिल कपरवान और बदमाशों की पीनना बाईपास पर मुठभेड़ हो गई। मुठभेड़ में दबोचे गए तीनों बदमाशों नरेंद्र उर्फ मामा, निशांत उर्फ नीशू पाल व आबिद दर्जी ने पूछताछ में उक्त गोदाम में चौकीदार वहीद की हत्या का भी खुलासा किया है। घटना को अंजाम देने से दो दिन पूर्व लुटेरों ने लूटपाट के इरादे से गोदाम की रेकी की थी, जिसके बाद 13 जुलाई की रात उक्त तीनों आरोपी ही दीवार फांदकर गोदाम में जा घुसे। वहां आहट सुनकर चैकीदार वहीद ने जैसे ही टॉर्च की रोशनी उन पर मारते हुए शोर मचाने का प्रयास किया, नरेंद्र उर्फ मामा ने वहीं पर पड़ा एक डंडा उठाकर चैकीदार के सिर पर ताबड़तोड़ कई प्रहार कर दिए, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी।

6. अवैध सम्बंधों की भेंट चढ़े 14 वर्षीय दीपक की हत्या का खुलासा

ऐसेे ही एक अन्य ब्लाइंड केस में शहर कोतवाली पुलिस ने वहलना गांव के दीपक की मौत के राज से पर्दा उठा दिया था। गांव वहलना निवासी सोहन का 14 वर्षीय बेटा दीपक आठ जून की सुबह खेतों में काम करने के लिए गया था। काफी देर तक वह लौट कर नहीं आया, तो परिजन उसकी तलाश में खेतों पर गए थे। दीपक की गर्दन कटी लाश पड़ी मिली थी। ग्रामीणों की भीड़ भी मौके पर पहुंच गई थी। शोर मचा था कि दीपक पर किसी जंगली जानवर ने हमला किया है। यह शोर मचाने वालों में भी गौरव शामिल था। साथ ही गौरव समेत कुछ ग्रामीणों ने शव का पोस्टमार्टम कराने से इंकार किया था। तब पुलिस के समझाने पर परिजन पोस्टमार्टम कराने को तैयार हुए थे। तभी से अनिल कपरवान को शक था कि मामला जानवर के हमले का नहीं मर्डर का है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्पष्ट हो गया था कि मौत जानवर के हमले से नहीं, बल्कि गर्दन पर घातक चोट पहुंचाने से हुई थी। शहर कोतवाल अनिल कपरवान इस घटना को भी वर्कआउट कर दिया था । गांव के ही गौरव कुमार पुत्र मुंशीराम पाल ने दीपक की हत्या की थी। उसे हिरासत में ले कर पूछताछ की तो उसने अपने जुर्म कबूल कर लिया। बताया कि दीपक खेत में गौरव और उसकी चाची को आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया था। दीपक कहीं वह गांव में ना जाकर बता दे? इस पर गौरव ने तुरंत ही उसकी हत्या करने की साजिश रची। पहले उसने दीपक को अपनी बातों में लगाया और मौका पाकर फावड़े से उसकी गर्दन काट कर हत्या कर दी।

अनिल कपरवान-तीन कप्तान के कार्यकाल में कमाल की कार्यप्रणाली


शहर कोतवाली को जनपद के सबसे संवेदनशील थानों में माना जाता है। शहर का अधिकांश संवेदनशील क्षेत्र इसी थाने के अन्तर्गत आता है। शहर का सबसे व्यस्ततम बाजार के साथ ही सर्राफा बाजार की सुरक्षा का दायित्व भी इसी थाना पुलिस का है। ऐसे में शहर कोतवाली का चार्ज भी काफी अहम माना जाता है। इस चार्ज के लिए अफसरों को काबिल अफसरों की तलाश रहती है, वर्तमान में शहर कोतवाली का चार्ज संभाल रहे इंस्पेक्टर अनिल कपरवान की कार्यप्रणाली का प्रमाण यह है कि उन्होंने तीन पुलिस कप्तानों के कार्यकाल में कोतवाली को अपराध उन्मूलन के उत्कृष्ट परिणाम तक ले जाकर दिखाया है। शहर कोतवाल के रूप में करीब 20 महीनों का कार्यकाल पूर्ण कर चुके इंस्पेक्टर अनिल कपरवान ने हर मौके पर स्वयं को साबित करने का काम किया है। जब मुजफ्फरनगर की कानून व्यवस्था का जायजा लेने के लिए पुलिस मुखिया डीजीपी ओपी सिंह यहां पहुंचे तो उसी रात अनिल कपरवान अपनी टीम के साथ बदमाशों से मुठभेड़ कर रहे थे। उस रात उन्होंने एक लाख के ईनामी बदमाश को गिरफ्तार किया था। सहारनपुर जनपद से इंस्पेक्टर अनिल कपरवान का तबादला कर मुजफ्फरनगर तैनात किया गया था। जनवरी 2018 में तत्कालीन एसएसपी अनन्त देव तिवारी ने उनको शहर कोतवाली का चार्ज सौंपा। इसके बाद से वह लगातार इसी जिम्मेदारी का बखूबी पालन कर रहे हैं। अनिल कपरवान के कार्यकाल के दौरान मौजूदा एसएसपी अभिषेक यादव जनपद में तीसरे पुलिस कप्तान है। अनिल कपरवान ने अनन्त देव के समय में अपराध उन्मूलन में बेहतरीन सफलता अर्जित की। सोहारका मेरठ डबल मर्डर के आरोपी बदमाश विकास जाट का कोतवाली पुलिस ने एनकाउंटर किया। इसके बाद उन्होंने एसएसपी रहे सुधीर कुमार सिंह के समय में भी बेहतर परिणाम दिये और अब अभिषेक यादव की कप्तान में भी वह कमाल की कार्यप्रणाली दिखा रहे हैं। अनिल कपरवान ने शहर कोतवाली में अपने 20 साल के कार्यकाल में 5 फुल और 30 हाफ एनकाउंटर किये। अनिल कपरवान ने विकास जाट, शमीम, आशु के साथ ही रोहित सांडू और उसके साथी बदमाश के एनकाउंटर किये हैं। इसके साथ ही उनके कार्यकाल में कोतवाली पुलिस ने 30 बदमाशों को हाफ एनकाउंटर में गिरफ्तार कर जेल भेज है।

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