आंगनबाड़ी केन्द्रों पर बाल सुपोषण उत्सव के साथ मनाया गया बचपन दिवस

आंगनबाड़ी केन्द्रों पर बाल सुपोषण उत्सव के साथ मनाया गया बचपन दिवस

लखनऊ । उत्तर प्रदेश के सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों पर बृहस्पतिवार को पहली बार बाल सुपोषण उत्सव के साथ बचपन दिवस मनाया गया। इस आयोजन में शामिल होने आईं माताएं घर से भोजन पकाकर लाईं और सभी बच्चों ने अपने आंगनबाड़ी केन्द्र पर एक साथ बैठकर खाया। अभी तक केन्द्रों पर सिर्फ बचपन दिवस ही मनाया जाता था। जिसमें केंद्र पर उपलब्ध सामाग्री वितरित की जाती थी।


निदेशक, बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार शत्रुघ्न सिंह ने यह जानकारी देते हुए बताया कि हर महीने की 5 तारीख को बचपन दिवस मनाया जाता है लेकिन इस वर्ष पोषण माह के पहले ही तय किया गया था कि बचपन दिवस को बाल सुपोषण उत्सव के साथ मनाया जाए। उन्होने बताया कि बाल सुपोषण उत्सव के दौरान अभिभावक जो खाना पकाकर लाएंगे वही बच्चों को खिलाया जाएगा। इसमें वह केंद्र से मिलने वाले पोषाहार का भी उपयोग कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि इस तरह के आयोजन का उद्देश्य यह भी है कि माताओं/अभिभावकों को एक ऐसा मंच उपलब्ध कराया जाए जहां वह बच्चों के लिए पौष्टिक भोजन बनाने, बच्चों को उसे खिलाने व भोजन की पौष्टिकता पर जानकारी ले सके। केंद्र पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के जरिये माताओं व अभिभावकों को ऊपरी आहार के महत्व के बारे में भी विस्तार से बताया जाता है। इस दिन सभी केन्द्रों पर बच्चों को समूह में बैठाकर भोजन कराया गया। साथ ही 6 माह से 6 वर्ष तक के बच्चों की माताओं को ऊपरी आहार के बारे में जागरूक किया गया।



सिंह ने बताया कि जन्म से 6 माह तक बच्चे के लिए मां का दूध ही बच्चे के लिए सम्पूर्ण आहार माना जाता है तथा 6 माह के बाद बच्चे को मां के दूध के साथ ऊपरी आहार की जरूरत होती है क्योंकि बच्चे की लंबाई, वजन, मांस के साथ उसके अंगों में वृद्धि होती है। साथ ही बच्चे का मानसिक विकास भी होता है। जैसे-जैसे बच्चा बढ़ता है उसकी गतिविधियां बढ़ने लगती हैं जैसे-पलटना, रेंगना, खड़ा होना चलना इत्यादि। इन सभी गतिविधियों के लिए बहुत सारी कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन, विटामिन और खनिज की जरूरत होती है और बच्चे की यह जरूरत पूरक आहार से पूरी होती है।

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