समस्त श्रेणी के पंजीकृत कृषक योजना के अंतर्गत पा सकेंगे अनुदान

समस्त श्रेणी के पंजीकृत कृषक योजना के अंतर्गत पा सकेंगे अनुदान

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने मृदा में सूक्ष्म तत्वों की कमी को दूर करने एवं भूमि सुधार हेतु जिप्सम वितरण की योजना को स्थाई रूप से कृषि विभाग में संचालित करने हेतु स्वीकृति प्रदान कर दी है। यह जानकारी आज जहां प्रमुख सचिव कृषि, अमित मोहन प्रसाद ने दी। उन्होंने बताया कि जिप्सम के प्रयोग से मृदा के भौतिक रासायनिक एवं जैविक गुणों में सुधार होता है जिससे फसलों के उत्पादन उत्पादकता एवं गुणवत्ता में वृद्धि होती है। जिप्सम में विद्यमान सल्फर एवं कैल्शियम तथा अन्य सूक्ष्म तत्व भूमि की उर्वरा शक्ति को बढ़ाने में सहायक होते हैं।

प्रमुख सचिव कृषि, अमित मोहन प्रसाद ने बताया कि भारत सरकार की संचालित योजनाओं राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एन0एफ0एस0एम), एन0एफ0एस0एम0 आयल सीड्स, पूर्वी उत्तर प्रदेश में हरित क्रांति के विस्तार की योजना जी आर आई के अंतर्गत 75 प्रतिशत अनुदान पर जिप्सम वितरण का कार्य कराया जाएगा। इसमें भारत सरकार की योजनाओं से 50 प्रतिशत अनुदान केंद्र अंश के रूप में तथा 25 प्रतिशत अनुदान राज्य सेक्टर की मृदा में सूक्ष्म तत्वों की कमी को दूर करने एवं भूमि सुधार जिप्सम वितरण की योजना से वहन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रदेश में वितरित किए गए मृदा स्वास्थ्य कार्ड में दिखाई गई स्थिति की किस भूमि में किस-किस तत्व की कमी है, उसके अनुसार ही जिप्सम किसानों को उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाएगा।

प्रमुख सचिव कृषि, अमित मोहन प्रसाद ने कहा कि योजना के अंतर्गत समस्त श्रेणी के पंजीकृत किसान अनुदान का लाभ पाने के लिए हकदार होंगे। उन्होंने बताया कि लघु एवं सीमांत कृषकों को प्राथमिकता दी जाएगी एवं किसी एक कृषक को 2 हेक्टेयर की सीमा तक ही जिप्सम उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि जिप्सम पर अनुदान का भुगतान पंजीकृत लाभार्थियों को डी0बी0टी0 के माध्यम से सीधे उनके खाते में किया जाएगा।

प्रमुख सचिव कृषि, अमित मोहन प्रसाद ने बताया कि जिप्सम के प्रयोग से विशेष तौर पर दलहनी एवं तिलहनी फसलों के उत्पादन में वृद्धि को दृष्टिगत रखते हुए योजना को अस्थाई रूप से आगामी वर्षों में कृषि विभाग में चलाया जाना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि योजना प्रदेश के समस्त 75 जनपद में लागू होगी। इस योजना का उद्देश्य झाड़ी एवं ऊसर भूमि को पुनः खेती योग्य बनाने एवं उर्वरा शक्ति को बढ़ाना भूमि के पीएच मान को संतुलित करते हुए मिट्टी की संरचना में सुधार करना है। इससे पौधों में कैल्शियम एवं सल्फर की कमी को दूर करने में सहायता मिलेगी और जिप्सम के उपयोग से फसल के उत्पादन में वृद्धि होगी।

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