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पपीते की खेती ने खोला किसानों की उन्नति का द्वार, सरकार देगी आधा खर्च

पपीते की खेती ने खोला किसानों की उन्नति का द्वार, सरकार देगी आधा खर्च

कटिहार। जिले में पपीते की खेती को बढ़ावा देने के लिए विभागीय कवायद तेज हो गई है। सूबे में पपीते की खेती को बढावा देने के लिए किसानों को इस पर पचास फीसदी अनुदान दिया जा रहा है। उद्यान विभाग द्वारा मुख्यमंत्री सघन बागबानी मिशन योजना के तहत यह पहल की जा रही है। इसमें पपीते के साथ आम की बागवानी पर अनुदान का प्रावधान किया गया है। इसके लिए लगातार किसानों को प्रेरित भी किया जा रहा है। पपीते की खेती के लिए इस वर्ष जिले में 15 हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

पपीते की खेती के लिये एक किसान को अधिकतम एक हेक्टेयर खेती के लिए अनुदान दिए जाने का प्रावधाान है। एक हेक्टेयर में अनुमानित खर्च एक लाख रुपये माना गया है। इसमें 50 हजार की राशि विभाग द्वारा दी जाएगी। यह अनुदान पहले चरण में 75 प्रतिशत व दूसरे चरण में 25 प्रतिशत के रुप में किसानों को बैंक खाते में दी जाएगी। किसानों को पपीते का पौधा बिहार सरकार के वैशाली नर्सरी से उपलब्ध कराया जाएगा। इसमें रेडलेडी प्रभेद का पौधा किसानों को दिया जाएगा। यह प्रभेद उत्पादन के लिहाज से उत्तम माना जाता है। एक हेक्टेयर में 25 सौ पौधे लगते है तथा इससे लगभग 75 से 100 टन पपीते का संभावित उत्पादन होता है। एक बार पौधा लगाने पर दो साल तक अच्छी पैदावार ली जा सकती है। पपीते के पेड़ का जीवनकाल का दो साल माना जाता है। इसका फलन सात से आठ माह में शुरु हो जाता है।

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